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  1. घर खरीदने का बना रहे हैं प्लान? होम लोन लेते समय न करें ये 5 गलतियां वरना बढ़ जाएगा ईएमआई का बोझ

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घर खरीदने का बना रहे हैं प्लान? होम लोन लेते समय न करें ये 5 गलतियां वरना बढ़ जाएगा ईएमआई का बोझ

Upstox

3 min read | अपडेटेड July 23, 2026, 14:30 IST

सारांश

अपना घर खरीदने के लिए लोग अक्सर होम लोन का सहारा लेते हैं। लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से कई बार वे ऐसा लोन चुन लेते हैं जिससे ब्याज का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। लोन की बहुत लंबी अवधि, कम डाउन पेमेंट, खराब क्रेडिट स्कोर और छिपे हुए खर्च आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं।

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अपना घर खरीदना जिंदगी का एक बहुत बड़ा आर्थिक फैसला होता है।

अपना घर खरीदना हर इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा सपना और आर्थिक फैसला होता है। इस सपने को पूरा करने में होम लोन एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक सही तरीके से तैयार किया गया होम लोन आपके घर मालिक बनने के सपने को आसानी से सच कर सकता है। लेकिन लोन के लिए अप्लाई करने से पहले हर व्यक्ति को अपनी चुकाने की क्षमता, लोन के स्ट्रक्चर, महीने की ईएमआई और अपने मौजूदा आर्थिक खर्चों का बहुत बारीकी से आकलन करना चाहिए। अक्सर पहली बार घर खरीदने वाले लोग या तो सबसे ज्यादा लोन अमाउंट पाना चाहते हैं या फिर सबसे कम ईएमआई की तरफ भागते हैं। हालांकि सबसे कम ईएमआई का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि लोन आपके लिए किफायती है। लोन की अवधि, ब्याज दरें, डाउन पेमेंट और अतिरिक्त खर्चे यह तय करते हैं कि आपके लोन की असली लागत कितनी होगी।

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जरूरत से ज्यादा लंबी अवधि चुनना

होम लोन लेते समय लोग अक्सर ईएमआई को कम करने के लिए सबसे लंबी अवधि का विकल्प चुन लेते हैं। लोन की अवधि लंबी होने से आपकी महीने की ईएमआई भले ही कम हो जाती है, लेकिन पूरे लोन के दौरान आपको ब्याज के रूप में बहुत बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। इससे आपके घर की कुल कीमत काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए खरीदारों को हमेशा ऐसी लोन अवधि चुननी चाहिए जो ईएमआई को संभाल में रखे और बिना वजह ब्याज का खर्च न बढ़ाए।

बहुत कम डाउन पेमेंट करना

शुरुआत में कम पैसा खर्च करने के चक्कर में लोग बहुत कम डाउन पेमेंट करते हैं। डाउन पेमेंट की रकम कम होने से बैंक से ज्यादा लोन लेना पड़ता है। लोन अमाउंट बढ़ने की वजह से ब्याज का भुगतान भी ज्यादा करना पड़ता है और लोन चुकाने की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए खरीदारों को शुरुआत में ही एक अच्छा डाउन पेमेंट करने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि लोन का बोझ कम हो सके और आर्थिक आजादी बनी रहे।

छिपे हुए खर्चों को नजरअंदाज करना

घर खरीदते समय लोग केवल घर की कीमत और लोन की रकम पर ध्यान देते हैं। वे प्रॉपर्टी से जुड़े बाकी खर्चों को भूल जाते हैं। रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और अन्य अतिरिक्त खर्चे आपके हर महीने के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकते हैं। इसलिए होम लोन की योजना बनाते समय इन सभी अतिरिक्त खर्चों को घर की कुल लागत में जोड़कर ही हिसाब लगाना चाहिए।

क्रेडिट स्कोर के असर को अनदेखा करना

क्रेडिट स्कोर का आपके होम लोन की ब्याज दरों पर सीधा असर पड़ता है। कमजोर क्रेडिट स्कोर होने की वजह से बैंक आपको ज्यादा ब्याज दर पर लोन दे सकते हैं। इससे आपकी महीने की ईएमआई और कुल चुकाने वाली रकम दोनों बढ़ जाती हैं। होम लोन लेने से पहले अपने क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी है, ताकि आपको बेहतर शर्तों और कम ब्याज दर पर लोन मिल सके।

अपनी क्षमता के आखिरी छोर तक कर्ज लेना

बहुत से लोग अपनी एलिजिबिलिटी के हिसाब से मिलने वाला अधिकतम लोन ले लेते हैं। अपनी पूरी क्षमता तक कर्ज लेने से इमरजेंसी, भविष्य के लक्ष्यों या अचानक आने वाले खर्चों के लिए कोई गुंजाइश नहीं बचती है। खरीदारों को हमेशा उतना ही लोन चुनना चाहिए जिसे वे किसी भी तरह की आर्थिक अनिश्चितता के दौरान भी आसानी से चुका सकें।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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