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  1. ये रही लास्ट मिनट आईटीआर फाइलिंग की चेकलिस्ट, तुरंत कर लें नोट ताकि बाद में ना हो टेंशन

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ये रही लास्ट मिनट आईटीआर फाइलिंग की चेकलिस्ट, तुरंत कर लें नोट ताकि बाद में ना हो टेंशन

Upstox

4 min read | अपडेटेड July 28, 2026, 15:13 IST

सारांश

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सैलरीड और व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। AIS में गलत जानकारी, एफएंडओ ट्रेडिंग की गलत कैटेगरी चुनना और विदेशी संपत्तियों की सही जानकारी न देना भारी पड़ सकता है।

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आईटीआर फाइलिंग की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 नजदीक आ रही है, सही तरीके से रिटर्न दाखिल करें।| Image: Shutterstock

वित्त वर्ष 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना बिजनेस इनकम वाले सैलरीड और व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तेजी से नजदीक आ रही है। समय सीमा पास आते ही सही और सटीक फाइलिंग करना बेहद जरूरी हो जाता है। जल्दबाजी में की गई कोई भी छोटी सी गलती आपको भारी पेनल्टी और इनकम टैक्स विभाग के नोटिस की तरफ ढकेल सकती है। एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS में गलत जानकारी, F&O ट्रेडिंग की गलत कैटेगरी और विदेशी संपत्तियों का ब्योरा न देना टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। समय रहते AIS का अपने बैंक पासबुक और फॉर्म-16 के साथ मिलान करना टैक्सपेयर्स के हितों की रक्षा करता है।

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AIS के भरोसे न रहें और खुद के रिकॉर्ड से करें मिलान

इनकम टैक्स विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल टैक्सपेयर्स को AIS डाउनलोड करने की सुविधा देता है, जिसमें साल भर के वित्तीय लेनदेन और टीडीएस का ब्योरा होता है। हालांकि AIS पूरी तरह से गलतियों से मुक्त नहीं होता है। कई बार एक ही ट्रांजेक्शन दो अलग-अलग संस्थाओं की तरफ से दर्ज हो जाता है। जैसे म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश को ब्रोकर के साथ-साथ CAMS या केफिनटेक जैसी संस्थाएं भी रिपोर्ट कर देती हैं, जिससे डेटा दोहरा सकता है। ऐसे मामलों में टैक्सपेयर्स को AIS पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय सीएएमएस या केफिनटेक से मिले कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट पर ही भरोसा करना चाहिए।

इसके अलावा बचत खाते या एफडी के ब्याज जैसी छूट जाने वाली इनकम को भी आईटीआर में रिपोर्ट करना अनिवार्य है। जॉइंट प्रॉपर्टी बेचने के मामलों में अगर 40 लाख रुपये की प्रॉपर्टी बेची गई है, तो सिस्टम कभी-कभी पूरा 40 लाख रुपये आपके अकेले के पैन पर दिखा सकता है। इसे सुधारने के लिए पोर्टल पर फीडबैक ऑप्शन का उपयोग करके दूसरे को-ऑनर का पैन और उनका वास्तविक हिस्सा दर्ज करना जरूरी है।

शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस या इंट्रा-डे ट्रेडिंग करने वाले निवेशक अक्सर इसे कैपिटल गेन्स समझकर ITR-2 भर देते हैं, जो एक गंभीर गलती है। टैक्स नियमों के अनुसार एफएंडओ से हुई कमाई या नुकसान को बिजनेस इनकम माना जाता है और इसके लिए ITR-3 फॉर्म भरना जरूरी है। एफएंडओ ट्रेडर्स और ऑडिट वाले मामलों के लिए आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है।

ध्यान रहे कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न फाइलिंग पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत ही होगी। इसके अलावा टैक्स अधिकारियों को 2022, 2023 और 2024 के दौरान विदेशी एजेंसियों से वित्तीय डेटा मिला है। अगर आपका विदेश में कोई पुराना या बंद पड़ा बैंक खाता है, तो उसे भी शेड्यूल एफए में रिपोर्ट करना जरूरी है। दूसरी तरफ गिफ्ट सिटी के माध्यम से विदेशी फंडों में किए गए निवेश को विदेशी संपत्ति के रूप में दिखाना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसे घरेलू अधिकार क्षेत्र के तहत ही माना जाता है।

समय पर रिटर्न न भरने के नुकसान

समय पर सही आईटीआर दाखिल करने से आम नौकरीपेशा लोगों और निवेशकों को टैक्स रिफंड जल्दी मिलता है। अगर कोई 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन मिस कर देता है, तो उसे 5,000 रुपये तक की पेनल्टी देनी पड़ेगी, जबकि 5 लाख रुपये से कम आय वालों के लिए यह पेनल्टी 1,000 रुपये होगी। देरी से फाइलिंग करने वाले करदाता ओल्ड टैक्स रिजीम का चुनाव नहीं कर सकेंगे और उन्हें डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम में जाना होगा। इसके अलावा सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि आप चालू वर्ष के बिजनेस या कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे।

ध्यान रखने वाली बातें

टैक्सपेयर्स को हमेशा आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल से ही रिटर्न दाखिल करना चाहिए और किसी भी अनाधिकृत ऐप पर डेटा शेयर नहीं करना चाहिए। फॉर्म-16, बैंक पासबुक, 26AS और AIS के आंकड़ों का बारीकी से मिलान कर लें। AIS में गलती होने पर पोर्टल के फीडबैक ऑप्शन से तुरंत सूचित करें। अपने पासवर्ड, बैंक खाता विवरण जैसी जानकारियों को सुरक्षित रखें और 31 जुलाई 2026 से पहले रिटर्न जमा करके आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग से ई-वेरिफाई जरूर करें। समय सीमा की बात करें तो ITR-1 और ITR-2 के लिए 31 जुलाई 2026, बिना ऑडिट वाले ITR-3 और ITR-4 के लिए 31 अगस्त 2026, ऑडिट वाले मामलों के लिए 31 अक्टूबर 2026, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट वाले मामलों के लिए 30 नवंबर 2026, बिलेटेड रिटर्न के लिए 31 दिसंबर 2026, रिवाइज्ड रिटर्न के लिए 31 मार्च 2027 और अपडेटेड रिटर्न के लिए 31 मार्च 2031 की तारीख तय की गई है।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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