मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड September 11, 2026, 11:50 IST
सारांश
Stock Market: कच्चे तेल की कीमत में आज बड़ा उछाल आया है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड करीब 101 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। अगस्त की शुरुआत के मुकाबले ब्रेंट करीब 30% चढ़ चुका है।

इस साल अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 70% से ज्यादा बढ़ चुकी है।
भारतीय शेयर बाजार में आज 11 सितंबर को एक बार फिर बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 740 अंकों की कमजोरी नजर आई और यह 74,160.16 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी करीब 245 अंक टूटकर 23,231.40 के लेवल पर ट्रेड करता दिखा। अमेरिका-ईरान टेंशन के बीच आज क्रूड ऑयल के भाव में बड़ा उछाल आया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी जारी है। यहां हम समझेंगे कि बाजार में आज की गिरावट के लिए कौन से फैक्टर्स जिम्मेदार हैं।
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सेनाओं के बीच टकराव बढ़ रहा है। इससे पहले से ही अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण प्रभावित मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई पर एक और खतरा पैदा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में Bab el-Mandeb Strait खास अहमियत रखता है। यह लाल सागर और Gulf of Aden को जोड़ने वाला एक अहम समुद्री रास्ता है, जिससे बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामान की आवाजाही होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक हूती लड़ाकों ने गुरुवार को यमन के मोखा पोर्ट सिटी पर कब्जा कर लिया और रणनीतिक द्वीपों की ओर आगे बढ़े हैं। इससे बाब-अल-मंदेब के आसपास उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है। बाजार को चिंता है कि अगर यहां तनाव और बढ़ा तो तेल टैंकरों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
इस बीच सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों के कारण कुछ ऑपरेशन रोकने पड़े हैं। सऊदी अरब ने कच्चे तेल के उत्पादन में भी तेज गिरावट की जानकारी दी है। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र में संघर्ष के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है और रिफाइनरियों व ट्रेडर्स को तेल की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए ज्यादा प्रयास करने पड़ रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमत में आज बड़ा उछाल आया है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड करीब 101 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। अगस्त की शुरुआत के मुकाबले ब्रेंट करीब 30% चढ़ चुका है और इस हफ्ते जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है।
इस साल अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 70% से ज्यादा बढ़ चुकी है। हालांकि, यह अप्रैल में युद्ध के दौरान पहुंचे करीब 126 डॉलर प्रति बैरल के शिखर से अभी नीचे है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी तेल और ईंधन की सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है।
भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7% के ऊपर पहुंच गई। इसका मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की बढ़ती यील्ड थी। महंगे तेल से भारत में महंगाई बढ़ने की चिंता है, जबकि US बॉन्ड की ज्यादा यील्ड के कारण निवेशकों को वहां निवेश करना ज्यादा आकर्षक लग रहा है। अमेरिका में उम्मीद से अधिक आए पीपीआई (PPI) आंकड़ों के बाद वहां 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 4.98% हो गई है।
बीते कारोबारी दिन अमेरिकी बाजारों में कमजोरी नजर आई। S&P 500 और Nasdaq Composite गिरावट के साथ बंद हुए। आज एशिया के शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। जापान का Nikkei 225 लगभग 3% और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 2% गिर गया। इसके अलावा Hang Seng, Straits Times, Taiwan Weighted और SET Composite समेत सभी एशियाई बाजार लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 10 सितंबर को FIIs ने करीब 438 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके अलावा 09 सितंबर को भी विदेशी निवेशकों ने 583 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके चलते भी निवेशकों का सेंटीमेंट खराब हुआ है।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में

अगला लेख