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ITR Filing Deadline: 31 जुलाई के बाद भरा आईटीआर तो 5,000 रुपये तक लगेंगे जुर्माना, जानें देरी करने के बड़े नुकसान

Upstox

3 min read | अपडेटेड July 28, 2026, 13:49 IST

सारांश

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। अगर करदाता समय पर अपना आईटीआर फाइल नहीं करते हैं, तो उन्हें 5,000 रुपये तक की लेट फीस भरनी पड़ सकती है। इसके अलावा बकाया टैक्स पर ब्याज, शेयर बाजार के नुकसान को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना और ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प खोने जैसे वित्तीय नुकसान भी उठाने पड़ेंगे।

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ITR लेट फाइल करने के क्या हैं नुकसान? | Image: Shutterstock.

इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई तय की गई है। अक्सर कई टैक्सपेयर्स को लगता है कि अगर वे समय पर अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए, तो बाद में थोड़ी सी लेट फीस या जुर्माना भरकर काम चला लेंगे। हालांकि हकीकत में ऐसा बिल्कुल नहीं है। 31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने का मतलब केवल जेब से जुर्माना भरना नहीं है, बल्कि इससे टैक्सपेयर्स को कई बड़े वित्तीय नुकसान झेलने पड़ सकते हैं। इसलिए अंतिम समय की तकनीकी गड़बड़ियों से बचने के लिए समय पर रिटर्न फाइल करना बेहद जरूरी माना जाता है।

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लेट फीस और जुर्माने की सीधी मार

अगर आप 31 जुलाई की तय समय सीमा के बाद यानी बिलेटेड रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आपको इनकम टैक्स के सेक्शन 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ती है। जिन टैक्सपेयर्स की कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें 5,000 रुपये तक की लेट फीस भरनी होगी। वहीं अगर किसी टैक्सपेयर की कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है, तो उसके लिए यह जुर्माना अधिकतम 1,000 रुपये रखा गया है। यह पेनल्टी आपके बिलेटेड रिटर्न फाइल करते वक्त लागू कर दी जाती है।

बकाया टैक्स पर लगेगा हर महीने ब्याज

डेडलाइन खत्म होने के बाद केवल लेट फीस ही नहीं लगती, बल्कि आपकी टैक्स लायबिलिटी पर ब्याज भी जुड़ने लगता है। अगर आपका कोई टैक्स बकाया बनता है और आप 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल करने में असमर्थ रहते हैं, तो सेक्शन 234A के तहत आपको हर महीने 1 पर्सेंट की दर से ब्याज देना होगा। यह ब्याज 1 अगस्त से कैलकुलेट होना शुरू हो जाता है और उस दिन तक जारी रहता है जिस दिन आप अपना आईटीआर सफलतापूर्वक फाइल करते हैं।

शेयर बाजार के नुकसान को नहीं कर पाएंगे कैरी फॉरवर्ड

31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने का एक और बहुत बड़ा नुकसान उन टैक्सपेयर्स और शेयर बाजार के कारोबारियों को होता है जिन्हें उस वित्त वर्ष में घाटा हुआ है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप शेयर बाजार में कैपिटल गेन्स, बिजनेस या प्रोफेशन में हुए अपने नुकसान को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकते हैं। समय पर रिटर्न न भरने से आप फ्यूचर में इस नुकसान के बदले टैक्स में मिलने वाली राहत गंवा बैठते हैं।

अगर आपका टीडीएस ज्यादा कट गया है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देरी से रिटर्न फाइल करने पर आपको देरी वाले महीनों के लिए सेक्शन 244A के तहत मिलने वाले रिफंड का ब्याज नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा नए नियमों के अनुसार न्यू टैक्स रिजीम अब डिफॉल्ट व्यवस्था बन चुकी है। ऐसे में अगर आप 31 जुलाई तक आईटीआर फाइल नहीं करते हैं, तो बिलेटेड रिटर्न भरते समय आप ओल्ड टैक्स रिजीम का चुनाव नहीं कर पाएंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आप 80C, 80D या एचआरए जैसी टैक्स छूट का फायदा उठाने का मौका पूरी तरह खो देंगे।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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