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  1. दुर्गा पूजा से पहले ही पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 20% DA, सैलरी भी आएगी पहले

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दुर्गा पूजा से पहले ही पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 20% DA, सैलरी भी आएगी पहले

Upstox

2 min read | अपडेटेड July 29, 2026, 08:08 IST

सारांश

राज्य सरकार के कर्मचारियों को आमतौर पर हर महीने के अंतिम वर्किंग डे पर सैलरी मिलती है। अगर यह निर्णय लागू होता है, तो कर्मचारियों को इस साल अक्टूबर के मध्य में होने वाले दुर्गा पूजा उत्सव से काफी पहले सैलरी मिल जाएगी।

महंगाई भत्ता

प. बंगाल सरकार के कर्मचारियों को दुर्गापूजा से पहले मिलेगा 20 प्रतिशत महंगाई भत्ता (Photo: Shutterstock)

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक गुडन्यूज है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को दुर्गा पूजा से पहले 20% अतिरिक्त महंगाई भत्ता (डीए) और अक्टूबर महीने की सैलरी जारी की जाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते (डीए) के अंतर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दिन पहले गठित सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को अभी 6वें वेतन आयोग के तहत वेतन मिल रहा है। राज्य सरकार ने हाल ही में 7वें वेतन आयोग का गठन किया है, लेकिन इसकी सिफारिशें अभी लागू नहीं हुई हैं।

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पश्चिम बंगाल पुलिस मुख्यालय ‘भवानी भवन’ में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैंने वित्त सचिव और वित्त मंत्री से अक्टूबर की सैलरी दुर्गा पूजा से पहले जारी करने को कहा है। साथ ही, मैंने उन्हें पूजा वाले महीने में अतिरिक्त 20% महंगाई भत्ता जारी करने का निर्देश दिया है।’ राज्य सरकार के कर्मचारियों को आमतौर पर हर महीने के अंतिम वर्किंग डे पर सैलरी मिलती है। अगर यह निर्णय लागू होता है, तो कर्मचारियों को इस साल अक्टूबर के मध्य में होने वाले दुर्गा पूजा उत्सव से काफी पहले सैलरी मिल जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के बजट में की गई घोषणा के अनुसार, अतिरिक्त 20% महंगाई भत्ता अक्टूबर से प्रभावी होगा। उन्होंने कहा, ‘केंद्र और राज्य के बीच डीए में 42% का अंतर है। हम इस अंतर को रातोंरात खत्म नहीं कर सकते, इसमें समय लगेगा।’ केंद्र सरकार ने 2016 में 7वां वेतन आयोग लागू कर दिया था, जबकि पश्चिम बंगाल में छठे वेतन आयोग के तहत ही सैलरी मिलती रही। दरअसल पश्चिम बंगाल पर सार्वजनिक कर्ज काफी अधिक रहा है, राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान, सैलरी और पेंशन में खर्च होता रहा है, इसका असर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर भी पड़ा।

PTI इनपुट के साथ

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