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  1. ₹5000 UPI पेमेंट पर ₹20 की फीस: किसकी जेब से जाएगा पैसा और कैसे बंटेगा? समझिए पूरा हिसाब

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₹5000 UPI पेमेंट पर ₹20 की फीस: किसकी जेब से जाएगा पैसा और कैसे बंटेगा? समझिए पूरा हिसाब

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड September 16, 2026, 14:29 IST

सारांश

UPI पर कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर अब मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा। इसका मतलब है कि ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI पेमेंट पर मर्चेंट से 0.4% फीस ली जाएगी। हालांकि, यह फीस ग्राहक से नहीं ली जा सकती।

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UPI पर कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर अब मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा।

UPI पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब ₹2000 से ज्यादा के कुछ चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। हालांकि, यह चार्ज ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। इस फीस से मिलने वाली रकम UPI सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों, जैसे बैंक, UPI ऐप और UPI Fund के बीच बांटी जाएगी।

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UPI MDR क्या है?

UPI पर कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर अब मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा। इसका मतलब है कि ₹2,000 से ज्यादा के कुछ UPI पेमेंट पर मर्चेंट से 0.4% फीस ली जाएगी। हालांकि, यह फीस ग्राहक से नहीं ली जा सकती। ₹75000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

₹5000 के पेमेंट पर कितना MDR?

मान लीजिए कोई ग्राहक UPI के जरिए किसी मर्चेंट को ₹5000 का पेमेंट करता है। 0.4% MDR के हिसाब से इस ट्रांजैक्शन पर ₹20 की फीस बनेगी। इस ₹20 को UPI सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा। इसमें ₹1 यानी कुल MDR का 5% UPI Fund में जाएगा। बाकी ₹19 को ग्राहक का बैंक, मर्चेंट का बैंक, UPI ऐप और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच बांटा जाएगा।

किसे कितना पैसा मिलेगा?

इस उदाहरण में ग्राहक का बैंक यानी Issuing Bank ₹7.60 पाएगा। यह वही बैंक है, जहां ग्राहक का अकाउंट है और जहां से पैसे कटते हैं। मर्चेंट का बैंक यानी Acquiring Bank को ₹5.70 मिलेंगे। यह बैंक मर्चेंट की तरफ से पेमेंट हासिल करता है।

जिस UPI ऐप के जरिए ग्राहक पेमेंट करता है, जैसे Google Pay, PhonePe या Paytm, उसे चलाने वाली TPAP/App Provider को ₹3.80 मिलेंगे। वहीं Payer PSP यानी UPI ऐप के साथ काम करने वाले पार्टनर बैंक को ₹1.90 मिलेगा। बाकी ₹1 UPI Fund में जाएगा।

MDR क्यों लगाया गया है?

NPCI के मुताबिक, इस MDR से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल UPI सिस्टम को मजबूत बनाने, साइबर सिक्योरिटी, नई तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और कस्टमर सर्विस में निवेश के लिए किया जाएगा। UPI पर हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं, इसलिए इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत रखना जरूरी है। हालांकि, यह चार्ज हर UPI पेमेंट पर लागू नहीं होगा। Person-to-Person यानी P2P पेमेंट पहले की तरह फ्री रहेंगे। वहीं ₹2000 तक के योग्य P2M पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा।

कुछ सेक्टर को मिलेगी राहत

₹2000 से ज्यादा के कुछ पेमेंट पर सामान्य 0.4% MDR के बजाय फ्लैट फीस लागू होगी। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे सेक्टर में ₹5 की फ्लैट MDR तय की गई है। पब्लिक यूटिलिटी पेमेंट और एजुकेशन फीस कलेक्शन के लिए भी अलग फ्लैट-फीस स्ट्रक्चर रखा गया है।

ग्राहक पर क्या असर होगा?

ग्राहक के लिए सबसे अहम बात यह है कि उसे UPI पेमेंट करने के लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। MDR मर्चेंट-साइड की फीस है और इसके पैसे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है। यानी ₹5000 के उदाहरण में ग्राहक ₹5000 ही देगा, जबकि मर्चेंट की तरफ से बनने वाली ₹20 MDR फीस UPI सिस्टम के अलग-अलग हिस्सेदारों में बांटी जाएगी।

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