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  1. Income Tax Return: यूलिप से मिली रकम पर कैसे लगता है टैक्स? 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले समझें सही नियम

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Income Tax Return: यूलिप से मिली रकम पर कैसे लगता है टैक्स? 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले समझें सही नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड July 29, 2026, 13:30 IST

सारांश

यूलिप से हुई इनकम को आईटीआर में कहां और कैसे दिखाना है, यह आपकी पॉलिसी के प्रीमियम पर निर्भर करता है। अगर सभी यूलिप पॉलिसी का कुल सालाना प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो कमाई पर कैपिटल गेन्स के तहत टैक्स लगेगा।

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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय इन बातों का रखें ध्यान। | Image: Shutterstock

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की 31 जुलाई की आखिरी तारीख पास आ रही है। इस बीच कई टैक्सपेयर्स इस उलझन में हैं कि यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान यानी यूलिप से हुई कमाई को आईटीआर में दिखाना जरूरी है या नहीं, और इसे कहां दर्ज करना होगा। इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी यूलिप पॉलिसी टैक्स छूट के दायरे में आती है या नहीं। सही नियमों को समझकर आप टैक्स विभाग के नोटिस से बच सकते हैं।

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क्या है यूलिप और कब मिलती है टैक्स छूट?

यूलिप एक इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट है। इसमें आपके प्रीमियम का एक हिस्सा लाइफ कवर के लिए और बचा हुआ हिस्सा शेयर बाजार से जुड़े फंड्स में लगाया जाता है। सीए अभिषेक सोनी के अनुसार, यूलिप की कमाई को आईटीआर में दिखाने का तरीका उसकी टैक्स फ्री या टैक्स योग्य स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आपकी यूलिप मैच्योरिटी रकम सेक्शन 10(10D) के तहत टैक्स फ्री है, तो उसे शेड्यूल ईआई में दिखाना होता है। वहीं अगर यूलिप टैक्स योग्य है, तो उसकी कमाई को शेड्यूल कैपिटल गेन्स में दर्ज करना होता है। यह नियम 1 फरवरी 2021 या उसके बाद जारी उन पॉलिसियों पर लागू होता है, जिनका सालाना प्रीमियम तय सीमा से ज्यादा है। रिटर्न भरने से पहले अपने एआईएस, फॉर्म 26AS और टीडीएस सर्टिफिकेट की जांच जरूर कर लें।

गलत रिपोर्टिंग से आ सकता है नोटिस

किंग स्टब एंड कासिवा के पार्टनर विपिन उपाध्याय का कहना है कि करदाताओं को पहले यह तय कर लेना चाहिए कि उनकी पॉलिसी छूट के योग्य है या नहीं। जो पॉलिसियां तय शर्तों को पूरा नहीं करती हैं, वे टैक्स योग्य होती हैं और उन्हें सही इनकम हेड में दर्ज करना जरूरी है। प्रीमियम की सीमा, जारी होने की तारीख और इंश्योरेंस कंपनी के स्टेटमेंट की जांच करें। गलत जानकारी देने पर टैक्स अधिकारियों की ओर से पूछताछ या नोटिस आ सकता है।

समझें 2.5 लाख रुपये का नियम

गर्ग एंड गर्ग टैक्स एसोसिएट्स के एडवोकेट शौर्य गर्ग के अनुसार, ढाई लाख रुपये के सालाना प्रीमियम की सीमा सबसे अहम नियम है। अगर आपकी सभी यूलिप पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ढाई लाख रुपये के भीतर है, तो मैच्योरिटी रकम सेक्शन 10(10D) के तहत पूरी तरह टैक्स फ्री रहेगी। लेकिन अगर कुल प्रीमियम इस सीमा को पार करता है, तो छूट खत्म हो जाती है और कमाई पर सेक्शन 112A के तहत कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है।

एक साल से ज्यादा समय तक पॉलिसी रखने पर 12.5% की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा, जिसमें हर साल 1.25 लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री रहती है। वहीं एक साल के भीतर सरेंडर करने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स के तहत टैक्स स्लैब रेट से टैक्स लगेगा। कैपिटल गेन्स की रिपोर्टिंग आईटीआर-1 में नहीं की जा सकती, इसलिए आईटीआर-2 चुनना अनिवार्य है। ध्यान रहे कि ढाई लाख रुपये की सीमा आपकी सभी यूलिप पॉलिसियों का कुल मिलाकर प्रीमियम है।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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