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  1. साधारण FD और Auto-Sweep FD में क्या है अंतर? निवेश से पहले समझिए यह कैसे करता है काम

पर्सनल फाइनेंस

साधारण FD और Auto-Sweep FD में क्या है अंतर? निवेश से पहले समझिए यह कैसे करता है काम

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड September 21, 2026, 14:49 IST

सारांश

Auto-Sweep FD की खासियत यह है कि अगर सेविंग्स अकाउंट में पैसे कम पड़ जाते हैं, तो लिंक्ड FD का जरूरी हिस्सा अपने आप तोड़ा जा सकता है। यानी EMI, कार्ड पेमेंट या किसी दूसरे खर्च के लिए आपको अलग से FD बंद कराने की जरूरत नहीं होती।

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Auto-Sweep FD में सेविंग्स अकाउंट और FD आपस में जुड़े रहते हैं।

अगर आपके सेविंग्स अकाउंट में जरूरत से ज्यादा पैसा पड़ा रहता है, तो Auto-Sweep FD आपके लिए काम का विकल्प हो सकता है। इसमें सेविंग्स अकाउंट को फिक्स्ड डिपॉजिट से जोड़ दिया जाता है। जैसे ही अकाउंट में तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा होता है, अतिरिक्त रकम अपने आप FD में चली जाती है। इससे उस रकम पर सेविंग्स अकाउंट के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिल सकता है। बता दें कि आमतौर पर सेविंग अकाउंट में 2.50 से 3 फीसदी तक का रिटर्न मिलता है। दूसरी तरफ फिक्स्ड डिपॉजिट में 7-8 फीसदी तक का रिटर्न हासिल किया जा सकता है।

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साधारण FD कैसे काम करती है?

साधारण FD में आप एक तय रकम एक निश्चित अवधि के लिए जमा करते हैं। बैंक उस समय लागू FD ब्याज दर के हिसाब से रिटर्न देता है। अगर आपको FD की अवधि पूरी होने से पहले पैसा निकालना पड़ता है, तो आमतौर पर FD तोड़नी पड़ती है और बैंक नियमों के अनुसार ब्याज में कटौती या पेनल्टी लग सकती है।

Auto-Sweep FD में भी FD का यही सिस्टम रहता है, लेकिन फर्क यह है कि FD अपने आप छोटी-छोटी रकम में बनती और जरूरत पड़ने पर टूटती रहती है। यानी आपको हर बार खुद FD बनाने या तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

Auto-Sweep FD में पैसा कैसे जाता है?

मान लीजिए आपने सेविंग्स अकाउंट में ₹50,000 की सीमा तय की है। अगर आपका बैलेंस बढ़कर ₹60,000 हो जाता है, तो बैंक नियमों के अनुसार अतिरिक्त रकम का एक हिस्सा FD में ट्रांसफर कर सकता है। इस तरह सेविंग्स अकाउंट में जरूरी रकम बनी रहती है और बाकी पैसा FD में ब्याज कमाता है। अलग-अलग बैंक इस सुविधा को अलग नाम से चलाते हैं। ऐसे में आप बैंक की वेबसाइट पर जाकर इस सुविधा की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

जरूरत पड़ने पर FD अपने आप टूटती है

Auto-Sweep FD की खासियत यह है कि अगर सेविंग्स अकाउंट में पैसे कम पड़ जाते हैं, तो लिंक्ड FD का जरूरी हिस्सा अपने आप तोड़ा जा सकता है। यानी EMI, कार्ड पेमेंट या किसी दूसरे खर्च के लिए आपको अलग से FD बंद कराने की जरूरत नहीं होती। कई बैंक FD के हिस्सों को LIFO यानी Last-In-First-Out तरीके से तोड़ते हैं। इसका मतलब है कि सबसे बाद में बनाई गई FD का हिस्सा पहले टूट सकता है।

दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

साधारण FD में रकम और अवधि पहले से तय होती है और उसे समय से पहले निकालने पर नियम लागू होते हैं। Auto-Sweep FD में सेविंग्स अकाउंट और FD आपस में जुड़े रहते हैं। जरूरत से ज्यादा पैसा अपने आप FD में जा सकता है और जरूरत पड़ने पर FD का हिस्सा वापस सेविंग्स अकाउंट में आ सकता है। इसलिए Auto-Sweep FD उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनके अकाउंट में अक्सर अतिरिक्त पैसा पड़ा रहता है। जरूरत पड़ने पर FD में निवेश इस पैसे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

Auto-Sweep FD की कुछ सीमाएं भी हैं

हर बैंक के Auto-Sweep के नियम अलग हो सकते हैं। कुछ बैंकों में सीनियर सिटीजन को sweep FD पर सामान्य FD वाला अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता। FD से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है और नियमों के अनुसार TDS भी लग सकता है। साथ ही, अगर आपकी थ्रेशोल्ड लिमिट बहुत कम है, तो छोटी-छोटी जरूरतों पर FD बार-बार टूट सकती है। इसलिए Auto-Sweep FD शुरू करने से पहले बैंक की थ्रेशोल्ड लिमिट, FD अवधि, ब्याज दर और समय से पहले FD तोड़ने के नियम जरूर समझने चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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