पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड September 04, 2026, 13:01 IST
सारांश
पेंशन फंड नियामक PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और NPS लाइट के लिए पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (पीओपी) चार्ज में बड़ा संशोधन किया है। यह नया चार्ज स्ट्रक्चर 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

पीएफआरडीए ने NPS सब्सक्राइबर्स के लिए पीओपी चार्जेस का नया ढांचा जारी किया है।
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और NPS लाइट के तहत पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (POP) की तरफ से लिए जाने वाले शुल्कों में बड़ा संशोधन किया है। यह नया चार्ज स्ट्रक्चर 1 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा। सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां (CRA) वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (Q3) से यूनिट्स कैंसिलेशन के जरिए इन शुल्कों की कटौती शुरू करने जा रही हैं। PFRDA द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार सामान्य स्कीम्स और मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के बीच के अंतर को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। यह बदलाव सीधे तौर पर देश के लाखों NPS सब्सक्राइबर्स के रिटायरमेंट निवेश पर असर डालने वाला है।
नए नियमों के अनुसार अगर कोई नया सब्सक्राइबर किसी POP जैसे बैंक शाखा या वित्तीय संस्था के जरिए NPS में अपना परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (प्रान) रजिस्टर कराता है, तो उसे 200 रुपये का वन-टाइम ऑनबोर्डिंग चार्ज देना होगा। इस शुल्क की वसूली के तरीके में सब्सक्राइबर्स को बड़ी राहत दी गई है। यह 200 रुपये का चार्ज एक बार में खाते से नहीं काटा जाएगा। इसके बजाय सीआरए 50 रुपये प्रति तिमाही के हिसाब से यूनिट्स कैंसिल करके यह रकम वसूलेंगी।
अगर कोई सब्सक्राइबर पीओपी के जरिए पूरी तरह से डिजिटल और नॉन-फेस-टू-फेस तरीके से रजिस्ट्रेशन पूरा करता है, तो उसके लिए वन-टाइम चार्ज 100 रुपये हो सकता है। इसके अलावा एक्टिव NPS और NPS लाइट खातों के लिए कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) पर सालाना 0.20% का चार्ज तय किया गया है। यह चार्ज नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) से एडजस्ट किया जाएगा और तिमाही आधार पर पीओपी को दिया जाएगा। इन सभी शुल्कों पर जीएसटी और बाकी लागू टैक्स अलग से जोड़े जाएंगे।
पीएफआरडीए ने यह भी साफ किया है कि किन सब्सक्राइबर्स को पीओपी चार्ज नहीं देना होगा और किन पर यह अनिवार्य रूप से लागू रहेगा। जिन लोगों ने सीधे ई-NPS पोर्टल के जरिए अपना खाता खोला है और वे अपना योगदान भी ई-NPS या डी-रेमिट के जरिए कर रहे हैं, उनसे कोई पीओपी चार्ज नहीं लिया जाएगा। हालांकि अगर किसी का खाता मूल रूप से किसी बैंक या पीओपी के जरिए खुला था, तो बाद में ई-NPS या डी-रेमिट से पैसा जमा करने पर भी पीओपी चार्ज लागू रहेगा। इसके अलावा अगर किसी खाते में योगदान के बाद लगातार 4 तिमाहियों तक कोई नया निवेश नहीं आता है, तो उसे डोरमेंट माना जाएगा। ऐसे खातों पर 0.20% का सालाना पीओपी चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
नए सर्कुलर के मुताबिक NPS में ऑनबोर्डिंग के समय न्यूनतम योगदान 250 रुपये तय किया गया है, जबकि इसके बाद के सभी निवेश के लिए न्यूनतम सीमा केवल 10 रुपये रखी गई है। इससे छोटे निवेशकों के लिए NPS में पैसा लगाना काफी आसान हो जाएगा। पीएफआरडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि NPS वात्सल्य, NPS स्वास्थ्य और NPS एमएसएमई जैसी रेगुलेशन 4ए योजनाओं पर यह सर्कुलर लागू नहीं होगा। उनके चार्ज अलग गाइडलाइंस से तय किए जाएंगे। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला यह नया पीओपी चार्ज ढांचा NPS और NPS लाइट को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाएगा। सब्सक्राइबर्स को सलाह दी जाती है कि वे 1 अक्टूबर 2026 से पहले अपने प्रान अकाउंट का स्टेटस, ऑनबोर्डिंग सोर्स और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री आधिकारिक सीआरए पोर्टल पर जरूर चेक कर लें।
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