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5 min read | अपडेटेड September 03, 2026, 18:52 IST
सारांश
नए प्रस्ताव में PoP के काम करने के दो तरीके होंगे। इनमें फिजिकल और डिजिटल मोड शामिल हैं। फिजिकल मोड में ग्राहक शाखा या ऑफिस जाकर NPS से जुड़ी सेवाएं ले सकेंगे। वहीं डिजिटल मोड में NPS अकाउंट खोलने से लेकर योगदान जमा करने और दूसरी सेवाएं लेने तक का काम ऑनलाइन होगा।

PFRDA ने PoP के आवेदन की प्रक्रिया के लिए समय भी तय करने का प्रस्ताव रखा है।
पेंशन नियामक PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े Point of Presence यानी PoP के नियम बदलने का प्रस्ताव रखा है। PoP वे संस्थाएं होती हैं, जिनके जरिए लोग NPS अकाउंट खोलते हैं और बाद में उससे जुड़ी सेवाएं लेते हैं। PFRDA ने 2 सितंबर 2026 को PoP से जुड़े नियमों में बदलाव का एक्सपोजर ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मकसद NPS की पहुंच ज्यादा लोगों तक बढ़ाना है। खासकर छोटे शहरों और उन इलाकों में जहां अभी NPS की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इस प्रस्ताव पर लोग और संस्थाएं 2 अक्टूबर 2026 तक सुझाव दे सकते हैं। इसलिए अभी ये बदलाव अंतिम नहीं हैं।
नए प्रस्ताव में PoP के काम करने के दो तरीके होंगे। इनमें फिजिकल और डिजिटल मोड शामिल हैं। फिजिकल मोड में ग्राहक शाखा या ऑफिस जाकर NPS से जुड़ी सेवाएं ले सकेंगे। वहीं डिजिटल मोड में NPS अकाउंट खोलने से लेकर योगदान जमा करने और दूसरी सेवाएं लेने तक का काम ऑनलाइन होगा। अगर कोई PoP ऑनलाइन के साथ-साथ फिजिकल तरीके से भी सेवाएं देता है, तो उसे फिजिकल मोड वाला PoP माना जाएगा।
फिजिकल मोड में PoP बनने के लिए आवेदन फीस ₹10,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने का प्रस्ताव है। इसके ऊपर लागू टैक्स भी देना होगा। वहीं डिजिटल मोड में PoP बनने के लिए कोई आवेदन फीस नहीं होगी। APY से जुड़े आवेदकों के लिए आवेदन फीस में छूट भी जारी रहेगी।
PFRDA ने PoP के आवेदन की प्रक्रिया के लिए समय भी तय करने का प्रस्ताव रखा है। आवेदन मिलने के बाद उसकी जानकारी 7 दिन में दी जाएगी। अगर आवेदन में कोई कमी होगी तो इसकी जानकारी 14 दिन के भीतर दी जाएगी। पूरी जानकारी मिलने के बाद आवेदन पर 30 दिन के अंदर फैसला करने का प्रस्ताव है।
PFRDA ने PoP बनने के लिए पात्र संस्थाओं की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत LLP, को-ऑपरेटिव सोसायटी, सोसायटी, एसोसिएशन और ट्रस्ट जैसी संस्थाएं भी PoP बन सकती हैं। इसका फायदा NPS ग्राहकों को हो सकता है। उन्हें NPS अकाउंट खोलने और सेवाएं लेने के लिए ज्यादा विकल्प मिलेंगे। खासकर छोटे शहरों और कम सुविधाओं वाले इलाकों में NPS की पहुंच बढ़ सकती है।
फिजिकल मोड में NPS सेवाएं देने वाले PoP के पास भारत में कम से कम 5 शाखाएं या ऑफिस होने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही PoP के पास जरूरी टेक्नोलॉजी, पर्याप्त वित्तीय क्षमता और सही गवर्नेंस सिस्टम भी होना चाहिए। कुछ मामलों में PFRDA को शाखाओं और नेटवर्थ से जुड़ी शर्तों में छूट देने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।
PFRDA ने ‘Pension Agent’ का नाम बदलकर ‘NPS Mitra’ करने का प्रस्ताव रखा है। NPS Mitra ग्राहकों को NPS अकाउंट खोलने, फॉर्म भरने, KYC दस्तावेज जमा करने और दूसरी सर्विस रिक्वेस्ट में मदद कर सकेगा। लेकिन NPS Mitra की नियुक्ति के बाद भी उसकी जिम्मेदारी से PoP मुक्त नहीं होगा। NPS Mitra के काम की निगरानी PoP को करनी होगी।
अगर PoP या उसके NPS Mitra की लापरवाही या धोखाधड़ी के कारण ग्राहक को नुकसान होता है और यह साबित हो जाता है, तो PoP को ग्राहक के नुकसान की भरपाई करनी होगी। यानी PoP किसी NPS Mitra को नियुक्त करके अपनी जिम्मेदारी उससे अलग नहीं कर सकता।
PoP और NPS Mitra को ग्राहकों की जानकारी और रिकॉर्ड को गोपनीय रखना होगा। ग्राहक की जानकारी बिना PFRDA की अनुमति के किसी के साथ साझा नहीं की जा सकेगी, सिवाय उन मामलों के जहां कानून के तहत जानकारी देना जरूरी हो।
NPS Mitra ग्राहक से अपनी मर्जी से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेगा। वह केवल वही शुल्क ले सकेगा, जिसकी PFRDA ने अनुमति दी हो। वह ग्राहक को NPS रजिस्ट्रेशन, KYC, सर्विस रिक्वेस्ट और योगदान जमा करने जैसे कामों में मदद कर सकेगा। जो PoP डिजिटल तरीके से NPS सेवाएं देंगे, उन्हें हर पेंशन स्कीम के लिए अलग डिजिटल कलेक्शन अकाउंट रखना होगा। इसमें डिजिटल माध्यम से आने वाला NPS योगदान जमा किया जाएगा।
मौजूदा PoP Sub-Entities (PoP-SE) को नए नियमों के तहत 90 दिनों के अंदर NPS Mitra के रूप में काम करने का विकल्प दिया जा सकता है। जो PoP-SE NPS Mitra नहीं बनना चाहते, उन्हें अपना काम बंद करके रजिस्ट्रेशन सरेंडर करना होगा। इस दौरान ग्राहकों की सेवाएं जारी रखने की जिम्मेदारी संबंधित PoP की होगी।
अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो NPS ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव ज्यादा पहुंच और ज्यादा डिजिटल सुविधा के रूप में देखने को मिल सकता है। ज्यादा संस्थाओं को PoP बनने का मौका मिलने से NPS की सेवाएं छोटे शहरों और दूसरे कम सेवा वाले इलाकों तक पहुंच सकती हैं। वहीं डिजिटल मोड से ऑनलाइन NPS सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, NPS Mitra की निगरानी की जिम्मेदारी PoP पर रखने और ग्राहक के नुकसान की स्थिति में PoP को जिम्मेदार बनाने से ग्राहकों के हितों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।
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