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  1. सिर्फ FD से ज्यादा रिटर्न के लिए Bonds में लगाना चाहते हैं पैसा? तुरंत नोट कर लें ये डीटेल

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सिर्फ FD से ज्यादा रिटर्न के लिए Bonds में लगाना चाहते हैं पैसा? तुरंत नोट कर लें ये डीटेल

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 08, 2026, 16:55 IST

सारांश

शेयर बाजार में अनिश्चितता के बीच कॉर्पोरेट बॉन्ड निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न और रेगुलर इनकम का एक अच्छा विकल्प साबित हो रहे हैं। इनमें आमतौर पर 6 से 8% तक ब्याज दर मिलती है।

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कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में एफडी से बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है।

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और सोने-चांदी की कीमतों में ठहराव के बीच निवेशक सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे समय में कॉर्पोरेट बॉन्ड निवेशकों के लिए रेगुलर इनकम हासिल करने और एफडी से बेहतर रिटर्न कमाने का एक आकर्षक जरिया बनकर उभरे हैं। आमतौर पर कॉर्पोरेट बॉन्ड में 6 से 8% तक ब्याज दर मिलती है, जो फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक साधनों के मुकाबले निवेशकों को आकर्षित करती है। हालांकि कुछ बॉन्ड 12 फीसदी तक का रिटर्न भी देते हैं

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क्या होते हैं कॉर्पोरेट बॉन्ड?

जब कंपनियों को फंड की जरूरत होती है, तो वे निवेशकों से पैसा उधार लेती हैं और बदले में तय दर से रेगुलर ब्याज और मैच्योरिटी पर मूलधन वापस करने का भरोसा देती हैं। इसी को कॉर्पोरेट बॉन्ड कहा जाता है। कंपनी द्वारा दिया जाने वाला यह ब्याज कूपन कहलाता है। एफडी के उलट बॉन्ड की कीमतें सेकेंडरी मार्केट में घटती-बढ़ती रहती हैं। निवेशक मैच्योरिटी से पहले भी अपने बॉन्ड बेच सकते हैं, लेकिन हर समय खरीदार मिलना आसान नहीं होता।

गोल्स के हिसाब से तय करें मैच्योरिटी और क्रेडिट रेटिंग

कुछ एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि निवेशकों को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि उन्हें पैसे की जरूरत कब होगी। एक साल, तीन साल या पांच साल के अलग-अलग गोल्स के लिए अलग-अलग मैच्योरिटी पीरियड वाले बॉन्ड चुने जा सकते हैं। इस तरीके को बॉन्ड लेडर कहा जाता है, जिससे फ्यूचर में कैश की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा निवेशकों को बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग भी जरूर देखनी चाहिए और एए प्लस या उससे ज्यादा रेटिंग वाले सिक्योर्ड बॉन्ड्स को तरजीह देनी चाहिए। एएए रेटिंग सबसे सुरक्षित मानी जाती है, जबकि रेटिंग घटने के साथ डिफॉल्ट का रिस्क बढ़ता जाता है।

कूपन और YTM का अंतर समझना है जरूरी

बॉन्ड मार्केट में यील्ड टू मैच्योरिटी यानी YTM को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। अभिषेक भसीन का कहना है कि जब कोई निवेशक सेकेंडरी मार्केट से बॉन्ड खरीदता है, तो YTM से यह स्पष्ट होता है कि बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखने पर वास्तव में कितना रिटर्न मिलेगा। मान लीजिए किसी कंपनी के 100 रुपये फेस वैल्यू वाले बॉन्ड पर 8% का कूपन रेट है, तो आपको हर साल 8 रुपये ब्याज मिलेगा। लेकिन अगर सेकेंडरी मार्केट में यह बॉन्ड आप 101.50 रुपये में खरीदते हैं, तो 2 साल बाद मैच्योरिटी पर आपको केवल 100 रुपये ही वापस मिलेंगे। इससे आपका वास्तविक रिटर्न यानी YTM 8% के बजाय घटकर लगभग 7% रह जाएगा।

लिक्विडिटी का रिस्क और एसेट एलोकेशन

शेयरों की तरह कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में रोजाना बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग नहीं होती, इसलिए मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचना मुश्किल हो सकता है। रिटेल निवेशकों के लिए लिक्विडिटी एक बड़ा फैक्टर है। इसके अलावा एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ इक्विटी में कम रिटर्न की वजह से पूरा पैसा बॉन्ड में शिफ्ट नहीं करना चाहिए। निवेशकों को अपनी उम्र, फाइनेंशियल गोल्स और रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर एसेट एलोकेशन बनाए रखना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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