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4 min read | अपडेटेड August 18, 2026, 16:12 IST
सारांश
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ का रिटर्न सोने-चांदी की कीमतों पर निर्भर करता है, लेकिन एक्सपेंस रेश्यो और लिक्विडिटी आपके नेट रिटर्न को तय करते हैं। कम एक्सपेंस रेश्यो से एनएवी पर लगने वाला चार्ज घटता है और बेहतर लिक्विडिटी से ट्रेडिंग के समय सही कीमत मिलती है। जानिए क्यों ये दो बातें बेहद जरूरी हैं।

गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में निवेश करते समय एक्सपेंस रेश्यो और लिक्विडिटी का ध्यान रखना क्यों जरूरी है।
कीमती धातुओं में निवेश के लिए गोल्ड और सिल्वर ETF आज के समय में काफी लोकप्रिय विकल्प बन चुके हैं। ज्यादातर निवेशकों को लगता है कि ETF का रिटर्न पूरी तरह से बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर निर्भर करता है। यह सच है कि मुख्य एसेट यानी सोने-चांदी के भाव से ही ETF की NAV तय होती है, लेकिन इसके बावजूद दो अलग-अलग ETF का रिटर्न एक जैसा नहीं होता। इसका सबसे बड़ा कारण एक्सपेंस रेश्यो और लिक्विडिटी है। यही वजह है कि समझदार निवेशक ETF चुनते समय इन दोनों बातों का खास ध्यान रखते हैं।
एक्सपेंस रेश्यो वह सालाना फीस या खर्च होता है, जो फंड हाउस आपके पैसे को मैनेज करने के लिए लेता है। यह चार्ज रोज के हिसाब से ETF की एनएवी में से घटाया जाता है। अगर आप लंबे समय के लिए किसी गोल्ड या सिल्वर ETF में पैसा लगाते हैं, तो आधा या एक% का एक्सपेंस रेश्यो भी आपके कुल रिटर्न में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए दो गोल्ड ETF हैं और दोनों के समय काल में सोने का भाव 50% बढ़ा है। जिस ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.3% होगा, उसका नेट रिटर्न लगभग 49.7% रहेगा। वहीं 0.8% एक्सपेंस रेश्यो वाले ETF का रिटर्न 49.2% ही रह जाएगा। इसीलिए कम एक्सपेंस रेश्यो वाला ETF आपके पास ज्यादा मुनाफा छोड़ता है।
ETF की खरीदारी और बिकवाली शेयर बाजार में आम शेयरों की तरह होती है। ऐसे में ETF में लिक्विडिटी का होना बहुत जरूरी है। लिक्विडिटी का सीधा मतलब है कि बाजार में उस ETF के खरीदार और बिकवाल कितनी संख्या में मौजूद हैं। अगर किसी ETF में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम है या लिक्विडिटी कमजोर है, तो उसके बाइंग प्राइस और सेलिंग प्राइस के बीच का अंतर बढ़ जाता है। इसे बिड-आस्क स्प्रेड कहा जाता है। कम लिक्विडिटी वाले ETF में आपको मजबूरी में एनएवी से ज्यादा कीमत पर खरीदना पड़ सकता है या बेचते समय कम दाम मिल सकता है। इसलिए हाई लिक्विडिटी वाले ETF चुनना हमेशा सही रहता है।
कम एक्सपेंस रेश्यो वाले गोल्ड ETF की बात करें तो जीरोधा गोल्ड ETF 0.3% एक्सपेंस रेश्यो के साथ आता है, जिसका AUM 2344.4 करोड़ रुपये है और एक साल का रिटर्न 52.47% रहा है। टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड का एक्सपेंस रेश्यो 0.3% है, जिसका AUM 5715 करोड़ रुपये है और एक साल का रिटर्न 52.2% रहा है। मिराए एसेट गोल्ड ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.33%, AUM 3074.6 करोड़ रुपये और एक साल का रिटर्न 52.22% है।
आदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.37% और AUM 2692.2 करोड़ रुपये है, जिसका एक साल का रिटर्न 52.53% रहा है। 360 वन गोल्ड ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.4% और AUM 129.9 करोड़ रुपये है, जिसने 51.22% रिटर्न दिया है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.42% और AUM 25821.8 करोड़ रुपये है, जिसने 52.47% रिटर्न दिया है। वहीं यूनियन गोल्ड ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.42% और AUM 271.6 करोड़ रुपये है, जिसने 52.11% रिटर्न दिया है।
चांदी के ETF में भी कम खर्च वाले कई विकल्प मौजूद हैं। आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.3% है, जिसका AUM 2756.3 करोड़ रुपये है और एक साल में इसने 100.96% का शानदार रिटर्न दिया है। मिराए एसेट सिल्वर ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.31%, AUM 1132 करोड़ रुपये और एक साल का रिटर्न 100.53% है। जीरोधा सिल्वर ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.33% और AUM 1128.2 करोड़ रुपये है, जिसने एक साल में 100.6% का रिटर्न दिया है।
टाटा सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड का एक्सपेंस रेश्यो 0.33%, AUM 5155.4 करोड़ रुपये और एक साल का रिटर्न 100.98% रहा है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.34% और AUM 13700.8 करोड़ रुपये है, जिसने 101.25% का रिटर्न दिया है। कोटक सिल्वर ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.35% और AUM 3375.6 करोड़ रुपये है, जिसने 101.07% रिटर्न दिया है। इसके अलावा 360 वन सिल्वर ETF का एक्सपेंस रेश्यो 0.39% और AUM 43.3 करोड़ रुपये है, जिसने एक साल में 100.23% का रिटर्न दिया है।
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