return to news
  1. NRI से Property खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव, 1 अक्टूबर से देनी होगी ज्यादा जानकारी

पर्सनल फाइनेंस

NRI से Property खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव, 1 अक्टूबर से देनी होगी ज्यादा जानकारी

Upstox

4 min read | अपडेटेड September 25, 2026, 10:09 IST

सारांश

नए नियमों के तहत NRI से जमीन, मकान या दूसरी अचल संपत्ति खरीदने पर TDS की जानकारी एक तय चालान-कम-स्टेटमेंट फॉर्म के जरिए देनी होगी। इसके लिए सीबीडीटी ने फॉर्म 141 में बदलाव किया है और इसमें नया शेड्यूल E जोड़ा गया है।

TDS

अगर NRI विक्रेता के पास पैन नहीं है, तो खरीदार को उसके देश या क्षेत्र में जारी टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर देना होगा।

अगर आप किसी NRI यानी गैर-निवासी भारतीय से प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 से TDS से जुड़े कुछ नियम बदलने वाले हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने निवासी व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार यानी HUF के लिए नई TDS रिपोर्टिंग की जरूरत तय की है। ये बदलाव इनकम-टैक्स रूल्स 2026 के जरिए किए गए हैं। यहां इसकी पूरी जानकारी दी जा रही है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?

नए नियमों के तहत NRI से जमीन, मकान या दूसरी अचल संपत्ति खरीदने पर TDS की जानकारी एक तय चालान-कम-स्टेटमेंट फॉर्म के जरिए देनी होगी। इसके लिए सीबीडीटी ने फॉर्म 141 में बदलाव किया है और इसमें नया शेड्यूल E जोड़ा गया है। इस शेड्यूल E में NRI विक्रेता से जुड़ी प्रॉपर्टी डील की विस्तृत जानकारी देनी होगी।

खरीदार को कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

नए फॉर्म में खरीदार को प्रॉपर्टी का पता, प्रॉपर्टी का प्रकार और सभी खरीदारों की जानकारी देनी होगी। हर खरीदार का पैन और नाम बताना होगा। साथ ही, कुल बिक्री राशि में हर खरीदार का कितना हिस्सा है, यह भी बताना होगा।

NRI विक्रेता के मामले में पैन उपलब्ध होने पर पैन और नाम के साथ उनका दर्जा, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और विदेश में रहने का पता देना होगा। इसके अलावा टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट यानी TRC नंबर और टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी TIN भी, जहां लागू हो, देना होगा।

NRI के पास पैन नहीं है तो क्या होगा?

अगर NRI विक्रेता के पास पैन नहीं है, तो खरीदार को उसके देश या क्षेत्र में जारी टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर देना होगा। अगर वहां ऐसा कोई नंबर उपलब्ध नहीं है, तो उस विदेशी सरकार की ओर से विक्रेता की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कोई यूनिक नंबर देना होगा। सीबीडीटी के मुताबिक, इन जानकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टीडीएस सही दर पर काटा जाए और सिर्फ पैन उपलब्ध न होने की वजह से ज्यादा दर से टैक्स न कटे।

प्रॉपर्टी और भुगतान की जानकारी भी देनी होगी

शेड्यूल E में समझौते की तारीख, रजिस्ट्रेशन की तारीख, अगर उपलब्ध हो, प्रॉपर्टी की कुल स्टांप ड्यूटी वैल्यू और कुल बिक्री राशि की जानकारी भी देनी होगी। खरीदार को यह भी बताना होगा कि भुगतान एकमुश्त किया जा रहा है या किस्तों में। अगर भुगतान किस्तों में है, तो यह बताना होगा कि रकम पहली, बाद की या आखिरी किस्त है। बाद की या आखिरी किस्त में पिछली एक्नॉलेजमेंट नंबर की जानकारी भी देनी होगी।

टीडीएस और कैपिटल गेन्स की जानकारी

फॉर्म में भुगतान या क्रेडिट की गई रकम, भुगतान की तारीख, जिस रकम पर टीडीएस काटना है, टीडीएस दर, काटी गई टैक्स राशि और कटौती की तारीख जैसी जानकारी भी देनी होगी। इसके अलावा एनआरआई विक्रेता को होने वाले कैपिटल गेन्स की प्रकृति यानी लॉन्ग-टर्म या शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।

जॉइंट खरीदारों के लिए भी अलग रिपोर्टिंग

अगर प्रॉपर्टी के एक से ज्यादा खरीदार हैं, तो नियमों के मुताबिक हर डिडक्टर को अलग फॉर्म 141 दाखिल करना होगा। यानी जॉइंट खरीदारों को मिलकर एक ही फॉर्म दाखिल करने के बजाय अपनी-अपनी रिपोर्टिंग करनी होगी।

प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के नियमों में बदलाव नहीं

ध्यान देने वाली बात यह है कि 1 अक्टूबर से होने वाले ये बदलाव मुख्य रूप से टीडीएस रिपोर्टिंग और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े हैं। सीबीडीटी ने कोई नया प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन नियम लागू नहीं किया है। फॉर्म में कुछ जानकारी संभव होने पर पहले से भरी हुई भी मिल सकती है। रकम सामान्य तौर पर रुपये में रिपोर्ट करनी होगी।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख