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  1. 31 जुलाई की ITR डेडलाइन छूट गई? अब भी इस तरह भर सकते हैं रिटर्न, लेकिन देना होगा जुर्माना

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31 जुलाई की ITR डेडलाइन छूट गई? अब भी इस तरह भर सकते हैं रिटर्न, लेकिन देना होगा जुर्माना

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 03, 2026, 18:56 IST

सारांश

ITR: अगर आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक है, तो बिलेटेड ITR दाखिल करने पर सेक्शन 234F के तहत अधिकतम 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, उनके लिए यह जुर्माना अधिकतम 1000 रुपये है।

ITR Filing 2026

ITR Filing 2026: 31 जुलाई की डेडलाइन सभी करदाताओं पर लागू नहीं होती।

अगर आप 31 जुलाई 2026 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इस तारीख के बाद डेडलाइन बढ़ाने का ऐलान नहीं किया है, लेकिन ऐसे करदाताओं के लिए अब भी एक मौका बचा हुआ है। वे 31 दिसंबर 2026 तक Belated ITR दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ अतिरिक्त शुल्क और ब्याज देना होगा।

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लेट ITR भरने पर कितना जुर्माना लगेगा?

अगर आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से अधिक है, तो Belated ITR दाखिल करने पर सेक्शन 234F के तहत अधिकतम 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, उनके लिए यह जुर्माना अधिकतम 1000 रुपये है। इसके अलावा, अगर आपके ऊपर कोई टैक्स बकाया है तो सिर्फ लेट फीस ही नहीं, बल्कि उस पर ब्याज भी देना होगा।

बकाया टैक्स पर कितना ब्याज देना होगा?

अगर टैक्स का भुगतान बाकी है, तो सेक्शन 234A के तहत 1% प्रति माह या महीने के हिस्से के हिसाब से ब्याज लगाया जाएगा। यह ब्याज ITR की मूल अंतिम तारीख से लेकर रिटर्न दाखिल करने की तारीख तक के लिए देना होगा। इसलिए जितनी ज्यादा देरी होगी, ब्याज का बोझ भी उतना ही बढ़ सकता है।

31 दिसंबर के बाद भी है एक विकल्प

अगर किसी कारण से आप 31 दिसंबर 2026 तक भी Belated ITR दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो कुछ शर्तों के तहत अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प भी मौजूद है। इसे संबंधित असेसमेंट ईयर समाप्त होने के 48 महीने के भीतर दाखिल किया जा सकता है। कई मामलों में यह सुविधा उन लोगों को भी मिलती है, जिन्होंने पहले ओरिजनल, बिलेटेड या रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल नहीं किया हो।

बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए अलग डेडलाइन

31 जुलाई की डेडलाइन सभी करदाताओं पर लागू नहीं होती। ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने वाले बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए अलग समयसीमा तय की गई है। जिन करदाताओं के खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है, वे 31 अगस्त 2026 तक ITR दाखिल कर सकते हैं। वहीं, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट अनिवार्य है, उनके लिए अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। अगर वे भी तय समयसीमा चूक जाते हैं, तो उनके पास भी 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने का विकल्प रहेगा।

देर से ITR भरने के नुकसान क्या हैं?

लेट ITR दाखिल करने का असर सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहता। अगर आप बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते हैं, तो बिजनेस लॉस और कैपिटल लॉस (जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी की बिक्री से हुआ नुकसान) को भविष्य के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा नहीं मिलेगी। इससे भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी हाथ से निकल सकता है।

इसके अलावा, अगर आपका Income Tax Refund बनता है, तो देर से ITR दाखिल करने पर रिफंड मिलने में भी ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में अगर 31 जुलाई की डेडलाइन छूट गई है, तो बिना और देरी किए जल्द से जल्द बिलेटेड ITR दाखिल करना ही समझदारी होगी।

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