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RBI MPC Highlights: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, गवर्नर बोले- दरों में आगे कटौती की संभावना नहीं

Upstox

7 min read | अपडेटेड October 07, 2026, 10:36 IST

सारांश

RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई है। अगस्त में कंज्यूमर इनफ्लेशन बढ़कर 4.82% हो गई, जो RBI के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से भारत के लिए इंपोर्टेड इनफ्लेशन का खतरा बढ़ गया है।

RBI MPC

RBI MPC: इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा।

RBI MPC Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) आज यानी 7 अक्टूबर को ब्याज दरों पर अपना फैसला सुना दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके चलते Repo Rate 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली रेपो रेट बढ़ोतरी है। RBI गवर्नर ने कहा कि नीतिगत दरों में आगे कटौती की संभावना नहीं है। या तो इसमें वृद्धि होगी या यह स्थिर रहेगी। यहां RBI गवर्नर के स्पीच की पूरी जानकारी दी जा रही है।
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10:25 AM: CAD पर गवर्नर ने क्या कहा?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत को सेवाओं से अच्छी कमाई और विदेशों से आने वाले पैसों (remittances) का फायदा मिल रहा है। लेकिन जुलाई में भारत का व्यापार घाटा (merchandise trade deficit) बढ़ गया, यानी सामान के आयात पर निर्यात से ज्यादा पैसा खर्च हुआ। इसी वजह से Current Account Deficit (CAD) बढ़ गया। इसके बावजूद, इस साल की पहली तिमाही में भारत का Current Account Deficit बहुत ज्यादा नहीं था। दुनिया में कई आर्थिक चुनौतियां होने के बावजूद यह एक ऐसे स्तर पर रहा, जिसे लंबे समय तक बनाए रखना संभव माना जाता है।

वित्तीय स्थिरता के बारे में RBI गवर्नर ने कहा कि NBFCs की वित्तीय स्थिति भी मजबूत है। यानी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में फिलहाल बड़ी कमजोरी नहीं दिख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों की स्थिति मजबूत बनी हुई है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी है, उनकी खराब संपत्तियां (NPA) नियंत्रण में हैं और उनकी कमाई भी अच्छी बनी हुई है।

10:23 AM: भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रमों की वजह से ग्लोबल हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रही है और आर्थिक रफ्तार व्यापक बनी हुई है। साथ ही, अर्थव्यवस्था के लचीले बने रहने की उम्मीद है। उपलब्ध डेटा को देखते हुए यह भी साफ है कि महंगाई और उसके हालात अब वैसे नहीं हैं जैसे पिछले साल थे। इस तिमाही समेत आने वाली तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई के औसतन लगभग 5.8% रहने और इस फाइनेंशियल ईयर में कोर महंगाई के 4.4% रहने का अनुमान है।

10:21 AM: महंगाई का अनुमान

अगले साल की पहली तिमाही में महंगाई 5.6% रहने का अनुमान है। इस पूरे साल में CPI महंगाई 5.2% रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही में यह 4.9%, तीसरी तिमाही में 6% और चौथी तिमाही में 5.7% रहने का अनुमान है। अगस्त में खाने-पीने और ईंधन से जुड़ी महंगाई थोड़ी बढ़ी। इसका एक मुख्य कारण बेस इफेक्ट है, यानी पिछले साल की कीमतों का असर इस साल की महंगाई की गणना पर पड़ा। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी अब ज्यादा चीजों में देखने को मिल रही है। खासकर चीनी और प्याज जैसी कुछ चीजों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है।

10:15 AM: GDP ग्रोथ का अनुमान

अगले साल की पहली तिमाही में Real GDP Growth 7.1% रहने का अनुमान है। इस साल भी पूरी अर्थव्यवस्था की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान है। इसमें दूसरी तिमाही में 7.2%, तीसरी तिमाही में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% ग्रोथ रहने का अनुमान लगाया गया है।MPC ने कहा कि देश की आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं, भले ही दुनिया की अर्थव्यवस्था में कई चुनौतियां हैं। इसका उदाहरण यह है कि पहली तिमाही में भारत की Real GDP Growth 7.8% रही।

Manufacturing PMI और Services PMI दोनों ही दूसरी तिमाही में Expansion Zone में रहे। इसका मतलब है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ रही थीं। हालांकि, पहली तिमाही की तुलना में इनके बढ़ने की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।

10:12 AM: महंगाई रोकना मुख्य उद्देश्य

MPC का कहना है कि मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य महंगाई के दूसरे दौर के असर को रोकना है। इसका मतलब है कि अगर पेट्रोल, कच्चे माल या दूसरी चीजों की कीमत बढ़ती है, तो उसके कारण मजदूरी और बाकी सामान की कीमतें भी बढ़ने लग सकती हैं। RBI इस तरह की महंगाई को आगे फैलने से रोकना चाहता है।

10:11 AM: दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक बढ़ा सकते हैं ब्याज दर

दुनिया में महंगाई तेजी से बढ़ने की आशंका है। इसलिए दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं और अपनी मौद्रिक नीति को सख्त कर सकते हैं। मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट फिर से बढ़ने से अनिश्चितता बढ़ी है और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर असर पड़ा है।

10:04 AM: रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी

RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। इसमें 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। इससे यह 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गई है। RBI MPC ने पॉलिसी के रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है। महंगाई जून से ही 4% के ऊपरी टॉलरेंस लेवल से ऊपर बनी हुई है। SDF रेट को एडजस्ट करके 5.25 प्रतिशत कर दिया गया है, और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेंज और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया गया है।

10:00 AM: Sanjay Malhotra की स्पीच शुरू

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की स्पीच शुरू हो गई है। यहां स्पीच के लेटेस्ट अपडेट दिए जा रहे हैं।

09:30 AM: शेयर बाजार में गिरावट

RBI MPC की घोषणाओं से पहले शेयर बाजार में गिरावट नजर आ रही है। आज के कारोबार में BSE Sensex में करीब 400 अंकों की गिरावट नजर आई और यह 72,590.74 के स्तर तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Nifty 50 भी 156.05 अंक टूटकर 22,617.90 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा।

08:51 AM: आम लोगों पर क्या असर होगा?

ब्याज दर बढ़ने का असर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और महंगे उपभोक्ता सामान जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि लोगों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है और उनकी खरीदारी कम हो सकती है। दूसरी ओर, FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है। ब्याज दरों का माहौल ऊंचा रहने पर कुछ बैंक FD पर ज्यादा ब्याज दे सकते हैं। हालांकि, इसका फायदा बैंक और उसकी जमा दरों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

08:25 AM: घर खरीदने वालों पर क्या होगा असर?

अगर Repo Rate 5.50% होता है तो होम लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि एक मामूली दर बढ़ोतरी से घर खरीदने की मांग पर बड़ा असर जरूरी नहीं है। रेपो रेट बढ़ने से होम लोन की ब्याज दरें और EMI सीधे तौर पर इसलिए बढ़ सकती है क्योंकि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक (RBI) से पैसा उधार लेना महंगा हो जाता है। जब बैंकों की अपनी लागत बढ़ती है, तो वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देते हैं।

08:20 AM: क्या RBI इस बार ही बढ़ाएगा दर?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक RBI के सामने अभी दो विकल्प हैं। वह अक्टूबर में ही 25 bps की बढ़ोतरी कर सकता है या फिर दिसंबर तक इंतजार कर सकता है। एक्सपर्ट्स को लगता है कि अगर क्रूड महंगा बना रहता है, रुपये पर दबाव बढ़ता है और भारत-अमेरिका के बीच interest-rate differential और कम होता है, तो दरों में बढ़ोतरी को टालना महंगा पड़ सकता है।

08:04 AM: रुपये पर भी दबाव

भारतीय रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ी हैं और कई केंद्रीय बैंकों का रुख ब्याज दरों को लेकर सख्त हुआ है। ऐसे माहौल में RBI के लिए Repo Rate बढ़ाना रुपये को कुछ सहारा देने का एक तरीका हो सकता है। ब्याज दर बढ़ने से रुपये में निवेश करने वाली एसेट्स अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं।

08:00 AM: महंगाई और कच्चा तेल बढ़ा रहे चिंता

RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई है। अगस्त में कंज्यूमर इनफ्लेशन बढ़कर 4.82% हो गई, जो RBI के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से भारत के लिए इंपोर्टेड इनफ्लेशन का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा क्रूड देश के इंपोर्ट बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकता है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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