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  1. भारतीय बैंकों में आया 127 अरब डॉलर का विदेशी फंड, S&P ने बताया क्यों है यह बड़ी राहत

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भारतीय बैंकों में आया 127 अरब डॉलर का विदेशी फंड, S&P ने बताया क्यों है यह बड़ी राहत

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 21, 2026, 16:48 IST

सारांश

बैंकों ने 8 जून से 31 अगस्त, 2026 के बीच विदेशी मुद्रा प्रवासी-बैंक (एफसीएनआर-बी) खातों के जरिये रिकॉर्ड 127 अरब डॉलर की जमा राशि जुटाई। एसएंडपी ने कहा कि ये फंड 31 मार्च, 2026 तक बैंकों में जमा राशि का करीब 4.5% है।

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भारतीय बैंकों के लिए 127 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा बड़ी राहत: एसएंडपी (Photo: Shutterstock)

फाइनेंशियल रिसर्च एंड क्रेडिट रेटिंग निर्धारित करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी डॉलर आकर्षित करने के लिए खास जमा योजना के तहत जुटाई गई 127 अरब डॉलर की राशि भारतीय बैंकों के लिए 'बड़ी राहत' है। इससे फाइनेंसिंग की तंग स्थिति आसान हुई है और नकदी की उपलब्धता बढ़ी है। बैंकों ने 8 जून से 31 अगस्त, 2026 के बीच विदेशी मुद्रा प्रवासी-बैंक (एफसीएनआर-बी) खातों के जरिये रिकॉर्ड 127 अरब डॉलर की जमा राशि जुटाई। एसएंडपी ने कहा कि ये फंड 31 मार्च, 2026 तक बैंकों में जमा राशि का करीब 4.5% है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, 'भारतीय बैंकों को इससे बड़ी राहत मिली है। अनुकूल दरों ने देश के प्रवासी समुदाय को बड़ी मात्रा में जमा राशि वापस भारत भेजने के लिए प्रेरित किया। हम इसे व्यापक रूप से सकारात्मक मानते हैं।’

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एसएंडपी ने कहा, 'इससे फाइनेंसिंग की तंग स्थिति सुगम हुई है। पिछले चार साल से कर्ज वृद्धि, जमा वृद्धि से अधिक रही है।' भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए जून की शुरुआत से अगस्त के बीच इन तीन से पांच साल की अवधि वाली जमाओं की मूल राशि से जुड़ी जोखिम लागत को स्वयं उठाया है। इससे बैंकों को ऐसे अमेरिकी डॉलर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की सुविधा मिली।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की ऋण विश्लेषक गीता चुघ ने कहा, 'एफसीएनआर (बी) जमाओं की अवधि तीन से पांच साल है। इससे बैंकों की फाइनेंसिंग की स्थिति में सुधार होगा और परिसंपत्ति-देनदारी की अवधि के अंतर को पाटने में मदद मिलेगी।'

एसएंडपी कहा कि बैंकों की कुल परिसंपत्तियां इन खातों के जरिये जुटाई गई 127 अरब डॉलर की राशि से भी अधिक बढ़ सकती हैं। इसका कारण बैंक ग्राहकों को अपनी जमा राशि के एवज में अधिक नकदी उधार लेने और उसे एफसीएनआर (बी) खातों में रखने की अनुमति दे रहे हैं। एसएंडपी ने कहा कि एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने का सबसे क्लियर फायदा लाभ कैश की उपलब्धता के स्तर पर हुआ है। भारत में बैंक ऊंचे कर्ज-जमा अनुपात और जमा जुटाने के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच काम कर रहे हैं। उसने कहा, 'एफसीएनआर (बी) के जरिये आई राशि इस बाधा को कम करती है और मध्यम अवधि के लिए पर्याप्त वित्तपोषण उपलब्ध कराती है। इन जमाओं की अवधि तीन से पांच साल है, जिससे वित्तपोषण और देनदारी की अवधि में सुधार हुआ है।'

PTI इनपुट के साथ

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