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4 min read | अपडेटेड September 15, 2026, 16:53 IST
सारांश
Money Mule Account ऐसे बैंक अकाउंट को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल ठगी या गैरकानूनी तरीके से मिले पैसे को आगे भेजने के लिए किया जाता है। RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक, बैंक के सिस्टम में ₹1,000 या उससे ज्यादा का कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध दिखता है, तो उसे संदिग्ध Money Mule ट्रांजेक्शन माना जा सकता है।

अकाउंट पर डेबिट होल्ड लगने के बाद ग्राहक को अपनी बात रखने के लिए 20 दिन मिलेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने साइबर फ्रॉड और Money Mule Accounts को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत अगर बैंक को किसी अकाउंट या ट्रांजैक्शन पर फ्रॉड का शक होता है, तो वह उस अकाउंट या उसमें मौजूद संदिग्ध रकम पर अस्थायी रूप से डेबिट होल्ड लगा सकता है। हालांकि, अगर पुलिस या किसी सक्षम एजेंसी की तरफ से अलग निर्देश नहीं आता है, तो यह होल्ड अधिकतम 60 दिन तक ही रखा जा सकेगा।
Money Mule Account ऐसे बैंक अकाउंट को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल ठगी या गैरकानूनी तरीके से मिले पैसे को आगे भेजने के लिए किया जाता है। RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक, बैंक के सिस्टम में ₹1,000 या उससे ज्यादा का कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध दिखता है, तो उसे संदिग्ध Money Mule ट्रांजेक्शन माना जा सकता है।
बैंक इसके लिए अपने ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करेंगे। इनमें AI और मशीन लर्निंग वाले टूल भी शामिल हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के अकाउंट में उसकी सामान्य कमाई या प्रोफाइल के मुकाबले अचानक बहुत बड़ा या अजीब ट्रांजैक्शन होता है, तो बैंक उसे फ्लैग कर सकता है। इसी तरह, अगर ट्रांजैक्शन पहले से फ्रॉड या Money Mule के तौर पर रिपोर्ट किए गए अकाउंट से जुड़ा है, तो भी उस पर शक किया जा सकता है।
जैसे ही बैंक को किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या अकाउंट का पता चलेगा, वह तुरंत उस रकम पर Debit Hold लगा सकेगा। अगर पूरा अकाउंट ही संदिग्ध लगता है, तो पूरे अकाउंट पर भी होल्ड लगाया जा सकता है।
बैंक को ग्राहक को भी इसकी जानकारी देनी होगी। अगर ग्राहक का मोबाइल नंबर या ईमेल बैंक के पास है, तो डिजिटल तरीके से तुरंत सूचना दी जाएगी। अगर डाक या किसी दूसरे फिजिकल तरीके से जानकारी दी जाती है, तो अगले दिन के अंत तक नोटिस भेजना होगा।
होल्ड लगने के बाद ग्राहक को अपनी बात रखने के लिए 20 दिन मिलेंगे। वह बैंक को बता सकता है कि ट्रांजैक्शन या अकाउंट गलत तरीके से संदिग्ध माना गया है और वह असली है। अगर ग्राहक सफाई देता है, तो बैंक को उसके जवाब मिलने के 10 दिन के अंदर फैसला करना होगा। अगर बैंक को जवाब सही लगता है, तो होल्ड तुरंत हटा दिया जाएगा। अगर ग्राहक कोई जवाब नहीं देता है, तो बैंक को होल्ड लगने की तारीख से 30 दिन के अंदर फैसला लेना होगा। अगर बैंक होल्ड जारी रखने का फैसला करता है, तो मामला संबंधित पुलिस अथॉरिटी को भेजा जाएगा।
अगर पुलिस या किसी दूसरी सक्षम एजेंसी की तरफ से होल्ड जारी रखने का कोई खास निर्देश नहीं आता है, तो बैंक को एजेंसी को मामला भेजने के 31वें दिन होल्ड हटाना होगा। इस तरह शुरुआत से गिनने पर अस्थायी रुप से डेबिट होल्ड की अधिकतम अवधि 60 दिन होगी।
RBI के ड्राफ्ट में Debit Card को अलग से ब्लॉक करने का कोई नया नियम नहीं है। नियम सीधे बैंक अकाउंट या किसी रकम पर Debit Hold लगाने से जुड़े हैं। हालांकि, अगर पूरे अकाउंट पर होल्ड लगाया जाता है, तो उस अकाउंट से जुड़े डेबिट कार्ड ट्रांजेक्शन भी प्रभावित हो सकते हैं। RBI ने कहा है कि पूरे अकाउंट पर Debit Hold लगाना आखिरी विकल्प होना चाहिए और इसे सिर्फ खास परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। बैंकों को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे सही ग्राहकों के अकाउंट या ट्रांजैक्शन गलती से ब्लॉक न हों।
नए प्रस्ताव से बैंकों की Suspicious Transaction Report यानी STR दाखिल करने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। अगर कोई अकाउंट Money Mule साबित होता है, तो बैंक को फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) को इसकी रिपोर्ट करनी होगी।
बैंकों को ऐसे सभी Temporary Debit Holds का रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसमें होल्ड लगाने की वजह, ग्राहक से हुई बातचीत और पुलिस या दूसरी एजेंसी को भेजी गई जानकारी शामिल होगी। इन रिकॉर्ड को कम से कम 5 साल तक रखना होगा। अकाउंट बंद होने के बाद भी इन्हें कम से कम 10 साल तक सुरक्षित रखना होगा। RBI ने प्रस्ताव दिया है कि ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाएं। हालांकि, कोई बैंक चाहे तो इससे पहले भी इस व्यवस्था को लागू कर सकता है।
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