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  1. क्या अब UPI पर भी लग सकता है चार्ज? लोकसभा में बिल पास, जानिए क्या बदल सकता है?

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क्या अब UPI पर भी लग सकता है चार्ज? लोकसभा में बिल पास, जानिए क्या बदल सकता है?

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 06, 2026, 16:50 IST

सारांश

नए प्रावधान के अनुसार, केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना जारी कर यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी जाए। यानी अब फैसला पूरी तरह सरकार के हाथ में होगा।

UPI

फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि ग्राहकों से UPI पर शुल्क लिया जाएगा।

लोकसभा ने गुरुवार को पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह अधिसूचना जारी कर बैंकों और अन्य पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) को UPI और अन्य तय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क (MDR) लगाने की अनुमति दे सके। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत शुल्क लग जाएगा। सरकार को इस संबंध में अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी।

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अब तक क्या नियम था?

अभी तक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को UPI जैसे तय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर कोई भी शुल्क लेने की अनुमति नहीं थी। इसी वजह से ग्राहक और व्यापारी बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के UPI के जरिए भुगतान कर रहे थे। दूसरी ओर, RTGS और NEFT जैसे भुगतान माध्यमों पर पहले से ही कुछ सेवा शुल्क लिया जाता है।

बिल में क्या बदलाव किया गया है?

संशोधन के तहत कानून में मौजूद उस प्रावधान को बदला गया है, जो UPI और अन्य तय डिजिटल भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से रोकता था। नए प्रावधान के अनुसार, केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना जारी कर यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी जाए। यानी अब फैसला पूरी तरह सरकार के हाथ में होगा।

सरकार ऐसा क्यों करना चाहती है?

सरकार का मानना है कि देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लगातार मजबूत बनाने के लिए बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को पर्याप्त आय का स्रोत मिलना जरूरी है। फिलहाल UPI पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि इसके संचालन और रखरखाव पर खर्च होता है। सरकार का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी मजबूत रहे और सभी पक्षों के लिए यह टिकाऊ बन सके।

RBI गवर्नर ने क्या कहा?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि फिलहाल UPI पर MDR लागू होने की बात करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट जैसी सार्वजनिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए निवेश जरूरी है और इसकी लागत किसी न किसी को उठानी होगी। उनके मुताबिक या तो इसका खर्च करदाताओं के पैसे से पूरा होगा या फिर 'यूजर पे' मॉडल के तहत MDR के जरिए इसकी भरपाई की जाएगी।

क्या आम लोगों को UPI पर चार्ज देना पड़ेगा?

फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि ग्राहकों से UPI पर शुल्क लिया जाएगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि भविष्य में MDR लागू होता भी है, तो इसकी शुरुआत संभवतः व्यापारी (Merchant) को किए जाने वाले बड़े भुगतान से हो सकती है। व्यक्ति से व्यक्ति (Peer-to-Peer) होने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर पर शुल्क लगने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल क्या समझें?

लोकसभा से बिल पास होने के बाद सरकार के पास UPI और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की कानूनी शक्ति आ जाएगी, लेकिन UPI फिलहाल मुफ्त ही रहेगा। यदि भविष्य में कोई चार्ज लागू किया जाता है, तो उसकी सीमा, भुगतान करने वाला पक्ष और लागू होने की तारीख सरकार अलग से अधिसूचित करेगी। फिलहाल आम UPI यूजर के लिए कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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