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4 min read | अपडेटेड September 03, 2026, 17:42 IST
सारांश
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने 29 अक्टूबर 2025 को NPS e-Shramik मॉडल लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य Zomato, Swiggy, Ola, Uber और Urban Company जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स, ड्राइवर्स और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स को रिटायरमेंट सेविंग्स के दायरे में लाना है।

e-Shramik मॉडल में NPS में योगदान वर्कर, प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर या दोनों की तरफ से हो सकता है।
भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स अब NPS e-Shramik मॉडल के जरिए रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा कर सकते हैं। इस मॉडल में सबसे खास बात यह है कि वर्कर्स पर हर महीने एक तय रकम जमा करने की बाध्यता नहीं है। उनकी कमाई जैसी होती है, वे उसी हिसाब से योगदान कर सकते हैं। NPS e-Shramik गिग वर्कर्स को रिटायरमेंट के लिए नियमित रूप से पैसा जमा करने का विकल्प देता है। यहां हम समझेंगे कि एक गिग वर्कर NPS e-Shramik की मदद से कैसे अपना रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकता है।
बता दें कि पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने 29 अक्टूबर 2025 को NPS e-Shramik मॉडल लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य Zomato, Swiggy, Ola, Uber और Urban Company जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स, ड्राइवर्स और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स को रिटायरमेंट सेविंग्स के दायरे में लाना है।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स अब मात्र ₹99 की न्यूनतम राशि से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अपना योगदान शुरू कर सकते हैं। हालांकि, ₹99 को रेगुलेटर की ओर से तय अनिवार्य न्यूनतम योगदान नहीं समझना चाहिए। यह केवल एक उदाहरण है। वास्तविक योगदान की शर्तें वर्कर और प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर के बीच तय हो सकती हैं।
बता दें कि हाल ही में सरकार ने प्लेटफॉर्म सर्विस पार्टनर्स के लिए "NPS ई-श्रमिक मॉडल" के तहत प्रोत्साहन राशि को अगले वित्त वर्ष (2026-27) तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके तहत प्रति नए खाते के पंजीकरण पर अधिकतम ₹100 का प्रोत्साहन दिया जाता है।
गिग वर्कर्स अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के ऐप के जरिए NPS में रजिस्टर कर सकते हैं, अगर उनके प्लेटफॉर्म पर यह सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा Points of Presence (PoPs) और Central Recordkeeping Agencies (CRAs) के जरिए भी डिजिटल रजिस्ट्रेशन और KYC की सुविधा मिलती है।
NPS में जुड़ने के बाद वर्कर को PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) मिलता है। यह अकाउंट व्यक्ति के नाम पर होता है, किसी खास कंपनी या प्लेटफॉर्म से जुड़ा नहीं होता। इसलिए प्लेटफॉर्म बदलने पर भी NPS अकाउंट जारी रहता है। वहीं, फ्रीलांसर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोग All Citizen Model के जरिए NPS ले सकते हैं।
e-Shramik मॉडल में NPS में योगदान वर्कर, प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर या दोनों की तरफ से हो सकता है। हालांकि, प्लेटफॉर्म की ओर से योगदान उसकी अपनी पॉलिसी पर निर्भर करेगा। NPS Tier-I अकाउंट में छोटी रकम से भी शुरुआत की जा सकती है। इसमें निवेश की कोई तय अधिकतम सीमा नहीं है।
गिग वर्कर्स के लिए NPS की एक खास बात यह है कि हर महीने एक ही रकम जमा करना जरूरी नहीं है। कमाई ज्यादा होने पर ज्यादा और कम होने पर कम योगदान किया जा सकता है। वर्कर अपनी कमाई का एक तय प्रतिशत, जैसे 10% NPS में डालने का तरीका अपना सकता है। हालांकि, Tier-I अकाउंट को लंबे समय तक बिना योगदान के नहीं छोड़ा जा सकता। कम से कम 365 दिनों में एक योगदान करना जरूरी है, वरना अकाउंट निष्क्रिय हो सकता है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले पात्र निवेशक Section 80CCD(1) के तहत तय सीमा तक NPS योगदान पर टैक्स डिडक्शन ले सकते हैं। इसके अलावा सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50000 तक अतिरिक्त डिडक्शन का प्रावधान है। नई टैक्स व्यवस्था में व्यक्तिगत NPS योगदान का टैक्स ट्रीटमेंट अलग है। इसलिए लाभ टैक्स रिजीम और पात्रता पर निर्भर करेगा।
NPS का उद्देश्य लंबे समय के लिए रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करना है। मौजूदा नियमों के अनुसार 60 साल की उम्र में 80% तक रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है, जबकि कम से कम 20% रकम से एन्युटी खरीदनी होती है। इससे नियमित पेंशन जैसी आय मिलती है। एन्युटी से मिलने वाली आय लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है। ₹8 लाख से कम कॉर्पस होने पर पूरी रकम एकमुश्त निकालने का विकल्प बताया गया है।
गिग वर्कर्स को NPS के साथ कम से कम 6 महीने के जरूरी खर्च जितना इमरजेंसी फंड भी रखना चाहिए। PPF जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश और इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे लंबी अवधि के विकल्पों को भी जरूरत के हिसाब से शामिल किया जा सकता है। सही निवेश मिश्रण उम्र, कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
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