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  1. क्या आपको भी मिला है टैक्स नोटिस? घबराहट में न करें गलती, ऐसे करें ऑनलाइन रिप्लाई

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क्या आपको भी मिला है टैक्स नोटिस? घबराहट में न करें गलती, ऐसे करें ऑनलाइन रिप्लाई

Upstox

3 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 15:53 IST

सारांश

इनकम टैक्स का नोटिस मिलना हमेशा घबराने वाली बात नहीं होती है। अक्सर विभाग सिर्फ कुछ अतिरिक्त जानकारी या रिटर्न में दी गयी डिटेल्स की पुष्टि करने के लिए संदेश भेजता है । आप आयकर विभाग के पोर्टल पर जाकर इसकी सच्चाई का पता लगा सकते हैं और समय रहते ऑनलाइन जवाब देकर मामले को खत्म कर सकते हैं ।

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इनकम टैक्स विभाग के नोटिस का समय पर जवाब देकर आप बड़ी परेशानी से बच सकते हैं। | Image: Shutterstock.

इनकम टैक्स का नोटिस मिलते ही ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं, लेकिन हकीकत में ऐसे ज्यादातर नोटिस सिर्फ एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। अक्सर टैक्स विभाग आपसे कुछ अतिरिक्त जानकारी मांगता है या फिर आपके द्वारा फाइल किये गये रिटर्न में दी गयी जानकारी की पुष्टि करना चाहता है। ऐसे में बिना डरे और शांति से समय पर जवाब देना ही सबसे अच्छा तरीका है। अगर आप सही दस्तावेजों के साथ विभाग के सवालों का जवाब देते हैं, तो मामला आसानी से सुलझ सकता है। नोटिस को विभाग की तरफ से आपकी आर्थिक डिटेल्स पर सफाई मांगने का एक जरिया माना जाना चाहिये।

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नोटिस की सच्चाई का पता लगाना है जरूरी

इनकम टैक्स विभाग के नाम पर कई बार फर्जी संदेश भी आ सकते हैं, इसलिए जवाब देने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करना बहुत जरूरी है। आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर आप ऑनलाइन वेरिफिकेशन फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी DIN, पैन कार्ड और अपना मोबाइल फोन पास रखना चाहिये। एक बार जब यह पुख्ता हो जाये कि नोटिस असली है, तभी आपको आगे की कार्यवाही और रिप्लाई की तैयारी शुरू करनी चाहिये।

नोटिस के सेक्शन को समझना है पहला कदम

हर नोटिस के ऊपर एक सेक्शन लिखा होता है, जिससे यह पता चलता है कि विभाग आपसे क्या पूछना चाहता है। जैसे सेक्शन 143(1) का मतलब है कि आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग हो गयी है और उसका इंटिमेशन आपको मिला है। वहीं सेक्शन 143(2) का मतलब है कि आपके मामले की बारीक जांच यानी स्क्रूटनी की जा रही है। इसके अलावा सेक्शन 142(1) के तहत असेसमेंट से पहले जानकारी मांगी जाती है और सेक्शन 148 के तहत दोबारा असेसमेंट की बात होती है। सेक्शन 245 का नोटिस तब भेजा जाता है जब विभाग को किसी पुराने बकाया टैक्स की वसूली करनी हो या उसे एडजस्ट करना हो।

ऑनलाइन जवाब देने की पूरी प्रोसेस

नोटिस का जवाब देने के लिए आपको आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर साइन इन करना होगा। वहां आपको 'पेंडिंग एक्शन्स' टैब के अंदर 'ई-प्रोसीडिंग्स' का विकल्प मिलेगा, जिस पर क्लिक करके आप अपना नोटिस देख सकते हैं। इसी पोर्टल पर आप अपना जवाब लिख सकते हैं और मांगे गये दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। जवाब पूरी तरह से जमा होने के बाद उसकी एक्नॉलेजमेंट कॉपी जरूर सेव कर लें, क्योंकि यह भविष्य में इस बात का सबूत होगा कि आपने विभाग के नियमों का पालन किया है।

नोटिस मिलने के बाद उससे जुड़े सभी रिकॉर्ड और कागज जुटाना बहुत जरूरी है। आमतौर पर विभाग बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16, निवेश के सबूत, आईडी प्रूफ और वित्तीय लेन-देन की डिटेल्स मांगता है। अगर आपने अपना मामला सुलझाने के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या वित्तीय सलाहकार की मदद ली है, तो आप उन्हें भी यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं ताकि वे सीधे विभाग से बात कर सकें।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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