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3 min read | अपडेटेड January 15, 2025, 09:28 IST
सारांश
ITR Filing Last Date: असेसमेंट वर्ष के लिए ITR 31 जुलाई तक फाइल करना होता है लेकिन इसे नहीं कर पाने पर पेनाल्टी देकर विलंबित या रिवाइज्ड ITR फाइल किया जा सकता है। अगर यह डेडलाइन भी मिस हो जाती है तो आयकर विभाग को अर्जी देनी पड़ती है।
आयकर रिटर्न में आय के छोटे-बड़े हर स्रोत का जिक्र है जरूरी
अगर आपने असेसमेंट वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया है तो आज ही कर दें। विलंबित और रिवाइज्ड ITR फाइल करने की आखिरी तारीख बुधवार 15 जनवरी, 2025 है। इससे पहले फाइल नहीं करने पर जुर्माना पड़ सकता है।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई होती है लेकिन किसी कारणवश इसे ना कर पाने पर विलंबित (Belated) रिटर्न फाइल किया जा सकता है। इसके अलावा एक बार फाइल करने के बाद कुछ बदलाव करने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न भी फाइल करने की सुविधा होती है।
पहले ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2024 थी जिसे बढ़ाकर 15 जनवरी, 2025 कर दिया गया है। तब तक ITR ₹5,000 की पेनाल्टी के साथ फाइल किया जा सकता है और ₹5 लाख से कम आय वाले करदाता ₹1,000 की पेनाल्टी देकर फाइल कर सकते हैं।
हालांकि, 15 जनवरी की डेडलाइन भी मिस हो जाने पर और पेनाल्टी के साथ ITR फाइल कर सकते हैं। आयकर कानून के Section 234F के तहत रिटर्न अगर 31 मार्च के पहले फाइल किया जाता है तो पेनाल्टी ₹10,000 पड़ेगी। वहीं, ₹5 लाख से कम सालाना आय वालों के लिए यह राशि ₹1000 है। बचे हुए टैक्स के ऊपर Section 234A के तहत ब्याज भी लगेगा।
अगर आखिरी तारीख तक ITR फाइल नहीं किया जाता तो इसके लिए आयकर विभाग में अर्जी दाखिल करनी होती। विभाग यह तय करता है कि दूसरा मौका देने पर क्या फैसला करना है और इसके पीछे की वजह वाजिब है या नहीं।
अगर विभाग सही समझता है तो दूसरा मौका देता है। इसके लिए ₹10,000 की पेनाल्टी और 1% ब्याज के साथ ITR फाइल करने का मौका मिल सकता है। हालांकि, अगर टैक्स रिटर्न फाइल नहीं होता है तो आयकर कानून के सेक्शन 276 CC के तहत सजा भी हो सकती है।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त यह ध्यान जरूर रखना होता है कि आमदनी के सभी स्रोतों का इसमें जिक्र करना होता है। आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर टैक्स लग सकता है। बीमा एजेंट्स के कमीशन फ्रीलांसर या प्रोफेशनल के बराबर माने जाते हैं।
कमर्शलो, रेजिडेंशल या इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी और परिवारिक पेंशन भी टैक्स के घेरे में आती है। इनके अलावा प्रमुख सैलरी के अलावा होने वाली छोटी-मोटी कमाई का भी जिक्र अहम होता है। भारत में रहने वाले ऐसे लोग जिनकी आमदनी विदेश से आती है या उनके ऐसेट्स वहां हैं, उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न में इस बारे में जानकारी देनी होगी।
ITR फाइल करने के लिए फॉर्म 16, फॉर्म16A/16B/16C, फॉर्म 26AS चाहिए होते हैं। इनके अलावा निवेश का प्रूफ, होम लोन स्टेटमेंट और स्टेटमेंट ऑफ गेन्स चाहिए होता है। किसी स्रोत का जिक नहीं करने पर पेनाल्टी और सजा, दोनों झेलने पड़ सकते हैं।
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