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  1. ITR Filing: अब तक 7 करोड़ से ज्यादा रिटर्न फाइल, 31 अगस्त की डेडलाइन करीब, न करें ये गलतियां

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ITR Filing: अब तक 7 करोड़ से ज्यादा रिटर्न फाइल, 31 अगस्त की डेडलाइन करीब, न करें ये गलतियां

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड August 28, 2026, 14:26 IST

सारांश

नौकरीपेशा लोगों के लिए ITR भरना अपेक्षाकृत आसान होता है। उन्हें आमतौर पर Form 16 और दूसरी इनकम की जानकारी जांचकर रिटर्न दाखिल करना होता है। लेकिन फ्रीलांसर, कंसल्टेंट और दूसरे प्रोफेशनल्स के लिए प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है।

ITR Filing 2026

ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है।

आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 7 करोड़ से ज्यादा इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। जिन टैक्सपेयर्स की बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम है और जिन्हें अपने अकाउंट का ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है, उनके लिए ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। इसलिए आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय समय पर रिटर्न दाखिल करना बेहतर है। यहां बताया गया है कि आईटीआर दाखिल करते समय कौन सी गलतियों से बचना जरूरी है।

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नौकरीपेशा और प्रोफेशनल्स के ITR में अंतर

नौकरीपेशा लोगों के लिए ITR भरना अपेक्षाकृत आसान होता है। उन्हें आमतौर पर Form 16 और दूसरी इनकम की जानकारी जांचकर रिटर्न दाखिल करना होता है। लेकिन फ्रीलांसर, कंसल्टेंट और दूसरे प्रोफेशनल्स के लिए प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है। उन्हें कई क्लाइंट्स से मिले भुगतान, अलग-अलग जगह कटे TDS, बिजनेस खर्च और टैक्स की सही व्यवस्था का ध्यान रखना पड़ता है।

सही ITR फॉर्म चुनना जरूरी

बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वाले व्यक्ति या HUF को आमतौर पर ITR-3 दाखिल करना होता है। हालांकि, अगर कोई टैक्सपेयर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित आय के नियमों के तहत योग्य है, तो वह ITR-4 का इस्तेमाल कर सकता है।

ITR-4 उन योग्य निवासी व्यक्तियों, HUF और LLP को छोड़कर दूसरी फर्मों के लिए उपलब्ध है, जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और बिजनेस या प्रोफेशन की आय धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत तय की जाती है। जो व्यक्ति ITR-4 की शर्तें पूरी नहीं करता, उसे ITR-3 दाखिल करना होता है।

टर्नओवर की जानकारी जांचें

ITR में टर्नओवर या कुल प्राप्तियों की रकम सीधे बैंक अकाउंट या बुक्स से उठाकर नहीं भरनी चाहिए। पहले सभी आंकड़ों का मिलान करना जरूरी है। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, इनवॉइस, GST रिकॉर्ड, TDS सर्टिफिकेट, Form 26AS और AIS यानी Annual Information Statement की जांच करनी चाहिए।

AIS में इनकम, वित्तीय लेनदेन, शेयर या सिक्योरिटीज से जुड़े लेनदेन, ब्याज और टैक्स विभाग को रिपोर्ट की गई दूसरी जानकारी हो सकती है। इसलिए ITR में दी गई जानकारी इन रिकॉर्ड्स से मेल खानी चाहिए।

बिजनेस लॉस होने पर सावधानी

अगर किसी व्यक्ति को बिजनेस या प्रोफेशन में नुकसान हुआ है, तो ITR समय पर दाखिल करना और भी जरूरी है। निर्धारित तारीख के अंदर रिटर्न दाखिल करने पर ऐसे नुकसान को आगे के वर्षों में ले जाने और भविष्य की आय से एडजस्ट करने की सुविधा मिल सकती है। अगर रिटर्न देर से दाखिल किया जाता है, तो कई तरह के बिजनेस या प्रोफेशनल लॉस को आगे ले जाने का लाभ नहीं मिल पाता।

प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन को समझें

छोटे बिजनेस और योग्य प्रोफेशनल्स के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। उदाहरण के लिए, धारा 44ADA के तहत योग्य प्रोफेशनल्स की कुल ग्रॉस रिसीट्स का 50 प्रतिशत हिस्सा अनुमानित टैक्सेबल इनकम माना जा सकता है। इससे योग्य लोगों के लिए अकाउंट्स की जटिलता कम हो सकती है।

टैक्स रिजीम चुनने में जल्दबाजी न करें

बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम के बीच फैसला सोच-समझकर करना जरूरी है। नौकरीपेशा लोगों की तरह वे हर साल अपनी पसंद के अनुसार आसानी से रिजीम नहीं बदल सकते। इसलिए मौजूदा साल की आय के साथ-साथ भविष्य की आय, उपलब्ध डिडक्शन और संभावित टैक्स लाभ को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।

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