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4 min read | अपडेटेड October 16, 2026, 13:08 IST
सारांश
गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड्स ऐसी म्यूचुअल फंड योजनाएं हैं, जो अपना पैसा गोल्ड ETF में निवेश करती हैं। गोल्ड ETF के जरिए निवेशकों को सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर रिटर्न मिलता है। इसमें निवेश करने के लिए फिजिकल सोना खरीदने और उसे सुरक्षित रखने की जरूरत नहीं होती।

जिन निवेशकों की SIP और STP पहले से रजिस्टर्ड हैं, उनकी किस्तें पहले की तरह जारी रहेंगी।
गोल्ड में निवेश करने वाले लोगों के लिए जरूरी खबर है। कई म्यूचुअल फंड हाउस ने गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह रोक 16 अक्टूबर से लागू हो गई है। इसके तहत निवेशक इन योजनाओं में नया एकमुश्त निवेश नहीं कर सकेंगे। साथ ही, नई सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) भी शुरू नहीं कर पाएंगे। मौजूदा SIP में अतिरिक्त निवेश यानी टॉप-अप करने पर भी रोक लगाई गई है।
ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, इनवेस्को इंडिया म्यूचुअल फंड, डीएसपी म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और श्रीराम म्यूचुअल फंड समेत कई कंपनियों ने निवेशकों को इस बारे में जानकारी दी है।
गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड्स ऐसी म्यूचुअल फंड योजनाएं हैं, जो अपना पैसा गोल्ड ETF में निवेश करती हैं। गोल्ड ETF के जरिए निवेशकों को सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर रिटर्न मिलता है। इसमें निवेश करने के लिए फिजिकल सोना खरीदने और उसे सुरक्षित रखने की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल लगाई गई रोक गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड्स पर है। इसका मतलब यह नहीं है कि फिजिकल सोना खरीदने या सीधे गोल्ड ETF में निवेश करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
म्यूचुअल फंड कंपनियों की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, नए एकमुश्त निवेश, नई SIP रजिस्ट्रेशन और पहले से चल रही एसआईपी में अतिरिक्त निवेश पर रोक लगाई गई है। कुछ फंड हाउस ने स्विच-इन ट्रांजैक्शन और नई सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) रजिस्ट्रेशन पर भी प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, जिन निवेशकों की SIP और STP पहले से रजिस्टर्ड हैं, उनकी किस्तें पहले की तरह जारी रहेंगी। निवेशक अपने पैसे निकाल भी सकेंगे। यानी रिडेम्पशन और स्विच-आउट की सुविधा बंद नहीं की गई है।
श्रीराम म्यूचुअल फंड ने बताया कि यह कदम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के निर्देशों के बाद उठाया गया है। ये निर्देश म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के जरिए दिए गए थे। फिलहाल ये प्रतिबंध अस्थायी हैं और अगले आदेश तक लागू रहेंगे।
रॉयटर्स की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड समेत कई बड़ी कंपनियों ने गोल्ड ईटीएफ में बड़े पैमाने पर नए निवेश पर रोक लगाने से जुड़े नोटिस जारी किए थे।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि यह कदम सेबी के संकेत के बाद उठाया गया। हालांकि, उस समय प्रतिबंध लगाने की स्पष्ट वजह नोटिस में नहीं बताई गई थी।
यह फैसला दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों से ठीक पहले आया है। भारत में इन त्योहारों के दौरान सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। देश अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने का आयात करता है। सोने का आयात बढ़ने से व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
रॉयटर्स के मुताबिक, भारत का सोने का आयात अगस्त में 2.3 अरब डॉलर से घटकर सितंबर में 1.8 अरब डॉलर रह गया था। पिछले साल त्योहारों के दौरान गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में निवेश बढ़ा था, क्योंकि शेयर बाजार से कमजोर रिटर्न मिलने के बीच निवेशक कीमती धातुओं की ओर आकर्षित हुए थे।
अगर आप गोल्ड फंड में निवेश करना चाहते हैं, तो निवेश से पहले अपनी म्यूचुअल फंड कंपनी की आधिकारिक सूचना जरूर पढ़ें। अलग-अलग योजनाओं में प्रतिबंधों का दायरा अलग हो सकता है। फिलहाल यह रोक गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स पर है, न कि सोने में निवेश के सभी तरीकों पर।
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