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3 min read | अपडेटेड September 08, 2026, 14:10 IST
सारांश
भारत में इलेक्ट्रिक फ्रेट वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 में जहां 201 इलेक्ट्रिक फ्रेट वाहन तैनात किए गए थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 826 हो गई। यानी एक साल में इसमें चार गुना से ज्यादा की वृद्धि हुई।

भारत में इलेक्ट्रिक फ्रेट वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। (Image: AI Generated)
भारत में इलेक्ट्रिक ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने PACT प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसके जरिए देशभर में माल ढुलाई की जरूरत को एक जगह जोड़ा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक ट्रकों को सड़कों पर उतारा जा सके। इसके साथ ही कंपनियों को फाइनेंस और चार्जिंग जैसी सुविधाएं जुटाने में भी मदद मिलेगी। नीति आयोग ने 5वें e-FAST India Summit 2026 में प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट यानी PACT लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक और जीरो-एमिशन ट्रकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
PACT के जरिए शिपर्स, लॉजिस्टिक्स सर्विस प्रोवाइडर्स (LSPs) और दूसरे संबंधित कारोबारियों से माल ढुलाई की मांग जुटाई जाएगी। इसके बाद इस मांग को चिन्हित फ्रेट कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रकों की तैनाती के अवसरों में बदला जाएगा। प्लेटफॉर्म पर ट्रक निर्माता, फाइनेंस कंपनियां, चार्जिंग स्टेशन संचालक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां भी एक साथ जुड़ेंगी।
इससे कंपनियों को पहले से पता चल सकेगा कि किस रूट पर कितने इलेक्ट्रिक ट्रकों की जरूरत है। इसके आधार पर चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बनाना भी आसान होगा। साथ ही, ट्रक ऑपरेटरों और निवेशकों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों का कारोबारी मॉडल ज्यादा स्पष्ट और भरोसेमंद बन सकता है।
भारत में इलेक्ट्रिक फ्रेट वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 में जहां 201 इलेक्ट्रिक फ्रेट वाहन तैनात किए गए थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 826 हो गई। यानी एक साल में इसमें चार गुना से ज्यादा की वृद्धि हुई। फिलहाल देशभर में 3000 से अधिक इलेक्ट्रिक मीडियम और हेवी-ड्यूटी (e-MHD) ट्रक चल रहे हैं।
हालांकि, इस सेक्टर को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए कई चुनौतियों का समाधान जरूरी है। इनमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, फाइनेंस की उपलब्धता, ट्रकों की ज्यादा शुरुआती लागत और फ्लीट ऑपरेटरों के लिए निवेश का जोखिम प्रमुख हैं।
समिट में ZET Marketplace भी पेश किया गया। यह एक बिजनेस प्लेटफॉर्म है, जहां इलेक्ट्रिक ट्रक निर्माता, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, चार्जिंग स्टेशन ऑपरेटर, फाइनेंस कंपनियां और टेक्नोलॉजी कंपनियां आपस में जुड़ सकेंगी। इसका उद्देश्य केवल बातचीत तक सीमित रहने के बजाय वास्तविक कारोबारी साझेदारी तैयार करना है। कंपनियां यहां अपने प्रोडक्ट और सेवाएं दिखा सकती हैं और इलेक्ट्रिक फ्रेट से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पार्टनर तलाश सकती हैं।
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा का कहना है कि भारत ने इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता और नीतिगत सपोर्ट तैयार करने में काफी प्रगति की है। अब अगला कदम पूरे इकोसिस्टम की चुनौतियों को मिलकर दूर करना है। उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए नए फाइनेंस मॉडल, कॉरिडोर आधारित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार आधारित साझेदारियों को अहम बताया। कुल मिलाकर, PACT और ZET Marketplace का लक्ष्य अलग-अलग छोटे पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर इलेक्ट्रिक ट्रकों की बड़े स्तर पर व्यावसायिक तैनाती करना है। इससे भारत में स्वच्छ माल परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती मिल सकती है।
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