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मार्केट न्यूज़

आने वाली है IPO की बाढ़, लेकिन आंख मूंदकर न करें निवेश, इन बातों का रखें ध्यान

Shubham Singh Thakur

5 min read | अपडेटेड September 04, 2026, 14:34 IST

सारांश

जब कम समय में कई IPO खुलते हैं तो निवेशकों को लगता है कि हर इश्यू में आवेदन कर देना चाहिए, ताकि कम से कम किसी एक में शेयर मिल जाएं। लेकिन यह रणनीति नुकसानदायक भी हो सकती है। खासकर लंबे समय के निवेशकों को केवल ज्यादा IPO आने की वजह से जल्दबाजी में पैसा नहीं लगाना चाहिए।

IPO

किसी IPO में निवेश से पहले कंपनी का Red Herring Prospectus (RHP) जरूर पढ़ना चाहिए।

IPO निवेशकों के लिए अगला हफ्ता शानदार होने वाला है। 7 सितंबर से शुरू हो रहे नए सप्ताह में कुल 11 आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाले हैं। इनमें Rentomojo, Pranav Constructions और Veegaland Developers जैसी बड़ी कंपनियां शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सितंबर में अनुमानित ₹20000 करोड़ से ₹25000 करोड़ के पब्लिक इश्यू आ सकते हैं। हालांकि, इतने ज्यादा IPO आने का मतलब यह नहीं है कि रिटेल निवेशकों को हर IPO में आवेदन करना चाहिए। यहां हम समझेंगे कि किसी भी IPO में निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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हर IPO में निवेश करना जरूरी नहीं

जब कम समय में कई IPO खुलते हैं तो निवेशकों को लगता है कि हर इश्यू में आवेदन कर देना चाहिए, ताकि कम से कम किसी एक में शेयर मिल जाएं। लेकिन यह रणनीति नुकसानदायक भी हो सकती है। खासकर लंबे समय के निवेशकों को केवल ज्यादा IPO आने की वजह से जल्दबाजी में पैसा नहीं लगाना चाहिए।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि IPO को सिर्फ लिस्टिंग के दिन मुनाफा कमाने का जरिया नहीं समझना चाहिए। IPO में पैसा लगाना किसी भी दूसरी इक्विटी में निवेश करने जैसा है। इसलिए कंपनी के कारोबार, कमाई और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है।

RHP और कंपनी की वित्तीय स्थिति देखें

किसी IPO में निवेश से पहले कंपनी का Red Herring Prospectus (RHP) जरूर पढ़ना चाहिए। यह कंपनी की ओर से दाखिल किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसमें कंपनी के कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन, जोखिम, प्रमोटर्स और IPO से जुटाए जाने वाले पैसे के इस्तेमाल जैसी अहम जानकारी होती है। कंपनी का मुनाफा, बिक्री, कर्ज और कैश फ्लो भी देखना चाहिए।

IPO लाने की वजह समझें

कंपनी IPO के जरिए पैसा क्यों जुटा रही है, यह जानना बेहद जरूरी है। कुछ कंपनियां कारोबार बढ़ाने और नए प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा जुटाती हैं, जबकि कुछ कंपनियां अपना कर्ज चुकाने के लिए IPO लाती हैं। कई बार मौजूदा शेयरधारक या प्रमोटर्स अपने शेयर बेचकर बाहर निकलने के लिए भी IPO का इस्तेमाल करते हैं।

अगर IPO से मिलने वाले पैसे का बड़ा हिस्सा बिजनेस के विस्तार और ग्रोथ में इस्तेमाल होना है, तो यह सकारात्मक संकेत हो सकता है। वहीं, अगर कंपनी मुख्य रूप से कर्ज चुकाने के लिए पैसा जुटा रही है, तो निवेशकों को इस बात को सावधानी से देखना चाहिए।

वैल्यूएशन पर भी ध्यान दें

अच्छी कंपनी का IPO होने के बावजूद अगर उसकी वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है, तो निवेश में जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए IPO की कीमत की तुलना कंपनी के मुनाफे, कारोबार और इसी सेक्टर की दूसरी कंपनियों से करनी चाहिए। सिर्फ कंपनी का नाम या बाजार में चल रही चर्चा देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।

प्रमोटर और IPO का पैसा कहां जाएगा?

निवेशकों को कंपनी के प्रमोटर्स का पिछला रिकॉर्ड भी देखना चाहिए। साथ ही यह समझना जरूरी है कि IPO से मिलने वाला पैसा कंपनी के कारोबार को बढ़ाने में जाएगा या मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचकर बाहर निकल रहे हैं। अगर इश्यू में ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा ज्यादा है, तो इस पहलू को भी ध्यान से समझना चाहिए।

ग्रे मार्केट प्रीमियम से सावधान

IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) या शुरुआती सब्सक्रिप्शन आंकड़े निवेश का सबसे मजबूत आधार नहीं होने चाहिए। GMP तेजी से बदल सकता है और यह कंपनी के लंबे समय के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देता। इसी तरह ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि कंपनी का शेयर लंबी अवधि में भी अच्छा रिटर्न देगा।

कंपनी की ताकत और कमजोरी जांचें

हर कंपनी की कुछ खूबियां और कुछ कमजोरियां होती हैं। IPO में निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि कंपनी की ताकत, कमजोरी, अवसर और जोखिम क्या हैं। इसके लिए SWOT Analysis किया जा सकता है।

कंपनी के RHP के अलावा उसकी इंडस्ट्री, खबरों और एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट को भी देखा जा सकता है। साथ ही यह समझना चाहिए कि आने वाले वर्षों में कंपनी के कारोबार के बढ़ने की कितनी संभावना है। इससे लंबे समय के निवेश की क्षमता का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।

दूसरी कंपनियों से तुलना करें

कंपनी का प्रदर्शन उसके प्रतिद्वंद्वी यानी Peers के मुकाबले कैसा है, यह भी देखना चाहिए। अगर कंपनी की बिक्री, मुनाफा और अन्य वित्तीय आंकड़े इंडस्ट्री की दूसरी कंपनियों से बेहतर हैं, तो यह सकारात्मक संकेत हो सकता है।

इसके लिए P/E Ratio, Debt-to-Equity Ratio, Profit Margin, Earnings Per Share (EPS) और Return on Equity (ROE) जैसे आंकड़ों की तुलना की जा सकती है। इससे पता चलता है कि IPO की कीमत और कंपनी का प्रदर्शन उसके सेक्टर की दूसरी कंपनियों के मुकाबले कितना मजबूत है।

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