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4 min read | अपडेटेड September 16, 2026, 07:54 IST
सारांश
सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब 4% व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि ज्यादातर लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।

व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक यूपीआई भुगतान पर लगेगा 0.4 प्रतिशत शुल्क, 15 अक्टूबर से लागू (Photo: Shutterstock)
यूपीआई पेमेंट को लेकर 15 सितंबर को सरकार ने बड़ा ऐलान किया। सरकार ने 15 अक्टूबर से बड़े व्यापारी भुगतान के लिए यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा की। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से .4% शुल्क लिया जाएगा, जबकि 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। पेमेंट करने वाले ग्राहकों को यह शुल्क नहीं देना होगा और इसका बोझ दुकानदार या व्यापारी को उठाना पड़ेगा। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पी2पी (परसन टू परसन) यूपीआई पेमेंट पर किसी भी राशि के लिए कोई एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे।
सरकार के मुताबिक, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले कुल पी2एम (परसन टू मर्चेंट) ट्रांजैक्शन की मात्रा में 2,000 रुपये से कम राशि वाले लेनदेन 95% से भी अधिक हैं।
'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, 'यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम लेनदेन पर ही 0.4% की दर से लागू होगा। इससे मिलने वाला कमीशन बैंकों और ऐप प्रोवाइडर्स समेत पेमेंट सिस्टम के भागीदारों के बीच बांटा जाएगा।'
रेलवे, टेलिकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि कच्चा माल जैसे आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का एक समान शुल्क लगेगा। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सेवाओं की लागत को विश्वसनीय बनाए रखना है। इन श्रेणियों की हिस्सेदारी पी2एम लेनदेन की मात्रा में करीब 17%, जबकि लेनदेन के मूल्य में लगभग 46% है।
यही समान शुल्क व्यवस्था सरकारी उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी और पाइप वाली गैस) के भुगतान और स्कूल फीस और विश्वविद्यालय शुल्क जैसे शैक्षणिक भुगतान पर भी लागू होगी। हालांकि 2,000 रुपये तक के ऐसे भुगतान इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर और डीलर के जरिये किए जाने वाले भुगतान पर 0.02% एमडीआर लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। सरकार ने कहा कि यूपीआई ऐप प्रोवाइडर्स को डिजिटल प्लैटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि व्यापारी इस नए शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
इसके अलावा, व्यक्तिगत यूपीआई लेनदेन के लिए कोई मासिक कोटा या मुफ्त लेनदेन की संख्या पर सीमा नहीं होगी। यूपीआई क्यूआर कोड के जरिये हर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत शून्य एमडीआर का लाभ लेते रहेंगे। अगर कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का मासिक लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य पी2एम कैटेगरी में रखा जाएगा।
सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब 4% व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि ज्यादातर लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।
नई एमडीआर व्यवस्था केवल प्रत्यक्ष उपयोगकर्ता के बैंक खाते से व्यापारी के खाते में होने वाले यूपीआई भुगतान पर लागू होगी। यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड या पहले से मंजूर ‘क्रेडिट लाइन’ के जरिये होने वाले भुगतान अलग नियमों के तहत आएंगे। वहीं, यूटिलिटी बिल, ओटीटी सब्सक्रिप्शन और नियमित निवेश के लिए यूपीआई निर्देश या ऑटोपे जैसे ऑटोमेटेड रिकरिंग भुगतान पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा।
शून्य एमडीआर व्यवस्था जनवरी, 2020 से लागू थी और इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था। हालांकि, बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां इसे टिकाऊ नहीं बताते हुए शुल्क फिर से लागू करने की लंबे समय से मांग कर रही थीं। भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भी पहले सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह कर चुके हैं।
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