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4 min read | अपडेटेड July 31, 2026, 09:02 IST
सारांश
RBI का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और ब्याज दर निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आम जमाकर्ताओं के लिए वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग बैंक नई व्यवस्था के तहत अपनी ब्याज दरों में किस प्रकार के बदलाव करते हैं।

बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर एकसमान ब्याज देना होगाः आरबीआई (Photo: Shutterstock)
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को बैंकों से कहा कि वे एक ही दिन समान राशि जमा किए जाने पर सभी शाखाओं में एकसमान ब्याज दर दें और इस मामले में किसी भी तरह का भेदभाव न किया जाए। केंद्रीय बैंक के संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक, जमा (डिपॉजिट) पर दी जाने वाली ब्याज दरें (थोक जमा समेत) बैंकों की वेबसाइट पर पहले से घोषित दरों के अनुरूप ही होनी चाहिए। आरबीआई ने क्लियर किया कि किसी बैंक के लिए समान राशि की जमा, जो एक ही दिन स्वीकार की गई हो, उस पर अलग-अलग दरें देना स्वीकार्य नहीं होगा। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों को हर कारोबारी दिन सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर थोक जमा की ब्याज दरें सार्वजनिक करनी होंगी। हालांकि, इसमें अधिकतम 10 मिनट की छूट दी गई है। इसका मतलब है कि बैंकों को सुबह 10 बजकर 10 मिनट तक ब्याज दरें अपडेट करनी होंगी। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को तरलता कवरेज अनुपात (Liquidity Coverage Ratio, LCR) ढांचे के तहत थोक जमा पर अलग-अलग ब्याज दर देने की सीमित छूट भी दी है, बशर्ते यह अंतर वैध वित्तीय मानकों के आधार पर हो। आरबीआई ने कहा कि इस नियम को जून में जारी दिशानिर्देशों के मसौदे पर हितधारकों की प्रतिक्रिया के बाद अंतिम रूप दिया गया है।
RBI ने जून 2026 में इन संशोधनों का मसौदा जारी किया था और बैंकों, वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ आम लोगों से 20 जून 2026 तक सुझाव मांगे थे। जो सुझाव मिले, उनकी स्टडी करने के बाद केंद्रीय बैंक ने अंतिम संशोधन जारी किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य बैंकों को रुपये में बड़े डिपॉजिट की ब्याज दर तय करने में अधिक लचीलापन देना है, साथ ही सभी बैंकों में ब्याज दरों के खुलासे को अधिक पारदर्शी और एक समान बनाना है।
RBI के नए संशोधन केवल एक प्रकार के बैंक तक सीमित नहीं हैं। ये नीचे दिए गए सभी बैंकों पर लागू होंगे-
वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks)
स्मॉल फाइनेंस बैंक (Small Finance Banks)
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks)
पेमेंट बैंक (Payment Banks)
लोकल एरिया बैंक (Local Area Banks)
शहरी सहकारी बैंक (Urban Co-operative Banks)
इसका मतलब है कि देश के अधिकांश बैंकिंग संस्थानों को नए नियमों के अनुसार अपनी जमा योजनाओं और ब्याज दरों की नीति में आवश्यक बदलाव करने होंगे।
RBI के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है। बड़े डिपॉजिट पर ब्याज दर तय करने में बैंकों को अधिक स्वतंत्रता मिलने से वे बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बेहतर दरें तय कर सकेंगे। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि सभी ग्राहकों की जमा पर ब्याज दर तुरंत बढ़ जाएगी या घट जाएगी। प्रत्येक बैंक अपनी कारोबारी रणनीति, फंड की आवश्यकता और बाजार की स्थिति के आधार पर ब्याज दरें तय करेगा।
ब्याज दरों में अधिक लचीलापन मिलने से बैंक अपनी फंडिंग लागत को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगे। अगर किसी बैंक को अधिक फंड की जरूरत होगी तो वह बड़े जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें दे सकेगा। वहीं, एक्स्ट्रा कैश होने पर बैंक अपनी जमा दरों में आवश्यक बदलाव भी कर सकेंगे। इससे बैंकिंग सिस्टम में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है और संसाधनों का प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकता है।
RBI ने क्लियर किया है कि संशोधित Interest Rate on Deposits Amendment Directions, 2026 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। इससे पहले सभी संबंधित बैंकों को अपने आंतरिक नियमों, प्रक्रियाओं और ब्याज दरों की नीतियों को नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपडेट करना होगा।
RBI का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और ब्याज दर निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आम जमाकर्ताओं के लिए वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग बैंक नई व्यवस्था के तहत अपनी ब्याज दरों में किस प्रकार के बदलाव करते हैं। 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले ये नियम बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव साबित हो सकते हैं।
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