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4 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 10:08 IST
सारांश
अमेरिका में चुनावी हार के बाद ट्रंप की शक्तियां कम हो गई है। माना जा रहा है कि डेमोक्रेट्स अब राष्ट्रपति ट्रंप पर ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से पीछे हटने का दबाव बना सकते हैं। हालांकि ध्यान रहे कि ट्रंप अपनी नीतियों को लागू करने के लिए कई बार कार्यकारी आदेशों और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है।

हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार पर भरोसा बढ़ा है।
अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस खबर के बाद आज 05 सितंबर को दुनियाभर के शेयर बाजारों में शानदार रैली नजर आ रही है। भारतीय बाजार की बात करें तो आज BSE Sensex में 1621 अंकों की जबरदस्त तेजी देखी गई और यह 78,922.44 के स्तर पर पहुंच गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 431 अंक बढ़कर 24,391.95 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद क्रूड ऑयल के भाव में भी बड़ी गिरावट आई है। यहां हम जानेंगे कि बाजार में आज की तेजी के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में 54 सीटें और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 225 सीटें हासिल की हैं। इसका मतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के दोनों सदनों पर अपना कब्जा कर लिया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की मिडटर्म चुनावों में हार के लिए ईरान के साथ चल रही जंग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पार्टी की हार का मुख्य कारण युद्ध है।
वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह देश के हित में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वह अगले दो साल केवल डेमोक्रेट्स के फैसलों पर रोक लगाकर नहीं बिताना चाहते, बल्कि देश के लिए कुछ अच्छे काम भी करना चाहते हैं। दुनिया को उम्मीद है कि अब अमेरिका-ईरान युद्ध और टैरिफ पॉलिसी जैसे मुद्दों पर राहत मिलेगी।
अमेरिका में चुनावी हार के बाद ट्रंप की शक्तियां कम हो गई है। माना जा रहा है कि डेमोक्रेट्स अब राष्ट्रपति ट्रंप पर ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से पीछे हटने का दबाव बना सकते हैं। हालांकि ध्यान रहे कि ट्रंप अपनी नीतियों को लागू करने के लिए कई बार कार्यकारी आदेशों और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। इसलिए डेमोक्रेट्स की जीत के बावजूद ईरान को लेकर अमेरिकी नीति में तत्काल बदलाव की गारंटी नहीं है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी की उम्मीद की जा रही है, जिसके चलते पिछले कुछ दिनों में क्रूड ऑयल के भाव में बड़ी गिरावट आई है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत घटकर 93.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जबकि कुछ दिनों पहले ही यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब थी। बता दें कि भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमत कम होना भारत के लिए अच्छी खबर है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अन्य जहाजों पर लगी पाबंदियों के बावजूद भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इस खबर का असर भी क्रूड ऑयल पर दिख रहा है।
हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार पर भरोसा बढ़ा है। 4 नवंबर को FIIs ने भारतीय बाजार में 7,284.03 करोड़ रुपये की जोरदार खरीदारी की। इसके पहले 3 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने 6,836.81 करोड़ रुपये और 2 नवंबर को 3,114.68 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। 30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच चार कारोबारी सत्रों में FIIs ने कैश मार्केट में 20,834.04 करोड़ रुपये का निवेश किया है। विदेशी निवेशकों की इस खरीदारी से बाजार को बड़ा सपोर्ट मिला है।
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