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  1. पेंट, टायर और तेल कंपनियों के शेयरों में हरियाली, RIL-ONGC के शेयर लुढ़के, क्रूड ऑयल में गिरावट का असर

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पेंट, टायर और तेल कंपनियों के शेयरों में हरियाली, RIL-ONGC के शेयर लुढ़के, क्रूड ऑयल में गिरावट का असर

Shubham Singh Thakur

5 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 11:21 IST

सारांश

आज Indian Oil Corporation (IOC) के शेयरों में 2.61 फीसदी की तेजी है। Bharat Petroleum (BPCL) का शेयर भी करीब 4 फीसदी तक चढ़ गया है। वहीं Hindustan Petroleum (HPCL) में 5 फीसदी की तेजी दिख रही है।

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कच्चा तेल सस्ता होने से ATF की कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना रहती है।

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में बड़ी गिरावट आई है। आज 5 नवंबर तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क गई है। दरअसल, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशें तेज हो सकती हैं। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। इसका असर अब भारतीय शेयर बाजार में तेल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी दिख रहा है।

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IOC, BPCL और HPCL को कैसे होगा फायदा?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को मिल सकता है। आज Indian Oil Corporation (IOC) के शेयरों में 2.61 फीसदी की तेजी है। Bharat Petroleum (BPCL) का शेयर भी करीब 4 फीसदी तक चढ़ गया है। वहीं Hindustan Petroleum (HPCL) में 5 फीसदी की तेजी दिख रही है।

इन कंपनियों के लिए कच्चा तेल पेट्रोल और डीजल बनाने का प्रमुख इनपुट है। कीमतें कम होने से उनकी खरीद लागत घट सकती है। अगर कंपनियां पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत कटौती नहीं करती हैं, तो उनकी मार्केटिंग मार्जिन में सुधार हो सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमत तेजी से गिरने पर पहले खरीदे गए महंगे स्टॉक की वजह से इन्वेंट्री लॉस भी हो सकता है। इसलिए इन कंपनियों को होने वाला वास्तविक फायदा रिफाइनिंग मार्जिन और खुदरा कीमतों पर भी निर्भर करेगा।

Asian Paints और Berger Paints को राहत

पेंट कंपनियों के लिए कच्चे तेल की कीमतें काफी अहम होती हैं। Asian Paints के शेयर आज करीब 4 फीसदी चढ़ गए हैं। इसके साथ ही Berger Paints में 3.68 फीसदी और Kansai Nerolac में 4 फीसदी की तेजी है। ये कंपनियां सॉल्वेंट और दूसरे पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल करती हैं। क्रूड सस्ता होने से इन कच्चे माल की लागत कम हो सकती है। इससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को सहारा मिल सकता है, खासकर तब जब वे लागत में आई कमी का पूरा फायदा ग्राहकों को तुरंत न दें।

MRF और दूसरे टायर शेयरों पर असर

टायर बनाने वाली कंपनियों के लिए सिंथेटिक रबर और पेट्रोलियम से जुड़े दूसरे केमिकल जरूरी कच्चे माल हैं। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट से MRF, Apollo Tyres और CEAT जैसी कंपनियों की उत्पादन लागत कम हो सकती है।

आज MRF के शेयरों में 5.45 फीसदी की तेजी है। इसके साथ ही Apollo Tyres का शेयर 5 फीसदी और CEAT के शेयर 3 फीसदी तक चढ़ गए हैं। टायर कंपनियों की लागत सिर्फ क्रूड पर निर्भर नहीं करती। नेचुरल रबर की कीमतें और दूसरे कच्चे माल की लागत भी उनके मुनाफे को प्रभावित करती हैं।

IndiGo को मिल सकता है फायदा

एविएशन सेक्टर में एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन कंपनियों के सबसे बड़े खर्चों में शामिल है। कच्चा तेल सस्ता होने से ATF की कीमतों में भी राहत मिलने की संभावना रहती है।

इसका फायदा InterGlobe Aviation (IndiGo) और SpiceJet जैसी एयरलाइन कंपनियों को मिल सकता है। IndiGo में आज 5.35 फीसदी और SpiceJet में 3.80 फीसदी की तेजी है। ईंधन खर्च घटने से उनके ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर घरेलू ATF कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और ईंधन की कीमतों में बदलाव पर निर्भर करेगा।

Reliance और ONGC पर क्या होगा असर?

Reliance Industries (RIL) के शेयरों में आज 0.12 फीसदी की मामूली गिरावट है। कच्चे तेल की गिरावट का इस पर मिला-जुला असर हो सकता है। एक तरफ सस्ता क्रूड उसकी पेट्रोकेमिकल बिजनेस की इनपुट लागत और वर्किंग कैपिटल की जरूरत घटा सकता है। दूसरी तरफ उसके ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार का प्रदर्शन रिफाइनिंग मार्जिन और प्रोडक्ट की कीमतों पर निर्भर करेगा।

ONGC का शेयर भी करीब 2 फीसदी तक लुढ़क गया है। इसके लिए सस्ता क्रूड चिंता का कारण बन सकता है। ये कंपनियां कच्चे तेल का उत्पादन करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें गिरने से उन्हें तेल बेचने पर मिलने वाला भाव कम हो सकता है, जिससे उनकी कमाई और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की वजह क्या है?

कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट के पीछे अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों को अहम वजह माना जा रहा है। बाजार को उम्मीद है कि चुनाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को गति मिल सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बेहतर होने की संभावना है।

इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने भारत और चीन समेत चार देशों के कमर्शियल जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की छूट देने का ऐलान किया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की कुल ईंधन सप्लाई के करीब पांचवें हिस्से के लिए अहम है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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