return to news
  1. क्या है ‘हाइब्रिड अटैक’, जिसने बढ़ाई यूरोप की टेंशन? रूस के खतरे के बीच NATO देशों ने क्यों शुरू की तैयारियां

बिजनेस न्यूज़

क्या है ‘हाइब्रिड अटैक’, जिसने बढ़ाई यूरोप की टेंशन? रूस के खतरे के बीच NATO देशों ने क्यों शुरू की तैयारियां

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड September 21, 2026, 13:45 IST

सारांश

यूरोपीय देशों में रूस से जुड़ी हवाई क्षेत्र के उल्लंघन, संदिग्ध तोड़फोड़ और दूसरी गतिविधियों की घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा तैयारियां बढ़ाई जा रही हैं। ‘हाइब्रिड वॉर’ में साइबर हमले, तोड़फोड़, गलत सूचना, राजनीतिक प्रक्रियाओं में दखल और ड्रोन जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

Russia NATO

व्लादिमीर पुतिन ने 19 सितंबर को कहा कि रूस के यूरोप के खिलाफ कोई आक्रामक इरादा नहीं है।

यूरोप में रूस को लेकर सुरक्षा चिंता लगातार बढ़ रही है। मामला सिर्फ किसी बड़े सैन्य हमले का नहीं है, बल्कि ऐसे ‘हाइब्रिड अटैक’ का भी है, जिनके जरिए बिना सीधे युद्ध शुरू किए किसी देश पर दबाव बनाया जा सकता है। यूरोपीय देश ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ-साथ साइबर अटैक, तोड़फोड़ और गलत सूचना जैसी गतिविधियों को लेकर भी तैयारियां बढ़ा रहे हैं। हालांकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगातार कहते रहे हैं कि यूरोप के खिलाफ रूस के कोई आक्रामक इरादे नहीं हैं।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

मैक्रों ने रूस के ‘हाइब्रिड खतरे’ पर चेताया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 18 सितंबर को कहा कि फ्रांस और यूरोप के सामने रूस से जुड़ा ‘हाइब्रिड खतरा’ बढ़ गया है। राजनीतिक दलों के नेताओं और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों से मुलाकात के बाद मैक्रों ने कहा कि उन्होंने अहम बुनियादी ढांचे और रक्षा उद्योग से जुड़े संवेदनशील ठिकानों को संभावित ड्रोन और साइबर हमलों से बचाने की योजना बनाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस के खिलाफ हालिया रूसी हाइब्रिड हमलों को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जाएगा।

पोलैंड ने ड्रोन और मिसाइल हमलों की आशंका जताई

मैक्रों के बयान से एक दिन पहले पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने संसद में कहा कि खुफिया आकलनों के अनुसार रूस यूक्रेन का समर्थन करने वाले देशों, जिसमें पोलैंड जैसे NATO सदस्य भी शामिल हैं, पर ड्रोन या मिसाइल हमला कर सकता है। टस्क के अनुसार, रूस इन हमलों को ‘दुर्घटना’ के तौर पर पेश कर सकता है और इस तरह NATO की सामूहिक रक्षा व्यवस्था को परख सकता है।

इसके अलावा द गार्जियन न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक चेक गणराज्य की सुरक्षा सेवा BIS के प्रमुख माइकल कौडेल्का ने कहा कि रूस की ओर से NATO क्षेत्र में सीमित सैन्य घुसपैठ, ड्रोन हमला या किसी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई हो सकती है। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति “सालों में नहीं, बल्कि महीनों में” सामने आ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कई देश ऐसी स्थिति को रोकने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

यूरोप में बढ़ी सुरक्षा तैयारियां

यूरोपीय देशों में रूस से जुड़ी हवाई क्षेत्र के उल्लंघन, संदिग्ध तोड़फोड़ और दूसरी गतिविधियों की घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा तैयारियां बढ़ाई जा रही हैं। ‘हाइब्रिड वॉर’ में साइबर हमले, तोड़फोड़, गलत सूचना, राजनीतिक प्रक्रियाओं में दखल और ड्रोन जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

जर्मनी ने संभावित बड़े संघर्ष को देखते हुए अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी बढ़ाई है, जबकि लिथुआनिया ने लोगों को सुरक्षित निकालने की योजना अपडेट की है। NATO देशों ने बाल्टिक क्षेत्र में सैन्य अभ्यास भी किए हैं।

जर्मनी और दूसरे देशों की तैयारी

रूस के साथ तनाव के बीच जर्मनी के सेंट पीटर्सबर्ग स्थित महावाणिज्य दूतावास ने शुक्रवार को अपनी सेवाएं बंद कर दीं। उसकी जिम्मेदारियां अब मॉस्को स्थित जर्मन दूतावास संभालेगा। जर्मनी में सैन्य अस्पतालों को संभावित युद्ध के लिए तैयार किया जा रहा है और नागरिक डॉक्टरों को युद्ध में होने वाली चोटों के इलाज की ट्रेनिंग दी जा रही है।

लिथुआनिया ने राष्ट्रीय निकासी योजना को अपडेट किया है। पोलैंड ने सैन्य खतरे और अन्य आपात स्थितियों के लिए अपनी निकासी योजना बदली है। फिनलैंड ने ड्रोन और हवाई हमलों को लेकर तैयारी बढ़ाई है, जबकि लातविया ने अपनी पूर्वी सीमा पर सुरक्षा और ड्रोन-रोधी क्षमता मजबूत की है।

पुतिन बोले- यूरोप से युद्ध नहीं चाहते

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 19 सितंबर को कहा कि रूस के यूरोप या यूरोपीय देशों के खिलाफ कोई आक्रामक इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संबंध सुधारने और सहयोग के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यूरोपीय नेताओं पर रूस के खतरे का इस्तेमाल अपनी नीतियों को सही ठहराने और मॉस्को के खिलाफ युद्ध की तैयारी करने का आरोप लगाया।

अमेरिका की सेना को लेकर भी अनिश्चितता

अमेरिका के यूरोप में सैनिकों की मौजूदगी को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन यूरोप से 25,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिकों को हटाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

अगला लेख