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  1. पेंशन सखियां कौन हैं, कैसे घर-घर पहुंचाएंगी पेंशन सुरक्षा, रूरल इंडिया की बदलेगी तस्वीर

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पेंशन सखियां कौन हैं, कैसे घर-घर पहुंचाएंगी पेंशन सुरक्षा, रूरल इंडिया की बदलेगी तस्वीर

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड September 15, 2026, 13:59 IST

सारांश

इस पहल का उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की संस्थागत संरचना की शक्ति का उपयोग करके पेंशन कवरेज में एक मूलभूत चुनौती का समाधान निकालते हुए उन परिवारों तक पहुंचना जिनकी औपचारिक वित्तीय सलाह और सेवानिवृत्ति योजना सेवाओं तक सीमित पहुंच हो सकती है।

पेंशन

पेंशन सखियां घर-घर पहुंचाएंगी पेंशन सुरक्षा (Photo: Shutterstock)

ग्रामीण परिवारों में पेंशन जागरूकता और रिटायरमेंट सिक्योरिटी पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास विभाग (Department of Rural Development, DoRD) और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory and Development Authority, PFRDA) ने संपूर्ण ग्रामीण भारत में 'पेंशन सखियों' के कम्युनिटी-बेस्ड संपर्क तंत्र के निर्माण और समर्थन के लिए आज एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन किए। इस समझौता ज्ञापन पर ग्रामीण विकास विभाग के जॉइंट सेक्रेटरी अमित शुक्ल और PFRDA की एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुमीत कौर कपूर ने ग्रामीण विकास विभाग सेक्रेटरी रोहित कंसल की उपस्थिति में साइन किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) के अंतर्गत निर्मित व्यापक सामुदायिक संस्थागत नेटवर्क का लाभ उठाना है, जिसमें इसकी बैंकिंग संवाददाता सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति शामिल हैं, ताकि पेंशन जागरूकता, वित्तीय साक्षरता, नामांकन और नामांकन के बाद सहायता को ग्रामीण परिवारों के करीब लाया जा सके।

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इस पहल का उद्देश्य महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की संस्थागत संरचना की शक्ति का उपयोग करके पेंशन कवरेज में एक मूलभूत चुनौती का समाधान निकालते हुए उन परिवारों तक पहुंचना जिनकी औपचारिक वित्तीय सलाह और सेवानिवृत्ति योजना सेवाओं तक सीमित पहुंच हो सकती है। इस साझेदारी के अंतर्गत, पेंशन सखियां विश्वसनीय सामुदायिक स्तर के सूत्रधार के रूप में कार्य करेंगी, खास तौर से एसएचजी सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण प्रतिभागियों तक पहुंचेंगी। वे परिवारों को पेंशन और सेवानिवृत्ति योजना संबंधी जानकारी प्रदान करेंगी, नामांकन में सहायता करेंगी और पेंशन संबंधी सेवाओं को समझने में सहायता प्रदान करेंगी।

कंसल ने कहा कि पेंशन के प्रति जागरूकता और वित्तीय साक्षरता ईमानदारी, पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि ग्रामीण नागरिकों को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें। ममता शंकर ने बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलते जनसांख्यिकीय पैटर्न के बारे में सेवानिवृत्ति नियोजन के महत्व पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए आशा जताई कि यह साझेदारी औपचारिक सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा तंत्र से बाहर रहने वाले ग्रामीण परिवारों के बीच राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) सहित पेंशन उत्पादों के बारे में जागरूकता और उन्हें अपनाने में उल्लेखनीय सुधार लाएगी। इस सहयोग से डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल और वेब आधारित समाधानों के माध्यम से पहुंच और नामांकन की निगरानी को भी मजबूती मिलेगी, जिसमें विभाग की अपनी लोकोस प्रणाली भी शामिल है।

भारत के ग्रामीण परिवार औपचारिक वित्तीय प्रणालियों में अधिकाधिक रूप से भाग ले रहे हैं, लेकिन बैंकिंग तक पहुंच का मतलब यह नहीं है कि सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त योजना भी बन जाए। कृषि, अनौपचारिक रोजगार और लघु उद्यमों पर निर्भर कई परिवारों की आय अनियमित होती है और आर्थिक झटकों से प्रभावित हो सकती है। इसलिए, जागरूकता बढ़ाना और समय रहते, सोच-समझकर पेंशन योजनाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना परिवारों की वित्तीय मजबूती का एक महत्वपूर्ण घटक बन सकता है। यह पहल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच से आगे बढ़कर सोच-समझकर भागीदारी, दीर्घकालिक बचत और वित्तीय मजबूती की ओर ग्रामीण वित्तीय समावेशन के एजेंडे में एक व्यापक बदलाव लाने में योगदान देगी।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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