return to news
  1. बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के शेयरों की लिस्टिंग से मिला निवेशकों को कितना प्रॉफिट, क्या है कंपनी का फ्यूचर प्लान?

मार्केट न्यूज़

बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के शेयरों की लिस्टिंग से मिला निवेशकों को कितना प्रॉफिट, क्या है कंपनी का फ्यूचर प्लान?

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड November 05, 2026, 09:48 IST

सारांश

Bombay Coated & Special Steels एक स्टील प्रोसेसिंग सेंटर है। कंपनी बड़े स्टील कॉइल्स को ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक प्रोसेस करके स्लिट कॉइल्स, कट-टू-साइज शीट और अन्य वैल्यू-एडेड स्टील उत्पाद तैयार करती है। इसके ग्राहक होम और कमर्शियल अप्लायंस, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेशन और जनरल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।

बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स आईपीओ

बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स आईपीओ की लिस्टिंग (Photo: Shutterstock)

आज बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के शेयरों का मार्केट डेब्यू हो गया है। बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के शेयर एनएसई और बीएसई पर लिस्ट हो गए हैं। बीएसई पर इसके शेयर 12.22% प्रीमियम यानी कि 10.02 रुपये के प्रॉफिट के साथ 92.02 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हुए, वहीं एनएसई पर इसके शेयर 10.98% यानी कि 9 रुपये के प्रॉफिट के साथ 91 रुपये पर लिस्ट हुए हैं। स्टील प्रोसेसिंग कारोबार से जुड़ी कंपनी बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड के आईपीओ को लेकर इन्वेस्टरों का रिऐक्शन कैसा था, कंपनी का बिजनेस कैसा है और फ्यूचर को लेकर कंपनी के क्या प्लान्स हैं, चलिए एक नजर डालते हैं? कंपनी का 183.06 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इसे कुल 60.77 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। अब आज कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग होनी है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

IPO की पूरी डिटेल्स

बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू था। इसका प्राइस बैंड 78 से 82 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। एक लॉट में 182 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल इन्वेस्टरों को कम से कम 14,924 रुपये लगाने थे।

कैसा रहा था सब्सक्रिप्शन स्टेटस?

आईपीओ को कुल 60.77 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। कैटेगरी के हिसाब से QIB हिस्सा 35.50 गुना, NII हिस्सा 158.32 गुना और रिटेल इन्वेस्टरों का हिस्सा 33.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इससे साफ है कि बड़े नॉन-इंस्टीट्यूशनस इन्वेस्टरों की ओर से इस इश्यू में काफी दिलचस्पी दिखाई गई। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि लिस्टिंग पर प्रॉफिट निश्चित है।

क्या है कंपनी का बिजनेस?

बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स लिमिटेड एक स्टील प्रोसेसिंग सेंटर है। कंपनी बड़े स्टील कॉइल्स को क्लाइंट्स की जरूरत के मुताबिक प्रोसेस करके स्लिट कॉइल्स, कट-टू-साइज शीट और अन्य वैल्यू-एडेड स्टील प्रोडक्ट्स तैयार करती है। इसके ग्राहक होम और कमर्शियल अप्लायंस, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेशन और जनरल इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों से जुड़े हैं।

कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से OEM और ODM ग्राहकों को स्टील प्रोसेसिंग सर्विसेज देने पर आधारित है। इसके मैनुफैक्चरिंग ऑपरेशन महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में फैले हैं। कंपनी के कारोबार का बड़ा हिस्सा होम और कमर्शियल अप्लायंस सेक्टर से आता है। यही वजह है कि इस सेक्टर में मांग की कमजोरी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

बिजनेस अपडेट और फाइनेंशियल प्रदर्शन

उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 1,269.83 करोड़ रुपये और प्रॉफिट 30.54 करोड़ रुपये रहा। इससे पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने 1,058.65 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 28.67 करोड़ रुपये का प्रॉफिट दर्ज किया था। यानी कंपनी की इनकम और प्रॉफिट, दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि, कंपनी का मुनाफा बढ़ने के बावजूद इन्वेस्टरों को इसके मार्जिन और कर्ज पर भी ध्यान देना चाहिए।

IPO से जुटाए फंड का क्या करेगी कंपनी?

कंपनी ने आईपीओ से मिलने वाले फंड का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने और मशीनरी से जुड़े खर्चों के लिए इस्तेमाल करने का प्लान बनाया है। प्रस्तावित प्लान के मुताबिक, करीब 125 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान या प्री-पेमेंट में और 18 करोड़ रुपये सीमेंस फाइनेंशियल सर्विसेज के मौजूदा लीज अरेंजमेंट के तहत कैपिटल इक्विपमेंट हासिल करने में खर्च किए जाने हैं। बाकी फंड सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए रखा गया है।

फ्यूचर प्लान और क्या हैं रिस्क फैक्टर्स

कंपनी के फ्यूचर प्लान्स में कस्टमर बेस बढ़ाना, स्टील प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार करना, राजस्थान के गिलोथ प्लांट का विस्तार और ऑपरेशनल लागत घटाना शामिल है। कर्ज कम होने से ब्याज खर्च पर दबाव घट सकता है और कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

दूसरी ओर, कंपनी के सामने कुछ रिस्क भी हैं। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सीमित सप्लायर पर निर्भरता, बड़े ग्राहकों से मिलने वाले कारोबार का ज्यादा हिस्सा और अप्लायंस सेक्टर पर निर्भरता इसके प्रमुख जोखिम हैं। (डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

अगला लेख

End of additional stories