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3 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 09:28 IST
सारांश
पिछले कुछ महीनों में आयोग ने देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों और अन्य पक्षों के साथ बैठकें की हैं। सितंबर में पुडुचेरी में 9 सितंबर और चंडीगढ़ में 16, 17 और 18 सितंबर को बैठकें हुईं। इसके बाद अब अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है।

8th pay commission: देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें हो रही है।
8वें वेतन आयोग के गठन को 10 महीने से ज्यादा समय हो चुका है। केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस बीच देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें भी हो रही है। इस बीच एक बड़ा सवाल सामने आया है कि कर्मचारियों की रिटायरमेंट इनकम कितनी सुरक्षित होगी। कई कर्मचारी संगठनों ने NPS को लेकर अपनी चिंताएं जताई और OPS को बहाल करने की मांग की है।
पिछले कुछ महीनों में आयोग ने देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों और अन्य पक्षों के साथ बैठकें की हैं। सितंबर में पुडुचेरी में 9 सितंबर और चंडीगढ़ में 16, 17 और 18 सितंबर को बैठकें हुईं। इसके बाद अब अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है।
बता दें कि आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग का काम केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, भत्तों और दूसरी सुविधाओं में बदलाव को लेकर कर्मचारी संगठनों और अन्य पक्षों की मांगों को सुनना है।
इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन, पेंशन सुधार और भत्तों जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई है। हालांकि, 2004 के बाद नियुक्त हुए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए Old Pension Scheme (OPS) और National Pension System (NPS) की बहस अहम बनी हुई है।
कई कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को दिए अपने ज्ञापनों में कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों और उनके परिवारों को रिटायरमेंट के बाद पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा देने की उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं है।
Survey of India के Ministerial Staff Association (MSA) ने OPS बहाल करने और आखिरी वेतन के 50% के बराबर तय पेंशन देने की मांग की है। इसका मतलब है कि पेंशन कर्मचारी के आखिरी वेतन से जुड़ी हो, न कि मुख्य रूप से जमा पेंशन फंड और बाजार से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर रहे।
Federation of National Postal Organisations (FNPO) ने भी NPS और Unified Pension Scheme (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को Defined-Benefit Pension व्यवस्था में वापस लाने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि इससे रिटायरमेंट के बाद आय को लेकर ज्यादा सुरक्षा मिल सकती है।
Railway Senior Citizens Welfare Society ने गारंटीड न्यूनतम पेंशन और रिटायरमेंट के बाद बेहतर सुरक्षा की मांग उठाई है। वहीं Bharat Pensioners’ Samaj (BPS) ने न्यूनतम पेंशन ₹45,000 करने, आखिरी वेतन के 67% के बराबर पेंशन और आखिरी वेतन के 50% के बराबर फैमिली पेंशन की मांग की है।
इन सभी मांगों और सुझावों को 8वें वेतन आयोग के सामने रखा गया है। दूसरे कर्मचारी संगठन भी फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, पेंशन समानता और न्यूनतम पेंशन में सुधार की मांग कर रहे हैं। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। फिलहाल इसके मई-जून 2027 तक आने की संभावना बताई जा रही है। इसके बाद सरकार तय करेगी कि मौजूदा कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन व्यवस्था में बदलाव किया जाए, उसकी सुरक्षा बढ़ाई जाए या पेंशन के ढांचे में कोई बड़ा परिवर्तन किया जाए। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए इसी फैसले पर आगे की पेंशन व्यवस्था काफी हद तक निर्भर करेगी।
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