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4 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 10:28 IST
सारांश
अप्रैल में वैश्विक तनाव के बीच भारतीय निवेशकों ने सोने में भारी निवेश किया है। सिर्फ गोल्ड ETF में ही 34 पर्सेंट की बढ़त के साथ 3,040.3 करोड़ रुपये का निवेश आया। इसके अलावा डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों में भी लोगों ने सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के लिए जमकर पैसा लगाया है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति को देखते हुए सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ गई है। | Image: Shutterstock
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोने की तरफ भागते हैं। लेकिन अब निवेश का तरीका बदल गया है। लोग अब भारी-भरकम गहने या सोने के सिक्के खरीदकर उन्हें घर की तिजोरी में रखने के बजाय डिजिटल तरीके से सोना खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अप्रैल महीने के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय निवेशकों ने गोल्ड ETF में जमकर पैसा लगाया है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने में गोल्ड ETF में निवेश की रफ्तार में जबरदस्त तेजी आई है। इस दौरान निवेशकों ने नेट 3,040.3 करोड़ रुपये का निवेश किया है। अगर मार्च महीने से इसकी तुलना करें, तो इसमें करीब 34 पर्सेंट का उछाल देखा गया है। मार्च में यह निवेश 2,266 करोड़ रुपये के आसपास था। गोल्ड ETF निवेशकों के लिए एक ऐसा जरिया है जहां वे बिना किसी फिजिकल स्टोरेज की टेंशन के सोने में निवेश कर सकते हैं। भारत में अभी निवेश के लिए 25 ऐसी स्कीम्स उपलब्ध हैं, जिनका कुल एसेट बेस यानी एयूएम अब 1.78 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
सोने में निवेश का एक और बहुत ही आसान और लोकप्रिय तरीका डिजिटल गोल्ड बनकर उभरा है। डिजिटल गोल्ड में सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप इसे बहुत ही कम राशि, जैसे 1 रुपये से भी शुरू कर सकते हैं। कई मोबाइल वॉलेट और ऐप्स के जरिए निवेशक 24 कैरेट शुद्ध सोना खरीद रहे हैं। इसमें सोने को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी बेचने वाली कंपनी की होती है और निवेशक जब चाहे इसे बेचकर पैसे ले सकता है या फिर इसकी फिजिकल डिलीवरी भी मांग सकता है। अप्रैल के महीने में युद्ध की आशंकाओं के बीच मध्यम वर्ग के निवेशकों ने डिजिटल गोल्ड के जरिए अपनी सेविंग्स को सोने में बदला है।
इसके अलावा आप चाहें तो ज्वैलरी कंपनियों में भी शेयर खरीदकर इनडायरेक्ट तौर पर गोल्ड में तेजी का फायदा ले सकते हैं। अक्सर एक्सपर्ट यह कहते हैं कि गोल्ड मेकिंग कंपनियों में निवेश करने से फायदा तभी होता है, जब सोने की डिमांड बढ़ती है। और इस रिपोर्ट को देखकर यह लग रहा है कि डिमांड में तेजी आ रही है। बाकी आप गोल्ड म्यूचुअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं, इसके लिए डीमैट अकाउंट की भी जरूरत नहीं पड़ती है।
निवेशकों का झुकाव डिजिटल सोने की तरफ बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला तो यह कि इसमें शुद्धता की पूरी गारंटी रहती है और चोरी होने का डर नहीं होता। दूसरा, इसे बेचना बहुत ही आसान है और इसमें किसी तरह के मेकिंग चार्जेस या कटौती का झंझट नहीं रहता। तीसरा बड़ा कारण यह है कि यह निवेश बहुत ही लिक्विड होता है, यानी आप जरूरत पड़ने पर तुरंत इसे बेचकर पैसे निकाल सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी और बढ़ेगी, डिजिटल सोने में निवेश का चलन और ज्यादा तेज होगा।
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सोने के प्रति निवेशकों का प्रेम दोबारा जागा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में दुनिया भर के गोल्ड ETF में करीब 6.6 बिलियन डॉलर का बड़ा निवेश आया है। मार्च के महीने में दुनिया भर से निवेश बाहर जा रहा था, लेकिन अप्रैल में स्थिति पूरी तरह बदल गई। यूरोप और अन्य देशों के निवेशकों ने भी सोने को एक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुना है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के डर ने लोगों को अपनी संपत्ति बचाने के लिए सोने की शरण में जाने पर मजबूर कर दिया है।
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