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  1. Tax Audit की डेडलाइन करीब, लेकिन प्रोफेशनल्स क्यों मांग रहे और समय?

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Tax Audit की डेडलाइन करीब, लेकिन प्रोफेशनल्स क्यों मांग रहे और समय?

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 12:53 IST

सारांश

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कारोबारियों को डेडलाइन बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। GST मिसमैच, TDS की गलतियां, लोन कन्फर्मेशन और स्टॉक रिकॉर्ड जैसी चीजों को ठीक करने में समय लग सकता है।

Tax Audit

Tax Audit: अभी तक डेडलाइन बढ़ाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

Tax Audit: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। इस बीच कई चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स प्रोफेशनल संगठन इस डेडलाइन को बढ़ाकर 31 अक्टूबर करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक डेडलाइन बढ़ाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में कारोबारियों को फिलहाल 30 सितंबर को ही अंतिम तारीख मानकर अपनी तैयारी पूरी करनी चाहिए।
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि कारोबारियों को अपने अकाउंट्स, दस्तावेज और टैक्स से जुड़ी जानकारी समय पर तैयार कर लेनी चाहिए। अलग-अलग रिकॉर्ड में अंतर होने से टैक्स ऑडिट के दौरान दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

डेडलाइन बढ़ाने की मांग क्यों?

टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना है कि इस साल अनुपालन का कैलेंडर बदलने और रिटर्न फाइलिंग यूटिलिटी देर से उपलब्ध होने के कारण काम का दबाव बढ़ा है। नॉन-ऑडिट बिजनेस और ट्रस्ट की रिटर्न की तारीख 31 अगस्त होने से प्रोफेशनल्स अगस्त के अंत तक इन कामों में व्यस्त रहे।

इसके अलावा ITR यूटिलिटी धीरे-धीरे जारी होने से टैक्स कैलकुलेशन, रिकंसिलिएशन और ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने के लिए कम समय मिला। ITR-6 जैसे ऑडिट से जुड़े फॉर्म के ऑफलाइन स्कीमा अगस्त में जारी होने को भी एक चुनौती बताया गया है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एसोसिएशन जालंधर, पंजाब अकाउंटेंट्स एसोसिएशन और राजस्थान कंसल्टेंट्स एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने 31 अक्टूबर तक समय बढ़ाने की मांग की है। पिछले साल भी CBDT ने 30 सितंबर 2025 की डेडलाइन बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2025 की थी।

GST, TDS और बैंक रिकॉर्ड की जांच जरूरी

कारोबारियों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि उनकी GST रिटर्न में बताई गई बिक्री और टैक्स की रकम अकाउंट बुक्स से मेल खाती है या नहीं। इसके अलावा TDS और TCS रिकॉर्ड को संबंधित आय-खर्च, Form 26AS और AIS से मिलाना जरूरी है।

बैंक बैलेंस, लोन, ब्याज खर्च और लेंडर कन्फर्मेशन की भी जांच करनी चाहिए। फिक्स्ड एसेट रजिस्टर में दर्ज जानकारी फाइनेंशियल स्टेटमेंट और टैक्स डेप्रिसिएशन कैलकुलेशन से मेल खानी चाहिए। लोन, एडवांस, निवेश और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन के जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखें।

इसके अलावा कारोबारियों को पहले यह कन्फर्म करना चाहिए कि उन पर कौन-सी टैक्स ऑडिट सीमा लागू होती है। ₹10 करोड़ की बढ़ी हुई टर्नओवर सीमा का लाभ लेने वाले कारोबारियों को कैश रिसीट और कैश पेमेंट से जुड़ी शर्तों की भी जांच करनी चाहिए।

ई-फाइलिंग की प्रक्रिया आखिरी दिन न छोड़ें

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर भी कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। कारोबारी को अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट को पोर्टल पर जोड़ना और संबंधित टैक्स ऑडिट फॉर्म असाइन करना होता है। ऑडिटर के रिपोर्ट अपलोड करने के बाद टैक्सपेयर को उसे स्वीकार कर वेरिफाई करना पड़ता है।

डेडलाइन नहीं बढ़ी तो क्या होगा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कारोबारियों को डेडलाइन बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। GST मिसमैच, TDS की गलतियां, लोन कन्फर्मेशन और स्टॉक रिकॉर्ड जैसी चीजों को ठीक करने में समय लग सकता है। इसके अलावा टैक्स ऑडिट की शर्त पूरी नहीं करने पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 271B के तहत जुर्माना लग सकता है। यह सामान्य तौर पर टर्नओवर या ग्रॉस रिसीट का 0.5% होता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1.5 लाख है। हालांकि, उचित कारण होने पर कुछ मामलों में राहत मिल सकती है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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