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Mobikwik Q4 Results: चौथी तिमाही में घाटा खत्म कर मुनाफे में लौटी कंपनी, ₹2,887 करोड़ पहुंचा रेवेन्यू

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 11:59 IST

सारांश

वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 43.84 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी को 560.37 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था। कंपनी के एबिटा में भी इस दौरान अच्छा सुधार देखने को मिला है।

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मोबिक्विक ने चौथी तिमाही में मुनाफे के साथ साल का शानदार अंत किया है।

फिनटेक सेक्टर की दिग्गज कंपनी वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड ने मंगलवार को अपने वित्तीय नतीजों का ऐलान कर दिया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में मार्च 2026 को खत्म हुई चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के कंसोलिडेटेड नतीजों को मंजूरी दी गई। कंपनी के लिए यह तिमाही बहुत ही शानदार रही है क्योंकि कंपनी ने न सिर्फ अपने घाटे को पूरी तरह खत्म किया है, बल्कि एक मजबूत मुनाफा भी दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में मोबिक्विक ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 43.84 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल किया है।

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यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल इसी तिमाही (Q4 FY25) में कंपनी को 560.37 करोड़ रुपये का भारी नेट लॉस हुआ था। अगर ऑपरेशन्स से रेवेन्यू की बात करें, तो इस तिमाही में कंपनी ने 2,887.12 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जेनरेट किया है। कंपनी का एबिटा (EBITDA) भी 174.11 करोड़ रुपये के पॉजिटिव स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी दौरान 457.61 करोड़ रुपये के घाटे में था।

खर्चों और ऑपरेशन्स का ये रहा लेखा-जोखा

अगर पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात की जाए, तो कंपनी का कुल रेवेन्यू 11,192.32 करोड़ रुपये रहा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 11,701.74 करोड़ रुपये था। पूरे साल के आधार पर कंपनी को 621.01 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ है, हालांकि यह पिछले साल के 1,215.29 करोड़ रुपये के घाटे के मुकाबले काफी कम है। कंपनी ने साल भर के दौरान अपने खर्चों को कंट्रोल करने और ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को सुधारने पर काफी जोर दिया है, जिसका असर चौथी तिमाही के नतीजों में साफ दिख रहा है।

चौथी तिमाही में कंपनी के कुल खर्चे 2,786.21 करोड़ रुपये रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पेमेंट प्रोसेसिंग चार्जेस का है, जो 1,193.13 करोड़ रुपये रहा। इसके अलावा कंपनी ने एम्प्लॉई बेनिफिट्स पर 461.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कंपनी की वित्तीय स्थिति को देखें तो 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास कुल एसेट्स 14,085.68 करोड़ रुपये के हैं। कैश और कैश इक्विवेलेंट के तौर पर कंपनी के पास 2,391.35 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी मौजूद है।

तकनीकी गड़बड़ी और नए लेबर कोड का असर

कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ असाधारण आइटम्स (Exceptional Items) की जानकारी भी दी है। कंपनी ने बताया कि सितंबर 2025 में ऐप में एक तकनीकी बग का फायदा उठाकर कुछ मर्चेंट्स ने 403.59 करोड़ रुपये के गलत सेटलमेंट क्लेम किए थे। इसमें से कंपनी अब तक 276.02 करोड़ रुपये वापस रिकवर करने में सफल रही है। इसके अलावा भारत सरकार के नए लेबर कोड के लागू होने की वजह से कंपनी पर करीब 35.41 करोड़ रुपये का वित्तीय असर पड़ा है, जिसमें ग्रेच्युटी और लीव प्रोविजन्स शामिल हैं। इन चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने ऑपरेशन्स में मजबूती दिखाई है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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