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  1. CGHS लाभार्थी सावधान! बिना रेफरल महंगे मेडिकल टेस्ट कराने पर अटक सकता है रीइंबर्समेंट, समझ लें नियम

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CGHS लाभार्थी सावधान! बिना रेफरल महंगे मेडिकल टेस्ट कराने पर अटक सकता है रीइंबर्समेंट, समझ लें नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 18, 2026, 17:31 IST

सारांश

अगर CGHS से जुड़े किसी अस्पताल या हेल्थकेयर संस्थान में विशेषज्ञ डॉक्टर ने ₹3000 तक की कोई जांच लिखी है, तो कर्मचारी को सामान्य तौर पर यह जांच उसी अस्पताल में करानी होगी, जहां डॉक्टर से सलाह ली गई है।

CGHS medical reimbursement rule

आपको मेडिकल खर्च का रीइंबर्समेंट लेते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना होगा।

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और CGHS के दूसरे लाभार्थियों के लिए जरूरी खबर है। आपको मेडिकल खर्च का रीइंबर्समेंट लेते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना होगा। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने CGHS मुख्यालय से मिले स्पष्टीकरण के आधार पर मेडिकल रीइंबर्समेंट क्लेम से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया है। यहां ध्यान देना होगा कि यह कोई नई रीइंबर्समेंट योजना नहीं है, बल्कि पहले से लागू नियमों को कुछ खास परिस्थितियों में कैसे अपनाया जाए, यह बताया गया है।

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₹3000 तक की जांच के लिए क्या नियम है?

अगर CGHS से जुड़े किसी अस्पताल या हेल्थकेयर संस्थान में विशेषज्ञ डॉक्टर ने ₹3000 तक की कोई जांच लिखी है, तो कर्मचारी को सामान्य तौर पर यह जांच उसी अस्पताल में करानी होगी, जहां डॉक्टर से सलाह ली गई है। अगर कर्मचारी यह जांच किसी दूसरे CGHS-एम्पैनल्ड अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में कराना चाहता है, तो पहले CGHS वेलनेस सेंटर से रेफरल या एंडोर्समेंट लेना होगा।

CT, MRI और PET स्कैन के लिए रेफरल जरूरी

महंगी और विशेष जांच के मामले में नियम और अहम हो जाता है। CT Scan, MRI Scan और PET Scan जैसी जांचों के लिए CGHS से रेफरल या एंडोर्समेंट जरूरी होगा। इसके अलावा ₹3,000 से ज्यादा लागत वाली अन्य जांचों के लिए भी यही नियम लागू होगा। यानी सिर्फ विशेषज्ञ डॉक्टर की पर्ची के आधार पर दूसरी एम्पैनल्ड फैसिलिटी में जांच कराने और बाद में रीइंबर्समेंट क्लेम करने से कर्मचारी को परेशानी हो सकती है।

डॉक्टर की सलाह कितने दिन तक मान्य होगी?

स्पष्टीकरण के मुताबिक एक मेडिकल कंसल्टेशन सात दिनों तक वैध माना जाएगा, बशर्ते अगली सलाह उसी मेडिकल स्पेशियलिटी से जुड़ी हो। उदाहरण के लिए, किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद उसी विशेषज्ञता से संबंधित फॉलो-अप सात दिनों के भीतर कराया जाता है, तो वह इस वैधता अवधि में आएगा।

आंखों की जांच में तीन सेवाएं शामिल

आंखों से संबंधित कंसल्टेशन के मामले में फीस में रिफ्रैक्शन, टोनोमेट्री और फंडस एग्जामिनेशन शामिल माने जाएंगे। कर्मचारियों को इन सेवाओं के लिए अलग से कंसल्टेशन शुल्क के नियमों को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए।

अनलिस्टेड प्रक्रिया के लिए पहले अनुमति लें

अगर CGHS-एम्पैनल्ड अस्पताल का विशेषज्ञ ऐसी जांच या मेडिकल प्रक्रिया कराने की सलाह देता है, जो CGHS की सूची में शामिल नहीं है, तो कर्मचारी को इसे कराने से पहले संबंधित विभाग या कार्यालय से अनुमति लेनी होगी। बिना पूर्व अनुमति के ऐसी प्रक्रिया कराने पर रीइंबर्समेंट क्लेम में दिक्कत आ सकती है।

कर्मचारी क्या सावधानी बरतें?

कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि किसी विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद दूसरी जगह जांच कराने से पहले CGHS के रेफरल नियम जरूर जांच लें। खासकर ₹3000 से ज्यादा की जांच, CT, MRI और PET Scan के लिए पहले आवश्यक रेफरल या एंडोर्समेंट लेना बेहतर है। वहीं, अनलिस्टेड जांच या प्रक्रिया के मामले में संबंधित विभाग से पूर्व अनुमति लेना जरूरी है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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