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4 min read | अपडेटेड October 06, 2026, 18:03 IST
सारांश
शेयर बाजार में आई गिरावट ने समय से पहले रिटायरमेंट यानी फायर प्लान करने वालों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक साल में निफ्टी 9% तक टूट चुका है। ऐसे में सिर्फ शेयर बाजार में पूरा पैसा लगाने वालों का 5 करोड़ का पोर्टफोलियो भारी नुकसान में है। जानिए इस जोखिम से बचने के आसान उपाय।

शेयर बाजार की गिरावट से फायर पोर्टफोलियो को बचाने के लिए एसेट एलोकेशन में बदलाव करना जरूरी है।
शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो कम उम्र में रिटायरमेंट यानी फायर (FIRE - फाइनेंसियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली) का सपना देख रहे थे। अगर आपने भी जल्दी रिटायर होने के लिए अपनी जिंदगी भर की सेविंग्स शेयर बाजार में लगा रखी हैं, तो हालिया गिरावट से आपका रिस्क बैलेंस पूरी तरह से बिगड़ चुका होगा। पिछले एक साल के आंकड़ों को देखें तो निफ्टी में करीब 9% तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
इस लिहाज से देखा जाए तो अगर किसी निवेशक ने फायर गोल के तहत 5 करोड़ रुपए का भारी-भरकम फंड पूरी तरह से इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश कर रखा होगा, तो उसका पोर्टफोलियो आज बड़े नुकसान में चल रहा होगा। बाजार की इस गिरावट ने यह साबित कर दिया है कि एक ही जगह सारा पैसा लगाने की गलती रिटायरमेंट के पूरे प्लान को चौपट कर सकती है।
फायर मूवमेंट के तहत लोग कम उम्र में बड़ा फंड तैयार करके रिटायर होना चाहते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग सबसे बड़ी गलती एसेट एलोकेशन में कर बैठते हैं। जब बाजार तेजी से ऊपर जा रहा होता है, तब लोग ज्यादा रिटर्न के लालच में अपना 100% पैसा इक्विटी या इक्विटी बेस्ड म्यूच्यूअल फंड्स में डाल देते हैं। लेकिन जब बाजार में 9% जैसी गिरावट आती है, तो 5 करोड़ रुपए का पोर्टफोलियो घट कर काफी नीचे आ जाता है। इससे न सिर्फ आपकी जमा पूंजी कम होती है, बल्कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने निकाले जाने वाले पैसे का कैलकुलेशन भी पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है। अगर गिरावट के समय ही आपको अपने खर्चों के लिए शेयर बेचने पड़ जाएं, तो आपका पोर्टफोलियो कभी रिकवर ही नहीं कर पाता है। यही वजह है कि सारा पैसा सिर्फ शेयर बाजार में लगाना भारी पड़ सकता है।
फायर गोल को सुरक्षित रखने के लिए पोर्टफोलियो में विविधता यानी सही एसेट एलोकेशन होना बेहद जरूरी है। अपने पूरे पैसे को सिर्फ इक्विटी में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग जगह बांटना चाहिए। निवेशक को अपनी जमा पूंजी का कुछ हिस्सा डेट फंड्स और फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में लगाना चाहिए, जिससे बाजार गिरने पर भी रेगुलर इनकम और स्थिरता बनी रहे। इसके अलावा सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड्स भी एक सुरक्षित विकल्प साबित होते हैं। अपने पोर्टफोलियो को महंगाई और मार्केट क्रैश से बचाने के लिए कम से कम 10 से 15% पैसा गोल्ड यानी सोने में निवेश करना चाहिए। गोल्ड हमेशा संकट के समय पोर्टफोलियो को मजबूती देता है। अगर संभव हो तो कुछ पैसा रीट्स (REITs) में भी लगाया जा सकता है, जो बिना जमीन खरीदे सीधा रियल एस्टेट में निवेश करने का मौका देता है और नियमित डिविडेंड इनकम भी प्रदान करता है।
फायर का असली नियम सिर्फ पैसा जुटाना नहीं, बल्कि उस पैसे को सही तरह से सुरक्षित रखना और मैनेज करना सिखाता है। फायर का बेसिक रूल कहता है कि आपके पास अपने सालाना खर्च का कम से कम 25 गुना फंड होना चाहिए। इसके साथ ही 4% विड्रॉल रूल का पालन किया जाता है, यानी रिटायरमेंट के बाद आप हर साल अपने कुल फंड का केवल 4% पैसा ही निकाल सकते हैं। लेकिन यह नियम तभी काम करता है जब आपका एसेट एलोकेशन सही हो। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं या रिटायर हो चुके हैं, तो आपका 30 से 40% पैसा ही इक्विटी में होना चाहिए। बाकी का पैसा डेट, बॉन्ड्स, गोल्ड और रीट्स में होना चाहिए ताकि मार्केट गिरने पर आपको इक्विटी से पैसा न निकालना पड़े। सही रीबैलेंसिंग करके ही आप अपने फ्यूचर को सुरक्षित रख सकते हैं।
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