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  1. डिफेंस सेक्टर में बड़ा ऐलान, 405 सामान अब भारत में बनाने की तैयारी, किन स्टॉक्स को मिल सकता है फायदा?

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डिफेंस सेक्टर में बड़ा ऐलान, 405 सामान अब भारत में बनाने की तैयारी, किन स्टॉक्स को मिल सकता है फायदा?

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड August 18, 2026, 13:38 IST

सारांश

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भारतीय कंपनियों, खासकर MSME और स्टार्टअप कंपनियों को मिल सकता है। इन कंपनियों को डिफेंस सेक्टर में सामान बनाने और सप्लाई करने के नए अवसर मिलेंगे।

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डिफेंस सेक्टर

डिफेंस सेक्टर में सरकार का बड़ा ऐलान

भारत सरकार ने डिफेंस सेक्टर में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (Department of Defence Production, DDP) ने Positive Indigenisation List (PIL) की छठी लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में डिफेंस से जुड़ी 405 जरूरी चीजों को शामिल किया गया है। सरकार के मुताबिक, इन चीजों को भारत में बनाने से घरेलू कंपनियों के लिए करीब 3,070 करोड़ रुपये का कारोबार पैदा हो सकता है। सरकार का मकसद साफ है कि रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो और ज्यादा से ज्यादा सामान देश में ही बनाया जाए।

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कौन सी चीजें लिस्ट में हुईं शामिल?

इस लिस्ट में डिफेंस सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के सामान शामिल हैं। इसमें छोटे-बड़े उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, मशीनों के हिस्से, कच्चा माल और अलग-अलग सिस्टम के पार्ट्स शामिल हैं। इसमें एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, Su-30MKI और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे विमानों और हेलीकॉप्टरों से जुड़े सामान शामिल हैं। इसके अलावा AL-31FP इंजन के कुछ जरूरी हिस्से भी लिस्ट में हैं।

जमीन पर इस्तेमाल होने वाले T-72, T-90 और BMP-II जैसे बख्तरबंद वाहनों से जुड़े सामान को भी स्वदेशी बनाने की योजना है। मिसाइल सिस्टम में Konkurs-M, Invar और MRSAM से जुड़ी चीजें शामिल हैं। वहीं रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम से जुड़े उपकरण भी इस लिस्ट का हिस्सा हैं।

भारतीय कंपनियों को मिलेगा फायदा

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भारतीय कंपनियों, खासकर MSME और स्टार्टअप कंपनियों को मिल सकता है। इन कंपनियों को डिफेंस सेक्टर में सामान बनाने और सप्लाई करने के नए अवसर मिलेंगे। लिस्ट में शामिल हर सामान के लिए उसे भारत में बनाने की एक अनुमानित समयसीमा भी दी गई है। जब किसी सामान का देश में सफलतापूर्वक विकास हो जाएगा, तो उसकी खरीद भारतीय कंपनियों से की जाएगी। इससे देश में रक्षा सामान बनाने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ सकती है और नई तकनीक विकसित करने को भी बढ़ावा मिलेगा।

SRIJAN Portal से जुड़ी पहल

सरकार ने अगस्त 2020 में SRIJAN डिफेंस पोर्टल शुरू किया था। इस पोर्टल के जरिए डिफेंस सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली विदेशी वस्तुओं को भारत में बनाने के लिए कंपनियों को अवसर दिए जाते हैं। जून 2026 तक इस पोर्टल के जरिए 33,000 से ज्यादा रक्षा सामान को भारत में बनाने के लिए उद्योगों के सामने रखा जा चुका है। इनमें पहली पांच Positive Indigenisation Lists में शामिल 5,012 सामान भी हैं। सरकार के मुताबिक पिछले पांच सालों में 15,700 से ज्यादा रक्षा सामान का भारत में सफलतापूर्वक निर्माण शुरू हो चुका है। इससे करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात को कम करने में मदद मिली है।

घरेलू कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

मार्च 2026 तक डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (DPSUs) ने घरेलू विक्रेताओं को करीब 10,000 करोड़ रुपये के खरीद ऑर्डर दिए हैं। इसमें कंपनियों द्वारा अपने स्तर पर किया गया उत्पादन भी शामिल है। नई लिस्ट से आने वाले समय में घरेलू रक्षा कंपनियों को और ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इससे निवेश, रोजगार और नई तकनीक को बढ़ावा मिल सकता है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

छठी Positive Indigenisation List भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ा और अहम कदम है। इसका उद्देश्य केवल आयात कम करना ही नहीं, बल्कि देश में एक मजबूत रक्षा निर्माण व्यवस्था तैयार करना भी है। अगर भारतीय कंपनियां इन 405 वस्तुओं का सफलतापूर्वक निर्माण करती हैं, तो इससे देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में घरेलू उद्योग की भूमिका और बढ़ेगी। साथ ही MSME और स्टार्टअप कंपनियों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने और भारत को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में और आगे ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

किन स्टॉक्स पर रहेगी नजर?

1- HAL: LCA, Su-30MKI, ALH और LUH जैसे एयर प्लेटफॉर्म के कारण यह लिस्ट HAL के लिए खास तौर पर अहम हो सकती है। लेकिन वास्तविक फायदा तभी माना जाएगा जब संबंधित वस्तुओं के लिए ऑर्डर/टेंडर सामने आएं।
2- BEL: रडार, सोनार, फायर कंट्रोल और कम्युनिकेशन जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम के कारण BEL को स्वदेशीकरण की इस नीति से लंबे समय में फायदा मिल सकता है। सरकार की पिछली PIL में भी BEL प्रमुख DPSUs में शामिल रहा है।
3- BDL: Konkurs-M, Invar और MRSAM जैसे मिसाइल सिस्टम का उल्लेख BDL के लिए सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक है। BDL की अपनी वेबसाइट पर भी indigenisation के लिए रक्षा वस्तुओं की प्रक्रिया मौजूद है।
(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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