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4 min read | अपडेटेड September 09, 2026, 10:37 IST
सारांश
तेल सप्लाई की चिंताओं के चलते कच्चे तेल के भाव में आज भी तेजी जारी है। आज ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव 1.5% बढ़कर $99.5 प्रति बैरल हो गया है। भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। तेल की कीमतों में तेजी से भारत में ट्रेड डेफिसिट और महंगाई बढ़ने के साथ ग्रोथ पर असर का खतरा पैदा होता है।

विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का सिलसिला आज 09 सितंबर को भी जारी है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 610 अंकों की गिरावट नजर आई और यह 74968.99 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 158 अंकों की गिरावट के साथ 23477.55 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते क्रूड ऑयल के भाव में तेजी जारी है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला है। यहां हम समझेंगे कि बाजार में गिरावट की क्या वजहें हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के पांच क्रूड टैंकरों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई एक अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की कोशिश के जवाब में की गई। सेंटकॉम ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी हमले को सफलतापूर्वक टाल दिया और किसी भी अमेरिकी कर्मी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
यमन में ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब के कई शहरों पर हमले करने से पश्चिम एशिया में युद्ध और तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई तेल टैंकरों पर हमला किया और इसके साथ ही ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला किया है। अमेरिका-ईरान के बीच मिलिट्री एक्शन लगभग एक महीने तक रुका हुआ था, जिसमें वाशिंगटन तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाने पर ध्यान दे रहा था, लेकिन पिछले महीने के आखिर में हमले फिर से शुरू हो गए। इसके चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
तेल सप्लाई की चिंताओं के चलते कच्चे तेल के भाव में आज भी तेजी जारी है। आज ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव 1.5% बढ़कर $99.5 प्रति बैरल हो गया है। भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। तेल की कीमतों में तेजी से भारत में ट्रेड डेफिसिट और महंगाई बढ़ने के साथ ग्रोथ पर असर का खतरा पैदा होता है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 8 सितंबर को FIIs नेट सेलर बन गए और उन्होंने 123 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। हाल ही में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। FIIs की बिकवाली का असर डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू पर भी पड़ता है।
बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे गिरकर 94.95 पर आ गया। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें थीं, जो अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गई थीं। फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि डॉलर के कमजोर होने से गिरावट का असर कुछ कम हुआ। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.80 पर खुला और फिर 94.95 के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 21 पैसे की गिरावट थी।
आज के कारोबार में IT शेयरों में भारी बिकवाली हो रही है। रिपोर्ट लिखे जाने के समय निफ्टी IT इंडेक्स में 2.82 फीसदी की गिरावट थी। Coforge के शेयरों में आज करीब 8 फीसदी की कमजोरी नजर आई। इसके साथ ही Infosys और TCS समेत इंडेक्स में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे।
इसके अलावा Sensex के 30 में से ज्यादातर शेयर लाल निशान पर ट्रेड करते दिखे। HDFC Bank, HUL, ICICI Bank, SBIN, RIL, Maruti Suzuki, ITC, Bajaj Finance और Bharti Airtel जैसे हैवीवेट शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं। इन सभी ने बाजार को आज नीचे खींच लिया।
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