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NRE vs NRO Account: NRI के लिए दोनों में क्या अंतर? समझें पैसे ट्रांसफर और टैक्स से जुड़े नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 22, 2026, 15:21 IST

सारांश

NRO अकाउंट का इस्तेमाल भारत में होने वाली आय जैसे किराया, पेंशन या डिविडेंड को मैनेज करने के लिए किया जाता है। इस अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज भारत में टैक्सेबल होता है और उस पर लागू नियमों के अनुसार TDS भी लग सकता है।

NRE vs NRO Account

NRE vs NRO Account: विदेश से कमाई गई रकम को भारत में रखने के लिए NRE अकाउंट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

विदेश में रहने वाले भारतीय यानी NRIs के लिए NRO और NRE अकाउंट का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जाता है। भारत में किराया, पेंशन, डिविडेंड या ब्याज से होने वाली कमाई को आमतौर पर NRO अकाउंट में रखा जाता है। वहीं, विदेश से कमाई गई रकम को भारत में रखने के लिए NRE अकाउंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में अगर कोई NRI NRO अकाउंट में जमा पात्र रकम को NRE अकाउंट में ट्रांसफर करना चाहता है, तो RBI के नियमों के तहत इसकी अनुमति है, लेकिन इसके लिए सालाना लिमिट, टैक्स और कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट से जुड़े नियमों का पालन करना होता है।

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NRO और NRE अकाउंट में क्या अंतर है?

NRO अकाउंट का इस्तेमाल भारत में होने वाली आय जैसे किराया, पेंशन या डिविडेंड को मैनेज करने के लिए किया जाता है। इस अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज भारत में टैक्सेबल होता है और उस पर लागू नियमों के अनुसार TDS भी लग सकता है।

वहीं, NRE अकाउंट में जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज भारत में इनकम टैक्स से छूट होता है, बशर्ते अकाउंट होल्डर FEMA के तहत NRI की पात्रता पूरी करता हो। हालांकि, NRI जिस देश में रहता है, वहां के टैक्स नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए NRE में ट्रांसफर करने का मतलब यह नहीं है कि ब्याज हर देश में टैक्स-फ्री होगा।

NRO से NRE में कितने पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं?

RBI के नियमों के मुताबिक NRI अपने NRO अकाउंट से NRE अकाउंट में पात्र रकम ट्रांसफर कर सकते हैं। इसकी कुल सीमा 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 10 लाख डॉलर प्रति वित्त वर्ष है। वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक माना जाता है। यह लिमिट सिर्फ NRO से NRE ट्रांसफर पर अलग से लागू नहीं होती, बल्कि NRO बैलेंस से विदेश भेजी जाने वाली पात्र रकम की कुल सीमा में इसे गिना जाता है।

NRO अकाउंट में भारत से होने वाली आय जमा की जाती है, जबकि NRE अकाउंट का इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेश से कमाई गई रकम को भारत में रुपये में रखने के लिए किया जाता है। NRE अकाउंट में जमा रकम आमतौर पर पूरी तरह रिपैट्रिएबल यानी विदेश वापस भेजी जा सकती है।

NRO से NRE ट्रांसफर के लिए कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?

बैंक ट्रांसफर से पहले पैसे के स्रोत और टैक्स भुगतान से जुड़े दस्तावेज मांग सकता है। इसमें यह साबित करना जरूरी हो सकता है कि रकम कहां से आई है और उस पर लागू टैक्स का भुगतान किया गया है।

इन दस्तावेजों में Form 145 शामिल हो सकता है। यह Income Tax Department में दाखिल की जाने वाली ऑनलाइन घोषणा है, जिसमें जरूरी टैक्स के कटने या भुगतान की पुष्टि की जाती है। नए फ्रेमवर्क में Form 145 में रेमिटेंस की प्रकृति और लागू सीमा के आधार पर अलग-अलग सेक्शन हैं। अगर टैक्सेबल रेमिटेंस 5 लाख रुपये से ज्यादा है और संबंधित शर्तें लागू होती हैं, तो Chartered Accountant का Form 146 सर्टिफिकेट भी जरूरी हो सकता है। बैंक पैसे के स्रोत का प्रमाण और FEMA नियमों के पालन की घोषणा भी मांग सकता है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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