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4 min read | अपडेटेड July 20, 2026, 14:35 IST
सारांश
भारतीय निवेशको के लिए इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड में नई SIP शुरू करने के विकल्प तेजी से कम हो रहे हैं। एडलवाइस, PGIM इंडिया और फ्रैंकलिन टेम्पलटन जैसे फंड हाउसेज ने चुनिंदा इंटरनेशनल स्कीम्स में नए निवेश पर रोक लगा दी है।

इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नए निवेश पर लगी रोक से निवेशक परेशान।
भारतीय निवेशको के लिए विदेशी बाजारो में पैसा लगाने के मौके लगातार कम होते जा रहे हैं। अगर आप किसी इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड में नई सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आपके पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। हाल ही में एडलवाइस म्यूचुअल फंड, PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड और फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंड जैसी बड़ी कंपनियो ने अपनी कुछ खास इंटरनेशनल स्कीम्स में नई एसआईपी और एकमुश्त निवेश पर रोक लगा दी है। कंपनियो का कहना है कि यह फैसला विदेशी निवेश को लेकर बाजार नियामक सेबी द्वारा तय की गई सीमा के कारण लिया गया है।
इस पाबंदी का इन फंड्स के प्रदर्शन या परफॉर्मेंस से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, साल 2022 में मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए विदेशी निवेश की एक अधिकतम सीमा तय की थी। नियम के मुताबिक, भारतीय म्यूचुअल फंड्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश करने की अनुमति है, जिससे घरेलू निवेशको को ग्लोबल मार्केट का लाभ मिलता है। लेकिन जब पूरी इंडस्ट्री इस सीमा को पार करने लगती है, तो नए निवेश पर रोक लगा दी जाती है। फरवरी 2022 में जब पहली बार यह लिमिट पूरी हो गई थी, तब सेबी ने फंड हाउसेज को नए निवेश लेने से मना कर दिया था। इसके बाद से जब भी कंपनियां अपनी तय सीमा के करीब पहुंचती हैं, वे नए निवेश पर अस्थाई रोक लगा देती हैं। हालांकि, जिन निवेशको का पैसा पहले से इन स्कीम्स में लगा हुआ है, उनके निवेश पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
पिछले कुछ सालो में भारतीय निवेशको के बीच ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन यानी दुनिया भर के बाजारो में पैसा लगाने की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। अमेरिका, यूरोप और ग्लोबल थीमैटिक सेक्टर के बाजारो में निवेश करने वाले विदेशी इक्विटी फंड्स में निवेशको ने जमकर पैसा लगाया है। इसी वजह से कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियां सेबी द्वारा तय की गई अपनी रेगुलेटरी लिमिट के बेहद करीब पहुंच गई हैं। पिछले हफ्ते ही एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने कहा कि वह अपनी विदेशी निवेश सीमा के करीब पहुंच रहा है, इसलिए चुनिंदा इंटरनेशनल फंड्स में नए निवेश रोक दिए गए हैं। PGIM इंडिया और फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने भी यही वजह बताई है। इस समय बड़ौदा बीएनपी पारिबा एक्वा फंड ऑफ फंड जैसी बहुत ही कम स्कीम्स बची हैं, जो नए निवेश और एसआईपी दोनों स्वीकार कर रही हैं।
विदेशी बाजारो में निवेश करने के इच्छुक लोगो के लिए पारंपरिक म्यूचुअल फंड के बाहर अब भी कुछ रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी LRS का है। इसके तहत भारतीय नागरिक सीधे विदेशी सिक्योरिटीज और फंड्स में निवेश कर सकते हैं। बजट 2025 में सरकार ने LRS के तहत टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स यानी TCS की सीमा को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है, जिससे छोटे निवेशको पर टैक्स का बोझ कम हुआ है।
दूसरा विकल्प गिफ्ट सिटी में मौजूद रिटेल फंड्स का है, जिन पर म्यूचुअल फंड की यह घरेलू सीमा लागू नहीं होती। इसके लिए किसी विदेशी बैंक खाते की भी जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा, भारतीय एक्सचेंजो पर लिस्टेड ग्लोबल एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ भी एक अच्छा माध्यम हैं, क्योकि इन पर म्यूचुअल फंड जैसी पाबंदियां नहीं होती हैं। हालांकि, निवेश से पहले यह अवश्य देख लेना चाहिए कि ईटीएफ अपने नेट एसेट वैल्यू से बहुत ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड न कर रहा हो। जब तक सेबी इस सीमा को नहीं बढ़ाता, तब तक निवेशको के लिए ये वैकल्पिक रास्ते फ्यूचर में बहुत काम के साबित होंगे।
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