return to news
  1. 31 अगस्त की ITR डेडलाइन मिस? जानें बिलेटेड ITR, लेट फीस और लॉस कैरी फॉरवर्ड का नियम

पर्सनल फाइनेंस

31 अगस्त की ITR डेडलाइन मिस? जानें बिलेटेड ITR, लेट फीस और लॉस कैरी फॉरवर्ड का नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 04, 2026, 17:18 IST

सारांश

Income Tax: अगर कोई व्यक्ति तय समय में ITR दाखिल नहीं कर पाया या अपनी छूटी हुई आय को बाद में घोषित करना चाहता है, तो कुछ शर्तों के तहत अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U का विकल्प भी मौजूद है।

ITR

जिन लोगों की सामान्य डेडलाइन निकल गई है, वे बिलेटेड ITR भी दाखिल कर सकते हैं।

31 अगस्त 2026 की ITR फाइलिंग डेडलाइन निकल चुकी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया जा सकता। अलग-अलग टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग डेडलाइन तय होती हैं। वहीं, जिन लोगों की सामान्य डेडलाइन निकल गई है, वे बिलेटेड ITR भी दाखिल कर सकते हैं।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स के लिए ये हैं डेडलाइन

जिन टैक्सपेयर्स के खातों का Tax Audit जरूरी है, उनके लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2026 है। इसके बाद इन टैक्सपेयर्स को अपनी ITR 31 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करनी होगी। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक 31 अगस्त के बाद भी ITR फाइलिंग से जुड़ी कई अहम तारीखें बाकी हैं। इसलिए टैक्सपेयर्स को अपनी कैटेगरी के हिसाब से डेडलाइन देखनी चाहिए।

ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में नवंबर तक मौका

अगर किसी टैक्सपेयर ने ऐसे इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन या स्पेसिफाइड डोमेस्टिक ट्रांजेक्शन किए हैं, जिनके लिए ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट जरूरी है, तो उनके लिए अलग समयसीमा है। ऐसे मामलों में Form 3CEB की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 है, जबकि ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 नवंबर 2026 होगी।

इस तरह 31 अगस्त के बाद प्रमुख तारीखें हैं- 30 सितंबर को Tax Audit Report, 31 अक्टूबर को Audit Cases की ITR और Form 3CEB, जबकि 30 नवंबर 2026 को Transfer Pricing Cases की ITR फाइल करनी होगी।

डेडलाइन निकल गई तो Belated ITR का विकल्प

अगर किसी टैक्सपेयर की लागू ITR फाइलिंग डेडलाइन निकल चुकी है, तो वह बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है। मौजूदा असेसमेंट ईयर के लिए Belated ITR 31 दिसंबर 2026 तक फाइल की जा सकती है। हालांकि, देर से ITR दाखिल करने पर कुछ अतिरिक्त लागत और नुकसान हो सकते हैं।

Section 234F के तहत अधिकतम ₹5,000 की लेट फीस लग सकती है। अगर कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा नहीं है तो यह फीस ₹1,000 तक हो सकती है। इसके अलावा, अगर टैक्स बकाया है तो Section 234A के तहत हर महीने 1% की दर से ब्याज भी लग सकता है। देर से ITR फाइल करने पर रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है।

कुछ नुकसान भी हो सकते हैं

Belated ITR फाइल करने का सबसे बड़ा असर कुछ बिजनेस और कैपिटल लॉस को आगे Carry Forward करने के अधिकार पर पड़ सकता है। समय पर रिटर्न नहीं भरने पर कुछ नुकसान को भविष्य के वर्षों में एडजस्ट करने का फायदा नहीं मिल पाता।

अपडेटेड रिटर्न भी है एक विकल्प

अगर कोई व्यक्ति तय समय में ITR दाखिल नहीं कर पाया या अपनी छूटी हुई आय को बाद में घोषित करना चाहता है, तो कुछ शर्तों के तहत अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U का विकल्प भी मौजूद है। ITR-U दाखिल करने पर अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। यह अतिरिक्त टैक्स समय के साथ बढ़ता है। इसलिए टैक्सपेयर को अपनी स्थिति और बकाया टैक्स की गणना करने के बाद ही यह विकल्प चुनना चाहिए। इसलिए 31 अगस्त की डेडलाइन निकलने के बाद घबराने की जरूरत नहीं है। पहले यह पता करें कि आप किस कैटेगरी में आते हैं और उसी के अनुसार अगली डेडलाइन या Belated/Updated Return का विकल्प चुनें।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख