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4 min read | अपडेटेड October 07, 2026, 11:28 IST
सारांश
RBI ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी स्टांस को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। MPC के छह में से चार सदस्यों ने इस बदलाव के पक्ष में वोट किया। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि फिलहाल रेपो रेट में कटौती की संभावना नहीं है।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 यानी FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। MPC के सभी छह सदस्यों ने इस फैसले के पक्ष में वोट किया। इसके साथ ही लगातार 21 पॉलिसी मीटिंग तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का सिलसिला खत्म हो गया। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को बढ़ाकर 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट तथा बैंक रेट को 5.75% कर दिया गया है। यहां गवर्नर संजय मल्होत्रा की स्पीच की 10 बड़ी बातें बताई गई है।
RBI ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी स्टांस को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। MPC के छह में से चार सदस्यों ने इस बदलाव के पक्ष में वोट किया। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया कि फिलहाल रेपो रेट में कटौती की संभावना नहीं है। RBI का फोकस बढ़ती कमॉडिटी प्राइसेज, क्रूड ऑयल में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल इकोनॉमिक अनसर्टेन्टी के बीच इन्फ्लेशन को नियंत्रित रखने पर है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 यानी FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। यह अनुमान ऐसे समय बढ़ाया गया है, जब पहली तिमाही में इकोनॉमी ने 7.8% की ग्रोथ दर्ज की है। RBI को दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.2%, तीसरी तिमाही में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने की उम्मीद है। वहीं FY28 की पहली तिमाही के लिए ग्रोथ का अनुमान 7.1% है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद घरेलू इकोनॉमिक एक्टिविटी मजबूत बनी हुई है।
ग्रोथ आउटलुक बेहतर होने के बावजूद इन्फ्लेशन को लेकर RBI की चिंता बढ़ी है। सेंट्रल बैंक ने FY27 के लिए CPI इन्फ्लेशन का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। दूसरी तिमाही में इन्फ्लेशन 4.9%, तीसरी तिमाही में 6% और चौथी तिमाही में 5.7% रहने का अनुमान है। FY28 की पहली तिमाही के लिए इन्फ्लेशन का अनुमान 5.6% है। RBI ने कहा कि इन्फ्लेशन से जुड़े रिस्क फिलहाल संतुलित हैं।
RBI के मुताबिक आने वाले समय में फूड प्राइसेज, क्रूड ऑयल और अन्य कमॉडिटीज इन्फ्लेशन पर दबाव बनाए रख सकते हैं। कमजोर मॉनसून, अल नीनो और ऑयल प्राइसेज में वोलैटिलिटी को लेकर चिंता बनी हुई है। शुगर और अनियन जैसी चीजों की कीमतों में तेजी के साथ महंगाई का दबाव अब ज्यादा व्यापक होता दिख रहा है। अगस्त में CPI इन्फ्लेशन बढ़कर 4.8% हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.5% थी।
RBI ने FY27 के लिए कोर इन्फ्लेशन का अनुमान भी 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है। गवर्नर ने कहा कि RBI कोर इन्फ्लेशन और डिफ्यूजन इंडेक्स जैसे इंडिकेटर्स पर नजर रख रहा है, ताकि पता लगाया जा सके कि महंगाई का दबाव कितना व्यापक हो रहा है। हालांकि, अभी सप्लाई-साइड प्रेशर के व्यापक रूप से इन्फ्लेशन में बदलने के सीमित संकेत मिले हैं।
सितंबर में वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट दोबारा तेज होने और इसके कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइसेज में तेजी व वोलैटिलिटी बढ़ने से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं। इससे फाइनेंशियल मार्केट्स में भी वोलैटिलिटी बढ़ी है। RBI के अनुसार ग्लोबल इन्फ्लेशन में तेज बढ़ोतरी की आशंका है, जिसके कारण कई बड़ी सेंट्रल बैंक्स मॉनेटरी पॉलिसी को और सख्त कर सकती हैं।
RBI ने कहा कि वह लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए जरूरी कदम उठाएगा, ताकि वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को रेपो रेट के आसपास रखा जा सके। क्रेडिट ग्रोथ अभी भी मजबूत और अलग-अलग सेक्टर्स में व्यापक बनी हुई है। वहीं लेंडिंग और डिपॉजिट रेट्स में अलग-अलग बदलावों के जरिए मॉनेटरी पॉलिसी का असर क्रेडिट मार्केट में दिखाई दे रहा है।
एक्सटर्नल सेक्टर को लेकर RBI ने कहा कि करंट अकाउंट डेफिसिट अभी भी सीमित है और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में इस साल अच्छा सरप्लस रहने की उम्मीद है। FY27 के पहले चार महीनों में नेट FDI इनफ्लोज बढ़कर 13.8 अरब डॉलर हो गए, जो पिछले साल इसी अवधि में 9.6 अरब डॉलर थे।
इसके अलावा RBI ने NBFC अकाउंट एग्रीगेटर्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की अनुमति देने का फैसला किया है। SEBI-रजिस्टर्ड डिपॉजिटरीज को कस्टमर डिपॉजिट्स को अपने स्टेटमेंट्स में शामिल करने की भी अनुमति दी गई है।
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