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3 min read | अपडेटेड August 14, 2026, 16:37 IST
सारांश
सोवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज III के निवेशकों के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का मौका आज 14 अगस्त से खुल गया है। आरबीआई ने इसके लिए रिडेम्पशन प्राइस 15,310 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। सात साल में इस बॉन्ड ने निवेशकों को 343.9 पर्सेंट का शानदार रिटर्न दिया है।

SGB 2019-20 सीरीज III के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर मिला बंपर रिटर्न, जानिए टैक्स के नए नियम।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने सोवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज III के निवेशकों के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की सुविधा आज यानी 14 अगस्त 2026 से शुरू कर दी है। जिन निवेशकों ने सात साल पहले इस सीरीज में पैसा लगाया था, उन्हें अब प्रीमैच्योर रिडेम्पशन के जरिए बंपर मुनाफा कमाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। आरबीआई ने इस सीरीज के लिए रिडेम्पशन प्राइस 15,310 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। यह कीमत उन निवेशकों के लिए इश्यू प्राइस 3,449 रुपये प्रति ग्राम से कहीं ज्यादा है, जिन्होंने उस समय ऑनलाइन मोड से आवेदन किया था।
यह सीरीज 14 अगस्त 2019 को जारी की गई थी, जिसके चलते आज इसका होल्डिंग पीरियड सात साल पूरा हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट मिली थी, जिससे उनके लिए प्रभावी इश्यू प्राइस 3,449 रुपये प्रति ग्राम था। आज 15,310 रुपये प्रति यूनिट के रिडेम्पशन प्राइस पर निवेशकों को प्रति यूनिट 11,861 रुपये का सीधा फायदा हो रहा है। यह शुरुआती निवेश पर बिना ब्याज को जोड़े करीब 343.9 पर्सेंट का शानदार रिटर्न है। अगर किसी निवेशक ने ऑनलाइन इश्यू प्राइस पर 1 लाख रुपये लगाए थे, तो उन्हें लगभग 28.99 यूनिट मिले थे। आज उन यूनिट्स की वैल्यू बढ़कर करीब 4.44 लाख रुपये हो चुकी है।
सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में मिलने वाला यह तगड़ा रिटर्न सिर्फ सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण ही नहीं है। इसके अलावा निवेशकों को मूल निवेश पर 2.5 पर्सेंट का सालाना ब्याज भी दिया गया है, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाता था। सोने के दाम में हुई बढ़ोतरी से मिला सालाना रिटर्न करीब 23.7 पर्सेंट बैठता है। आरबीआई के नियमों के अनुसार SGB की कुल मैच्योरिटी अवधि आठ साल की होती है, लेकिन पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर निवेशकों को प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का विकल्प दिया जाता है। जिन लोगों ने 3,499 रुपये के ऑफलाइन रेट पर खरीदा था, उन्हें भी तगड़ा फायदा मिला है।
SGB के नियमों के मुताबिक रिडेम्पशन प्राइस का निर्धारण इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर होता है। रिडेम्पशन की तारीख से ठीक पहले के तीन वर्किंग डेज के क्लोजिंग प्राइस के सिंपल एवरेज को निकालकर ही आरबीआई रिडेम्पशन प्राइस तय करता है। इसी फार्मूले के तहत इस बार 15,310 रुपये प्रति यूनिट का रेट तय हुआ है।
इस शानदार रिटर्न के बीच निवेशकों को टैक्स के नए नियमों पर भी ध्यान देना होगा। 1 अप्रैल 2026 से SGB के रिडेम्पशन पर मिलने वाली कैपिटल गेन्स टैक्स छूट के नियमों में बदलाव किया गया है। वित्त विधेयक 2026 और बजट 2026 के स्पष्टीकरण के अनुसार, टैक्स छूट का फायदा सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगा जो बॉन्ड को उसकी पूरी मैच्योरिटी यानी आठ साल तक होल्ड करके रखते हैं। अगर कोई निवेशक पांच साल के लॉक-इन पीरियड के बाद भी समय से पहले यानी प्रीमैच्योर रिडेम्पशन का रास्ता चुनता है, तो उसे कैपिटल गेन्स टैक्स की छूट नहीं मिलेगी। इसलिए आज पैसा निकालने से पहले टैक्स देनदारी को समझना बेहद जरूरी है।
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