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4 min read | अपडेटेड August 02, 2026, 18:26 IST
सारांश
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद अगर आपके डेटा में कोई अंतर मिलता है तो आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है। नोटिस मिलने पर घबराने के बजाय सबसे पहले उसकी जांच करें और ई-फाइलिंग पोर्टल पर सही समय में जवाब दाखिल करें।

आईटीआर दाखिल करने के बाद आयकर विभाग से नोटिस मिलने पर ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए ऑनलाइन दें जवाब।
31 जुलाई को इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख खत्म हो चुकी है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी टैक्स से जुड़ी जिम्मेदारी पूरी तरह खत्म हो गई है। अगर आयकर विभाग को आपके आईटीआर में किसी तरह की गड़बड़ी या जानकारी में कोई अंतर मिलता है, तो वह बाद में भी आपको नोटिस भेज सकता है। ऐसी स्थिति बनने पर आपको परेशान या घबराने की बिल्कुल भी जरुरत नहीं है। ज्यादातर मामलों में विभाग सिर्फ जानकारी की पुष्टि करने या छोटी-मोटी गलतियों को ठीक कराने के लिए ही नोटिस भेजता है। सही समय पर सही तरीके से जवाब देने से आप भारी जुर्माने और कानूनी परेशानी से बहुत आसानी से बच सकते हैं।
आयकर विभाग कई अलग-अलग कारणों से टैक्सपेयर्स को नोटिस जारी कर सकता है। इनमें सबसे आम वजहों की बात करें तो आपके आईटीआर में दी गई आय और विभाग के पास उपलब्ध रिकॉर्ड में अंतर होना है। इसके अलावा बैंक ब्याज, एफडी का ब्याज या कैपिटल गेन की सही जानकारी न देना भी नोटिस की बड़ी वजह बनता है। गलत टैक्स छूट का दावा करने या किसी छूट को गलत तरीके से लेने पर भी विभाग सवाल उठा सकता है। अगर आपके फॉर्म 16, AIS या अन्य वित्तीय दस्तावेजों और आईटीआर में दी गई जानकारी में अंतर मिलता है, तो विभाग आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है।
अगर आपके पास ईमेल या डाक के जरिए इनकम टैक्स का कोई नोटिस आता है, तो सबसे पहले यह जांच लें कि नोटिस असली है या नहीं। इसके बाद नोटिस को ध्यान से पढ़ें और देखें कि वह किस सेक्शन के तहत जारी किया गया है। फिर अपने आईटीआर, फॉर्म 16, एआईएस और अन्य सभी जरूरी दस्तावेजों से उस जानकारी का मिलान करें। पोर्टल पर जाकर आसानी से अपने डेटा को चेक किया जा सकता है। पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही जवाब देने की तैयारी करें।
आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर नोटिस का जवाब बहुत आसानी से दिया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें। इसके बाद डैशबोर्ड में दिए गए पेंडिंग एक्शंस पर क्लिक करें और फिर ई-प्रोसीडिंग्स का विकल्प चुनें। संबंधित नोटिस को खोलकर ध्यान से पढ़ें और सबमिट रिस्पांस पर क्लिक करें। अगर आप विभाग के नोटिस में दी गई बात से सहमत हैं तो एग्री का विकल्प चुनें। अगर आप दी गई जानकारी से सहमत नहीं हैं तो डिसाइग्री का विकल्प चुनकर अपनी बात रखें और घोषणा पर टिक करके जवाब सबमिट कर दें। जवाब सबमिट होते ही आपको एक ट्रांजैक्शन आईडी मिलेगी, जिसे संभालकर रखना चाहिए। इसकी पुष्टि आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर भी भेज दी जाएगी।
अगर आपको लगता है कि आयकर विभाग द्वारा भेजी गई जानकारी सही नहीं है या उसमें कोई गलती है, तो आप डिसाइग्री का विकल्प चुन सकते हैं। इस विकल्प को चुनने के बाद आपको अपनी असहमति का साफ कारण बताना होगा। इसके साथ ही जरुरत पड़ने पर अपनी बात साबित करने के लिए संबंधित दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। विभाग आपके द्वारा भेजे गए जवाब और दस्तावेजों की अच्छे से जांच करेगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय करेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक आयकर विभाग के नोटिस को नजरअंदाज करना आपको बहुत महंगा पड़ सकता है। तय समय पर जवाब न देने की स्थिति में आयकर विभाग हर बार की चूक पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। कुछ मामलों में विभाग आपके पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर खुद ही टैक्स का आकलन कर सकता है, जिससे आपके ऊपर टैक्स की राशि और पेनल्टी दोनों काफी बढ़ सकती हैं। अगर मामला ज्यादा गंभीर हो या जानबूझकर गलत जानकारी देने की बात सामने आती है, तो कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए नोटिस मिलने पर तय समयसीमा के भीतर ही जवाब देना आपके लिए सबसे समझदारी भरा और बेहतर विकल्प माना जाता है।
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