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  1. अगर इमरजेंसी में हो पैसों की जरूरत? तो FD तोड़ना समझदारी भरा फैसला या फिर पर्सनल लोन लेना है बेस्ट

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अगर इमरजेंसी में हो पैसों की जरूरत? तो FD तोड़ना समझदारी भरा फैसला या फिर पर्सनल लोन लेना है बेस्ट

Upstox

4 min read | अपडेटेड August 21, 2026, 14:41 IST

सारांश

अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर लोग अक्सर पर्सनल लोन का रास्ता चुनते हैं। लेकिन अगर आपके पास फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD है, तो उस पर लोन लेना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। FD पर कम ब्याज दर पर लोन मिलता है और आपकी FD पर मिलने वाला ब्याज भी जारी रहता है।

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पर्सनल लोन के मुकाबले FD पर लोन लेना जियादा किफायती और आसान विकल्प साबित होता है।

जीवन में अचानक कई बार ऐसे मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या घर की मरम्मत जैसे खर्चे सामने आ जाते हैं, जिनके लिए हमारी बचत काफी नहीं होती। ऐसी स्थिति में पैसों का इंतजाम करने के लिए लोग सबसे पहले पर्सनल लोन के बारे में सोचते हैं, क्योंकि इसे लेना काफी आसान माना जाता है। लेकिन अगर आपने पहले से ही बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD करा रखी है, तो पर्सनल लोन लेने के बजाय उस पर लोन लेना एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है। बिना FD तोड़े आप उस पर लोन लेकर पर्सनल लोन के मुकाबले भारी ब्याज बचा सकते हैं।

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FD पर लोन कैसे काम करता है

जब आप अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले लोन लेते हैं, तो बैंक आपकी FD को बंद नहीं करता है। इसके बजाय बैंक आपकी जमा राशि पर लियन यानी अधिकार लगा देता है और उसकी वैल्यू के आधार पर आपको लोन की रकम दे देता है। कई बैंक ग्राहकों को FD की वैल्यू का एक तय% तक लोन देने की सुविधा देते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप सरकारी बैंक एसबीआई को चुनते हैं, तो वह आपको अपनी FD का 90% तक लोन लेने की इजाजत दे सकता है। हालांकि यह सीमा अलग अलग बैंकों के नियमों पर निर्भर करती है। सबसे अच्छी बात यह है कि लोन लेने के बाद भी आपकी FD पर मिलने वाला ब्याज बंद नहीं होता और आपको वह मिलता रहता है।

क्यों कम होती है FD लोन की ब्याज दर?

FD पर मिलने वाले लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन से काफी कम होती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बैंक के पास सुरक्षा के तौर पर आपकी FD पहले से ही गारंटी यानी कोलेटरल के रूप में मौजूद होती है। चूंकि बैंक का जोखिम बहुत कम हो जाता है, इसलिए वह आपसे कम ब्याज दर वसूल करता है। दूसरी तरफ पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के दिया जाता है। उसमें बैंक के पास कोई कोलेटरल नहीं होता, इसलिए बैंक जियादा ब्याज दर वसूलते हैं। इसके अलावा पर्सनल लोन की ब्याज दरें उधार लेने वाले व्यक्ति के क्रेडिट स्कोर, सैलरी और पुराने रीपेमेंट रिकॉर्ड पर भी निर्भर करती हैं।

5 लाख रुपये के लोन का गणित समझें

आइए इसे एक उदाहरण के जरिए समझते हैं। मान लीजिए आपको 2 साल यानी 24 महीनों के लिए 5,00,000 रुपये के लोन की जरूरत है। अगर आप FD के बदले लोन लेते हैं और उस पर 8% की दर से ब्याज लगता है, तो आपकी महीने की EMI लगभग 22,600 रुपये होगी। इस तरह आप 2 साल में कुल 42,700 रुपये का ब्याज चुकाएंगे। वहीं अगर आप इतनी ही रकम और इतने ही समय के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, जिस पर मान लीजिए 12% का ब्याज लग रहा है, तो आपकी हर महीने की EMI लगभग 23,500 रुपये बनेगी और कुल ब्याज लगभग 64,900 रुपये हो जाएगा।

हजारों रुपये की बचत का सीधा मौका

इस कैलकुलेशन के हिसाब से देखें तो पर्सनल लोन लेने पर आपको केवल ब्याज के रूप में ही 22,000 रुपये से जियादा की अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ जाएगी। जबकि FD के बदले लोन लेकर आप इस रकम की सीधी बचत कर सकते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े केवल समझाने के उद्देश्य से दिए गए उदाहरण हैं। अलग अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शर्तों, नियमों और ब्याज दरों के हिसाब से आपकी फाइनल EMI और ब्याज की रकम में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए जब भी इमरजेंसी में पैसों की जरूरत पड़े, अपनी FD पर लोन के विकल्प को जरूर देखना चाहिए।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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