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4 min read | अपडेटेड September 21, 2026, 16:42 IST
सारांश
रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS एक लोकप्रिय विकल्प है। PFRDA द्वारा लागू किए गए नए नियमों के बाद अब यह स्कीम पहले से ज्यादा फ्लेक्सिबल और आकर्षक हो गई है। जानिए नए विड्रॉल नियमों के साथ NPS आपके फ्यूचर के लिए कितना सही है।

नेशनल पेंशन सिस्टम के नए नियमों से इन्वेस्टर्स को मिला ज्यादा कैश और बेहतर रिटर्न का मौका।
रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने के लिए सही जगह पैसा लगाना बहुत जरूरी होता है। भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS हमेशा से एक पसंदीदा जरिया रहा है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA ने हाल ही में NPS के नियमों में कई बड़े और राहत देने वाले बदलाव किए हैं। इन नए नियमों के आने के बाद अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आज के समय में रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए NPS सबसे सही ऑप्शन है। जवाब है हां, क्योंकि नए नियमों ने इसे पहले से कहीं ज्यादा फ्लेक्सिबल, फायदेमंद और इन्वेस्टर फ्रेंडली बना दिया है।
NPS का सबसे बड़ा बदलाव इसके विड्रॉल नियमों में हुआ है। पहले रिटायरमेंट यानी 60 साल की उम्र पूरी होने पर इन्वेस्टर्स को अपने कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी खरीदने के लिए रखना पड़ता था और वे सिर्फ 60% पैसा ही लंपसम निकाल सकते थे। नए नियमों के तहत अब आप अपने कुल कॉर्पस का 80% हिस्सा एक बार में लंपसम के तौर पर निकाल सकते हैं। अब केवल 20% पैसे से ही एन्युटी खरीदना अनिवार्य रह गया है। इससे रिटायरमेंट के वक्त इन्वेस्टर्स के हाथ में ज्यादा कैश आता है, जिससे वे अपनी तुरंत की जरूरतों या अन्य बड़े खर्चों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
जिन इन्वेस्टर्स का NPS में कुल कॉर्पस कम है, उनके लिए भी नियम काफी आसान कर दिए गए हैं। अगर रिटायरमेंट के समय आपका कुल कॉर्पस 8 लाख रुपये या उससे कम है, तो आपको कोई एन्युटी खरीदने की जरूरत नहीं है। आप पूरे 100% पैसे को एक बार में निकाल सकते हैं। पहले यह लिमिट केवल 2.5 लाख रुपये थी। इसके अलावा 8 लाख से 12 लाख रुपये तक के कॉर्पस पर भी 6 लाख रुपये तक लंपसम निकालने की सुविधा दी गई है। यह बदलाव उन लोगों के लिए बहुत काम का है जो देर से इन्वेस्ट करना शुरू करते हैं या जिनका फंड छोटा रहता है।
नए नियमों में NPS में बने रहने की उम्र सीमा को बढ़ा दिया गया है। अब इन्वेस्टर्स 85 साल की उम्र तक अपने NPS अकाउंट को जारी रख सकते हैं और इसमें इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। पहले यह सीमा 75 साल थी। उम्र सीमा बढ़ने से इन्वेस्टर्स को मार्केट में लंबे समय तक बने रहने का मौका मिलता है, जिससे उनका पैसा कंपाउंडिंग के जरिए और तेजी से बढ़ता है। इसके अलावा 15 साल का लॉक इन पीरियड पूरा करने के बाद 60 साल की उम्र से पहले भी प्री-मैच्योर एग्जिट की सुविधा दी गई है, जिससे लिक्विडिटी की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है।
NPS में दूसरे पारंपरिक पेंशन स्कीम्स की तुलना में ज्यादा रिटर्न मिलने की मुख्य वजह इसका इक्विटी एक्स्पोज़र है। एक्टिव चॉइस के तहत इन्वेस्टर्स अपने फंड का 75% तक हिस्सा इक्विटी में लगा सकते हैं, जो लंबे समय में महंगाई को पछाड़कर बेहतरीन रिटर्न देने में सक्षम है। साथ ही PFRDA ने A से लेकर E कैटेगरी तक पेंशन स्कीम्स की नई और पारदर्शी कैटेगरी बनाई है, जिससे सही फंड चुनना बेहद आसान हो गया है। सेक्शन 80सी के अलावा 80CCD 1B के तहत मिलने वाली 50 हजार रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट इसे टैक्स सेविंग के लिहाज से भी बेजोड़ बनाती है।
कुल मिलाकर देखें तो NPS अब सिर्फ एक पेंशन देने वाली स्कीम नहीं रह गई है, बल्कि यह एक मॉडर्न और फ्लेक्सिबल वेल्थ क्रिएशन टूल बन चुकी है। कम मैनेजमेंट कॉस्ट, जबरदस्त टैक्स बेनिफिट, इक्विटी में निवेश का मौका और अब 80% तक पैसा निकालने की आजादी इसे हर कामकाजी इंसान के रिटायरमेंट पोर्टफोलियो का सबसे अहम हिस्सा बनाती है। अगर आप अपने बुढ़ापे को सुरक्षित और फाइनेंशियली आजाद बनाना चाहते हैं, तो नए नियमों वाला NPS आपके लिए एक बेहतरीन और सही चुनाव साबित हो सकता है।
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