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  1. NRI और OCI के लिए भारतीय बाजार में निवेश करना हुआ आसान, KYC के लिए भारत आने की जरूरत नहीं

मार्केट न्यूज़

NRI और OCI के लिए भारतीय बाजार में निवेश करना हुआ आसान, KYC के लिए भारत आने की जरूरत नहीं

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 08:53 IST

सारांश

अब तक डिजिटल तरीके से KYC प्रक्रिया पूरी करने के दौरान कुछ मामलों में ग्राहक का भारत में मौजूद होना जरूरी था। लेकिन नए नियमों के तहत FATF के नियमों का पालन करने वाले देशों में रहने वाले NRI, OCI और विदेशी नागरिकों को इस शर्त से छूट मिलेगी।

SEBI

SEBI: इस फैसले का मकसद विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत को आसान बनाना है।

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए KYC प्रक्रिया को आसान बना दिया है। इससे इन निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश आसान होने की उम्मीद है। नए नियमों के तहत अब अनिवासी भारतीय (NRI), ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) और विदेशी नागरिक भारत आए बिना भी डिजिटल माध्यम से अपना KYC पूरा कर सकेंगे। हालांकि, यह सुविधा केवल उन निवेशकों को मिलेगी जो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के नियमों का पालन करने वाले देशों में रहते हैं।

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सेबी ने बुधवार को जारी अपने सर्कुलर में इन बदलावों की जानकारी दी है। नए नियम 3 दिसंबर से लागू होंगे। इस फैसले का मकसद विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत को आसान बनाना और KYC से जुड़ी प्रक्रियाओं में लगने वाली परेशानियों को कम करना है।

विदेश से ही डिजिटल तरीके से पूरा होगा KYC

अब तक डिजिटल तरीके से KYC प्रक्रिया पूरी करने के दौरान कुछ मामलों में ग्राहक का भारत में मौजूद होना जरूरी था। लेकिन नए नियमों के तहत FATF के नियमों का पालन करने वाले देशों में रहने वाले NRI, OCI और विदेशी नागरिकों को इस शर्त से छूट मिलेगी।

इसका मतलब है कि ऐसे निवेशक विदेश में रहते हुए ही अपनी KYC से जुड़ी जानकारी और जरूरी दस्तावेज डिजिटल माध्यम से जमा कर सकेंगे। सेबी के साथ रजिस्टर्ड ब्रोकर और अन्य मध्यस्थ संस्थाएं इन दस्तावेजों को स्वीकार कर सकेंगी। इससे निवेशकों को सिर्फ KYC के लिए भारत आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

KYC के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

नए नियमों के तहत विदेश में रहने वाले व्यक्तिगत निवेशकों को अपनी पहचान और पते की पुष्टि के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज देने होंगे। इनमें पैन कार्ड, पासपोर्ट और जहां लागू हो वहां OCI कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा पहचान और पते से जुड़े दूसरे जरूरी प्रमाण भी जमा करने होंगे।

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे निवेशकों के मामले में उनका विदेशी पता ही मौजूदा पते के तौर पर माना जाएगा। इससे विदेश में रहने वाले ग्राहकों के लिए दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया आसान होगी। निवेशक केवाईसी फॉर्म और अपने हस्ताक्षर का नमूना भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होगा।

वीडियो के जरिए भी हो सकेगा वेरिफिकेशन

सेबी ने उन मामलों के लिए भी व्यवस्था की है, जहां आमने-सामने जाकर पहचान का सत्यापन (IPV) करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में ब्रोकर और अन्य मध्यस्थ संस्थाएं वीडियो इन-पर्सन वेरिफिकेशन (VIPV) के जरिए ग्राहक की पहचान की पुष्टि कर सकेंगी।

इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। इसमें लाइव जियो-टैगिंग, चेहरे की वास्तविकता जांचने के लिए फेस-लाइवनेस चेक और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इसके अलावा वीडियो वेरिफिकेशन के दौरान संबंधित मध्यस्थ संस्था का अधिकृत अधिकारी भी मौजूद रहेगा।

KYC रिकॉर्ड दूसरे संस्थानों के साथ भी होंगे साझा

सेबी ने केवाईसी रिकॉर्ड को लेकर भी नियमों में बदलाव किया है। अब केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों (KRAs) को उन जानकारियों को 'वैलिडेटेड' के रूप में दर्ज करना होगा, जिनका सत्यापन आधिकारिक या संबंधित स्रोत डेटाबेस से किया जा चुका है। हालांकि, केवाईसी रिकॉर्ड को दूसरे मध्यस्थ संस्थानों के साथ साझा करने के लिए हर जानकारी का वैलिडेटेड होना जरूरी नहीं होगा। यानी किसी एक संस्था में पूरा किया गया केवाईसी दूसरी संस्था में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इसके अलावा कोई मध्यस्थ संस्था किसी दूसरे सेबी-रजिस्टर्ड मध्यस्थ या अन्य वित्तीय नियामक के नियंत्रण वाली संस्था द्वारा किए गए केवाईसी पर भी भरोसा कर सकेगी। इसके लिए KRA या सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCRR) में उपलब्ध रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, केवाईसी की पूरी जिम्मेदारी संबंधित मध्यस्थ संस्था की ही होगी। उसे ग्राहक की जोखिम प्रोफाइल के हिसाब से अतिरिक्त जांच (Enhanced Due Diligence) भी करनी पड़ सकती है।

3 वर्किंग डे में KRA को देनी होगी जानकारी

सेबी ने केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जानकारी जमा करने की समयसीमा भी तय की है। मध्यस्थ संस्थाओं को व्यक्तिगत PROI ग्राहकों की केवाईसी जानकारी प्रक्रिया पूरी होने के तीन वर्किंग डे के भीतर KRA को देनी होगी। ये नए नियम केवल नए निवेशकों पर ही नहीं, बल्कि उन ग्राहकों की री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पर भी लागू होंगे जो FATF के नियमों का पालन करने वाले देशों में रहते हैं। इससे विदेश में रहने वाले मौजूदा निवेशकों को भी राहत मिलेगी।

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