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SEBI ने बढ़ाई ETF नियम लागू करने की डेडलाइन, क्या हैं नए नियम और निवेशकों पर क्या होगा असर?

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 01, 2026, 14:36 IST

सारांश

SEBI ने ETF के लिए यह नया फ्रेमवर्क 15 जून को जारी किए गए सर्कुलर में बताया था। इसमें ETF के बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन सेशन में कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रोसीजर से जुड़े नियम शामिल हैं। 28 अगस्त के अपडेट में इन नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

ETF

ETF ऐसे निवेश उत्पाद हैं जो शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदे और बेचे जाते हैं।

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में ट्रेडिंग से जुड़े नए नियम अब 7 सितंबर 2026 से लागू होंगे। पहले इन्हें 1 सितंबर से लागू किया जाना था, लेकिन मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इसकी तारीख एक हफ्ते आगे बढ़ा दी है। SEBI ने एक सर्कुलर जारी करते हुए इस बदलाव की जानकारी दी है। रेगुलेटर ने यह फैसला स्टॉक एक्सचेंजों से मिले फीडबैक के बाद लिया है, ताकि नए नियमों को लागू करने में किसी तरह की परेशानी न हो।

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जून में जारी किया था सर्कुलर

SEBI ने ETF के लिए यह नया फ्रेमवर्क 15 जून को जारी किए गए सर्कुलर में बताया था। इसमें ETF के बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन सेशन में कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रोसीजर से जुड़े नियम शामिल हैं। 28 अगस्त के अपडेट में इन नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। सिर्फ इन्हें लागू करने की तारीख 1 सितंबर से बढ़ाकर 7 सितंबर कर दी गई है।

क्या होते हैं ETF?

ETF ऐसे निवेश उत्पाद हैं जो शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदे और बेचे जाते हैं। हालांकि, इनके अंदर अलग-अलग तरह की एसेट्स हो सकती हैं। इनमें शेयर, बॉन्ड, कमोडिटी या किसी अन्य एसेट का पोर्टफोलियो शामिल हो सकता है। चूंकि ETF की खरीद-बिक्री एक्सचेंज पर होती है और इसके पीछे अलग-अलग एसेट्स का पोर्टफोलियो होता है, इसलिए इसकी ट्रेडिंग और सेटलमेंट प्रक्रिया को सामान्य शेयरों से कुछ अलग तरीके से मैनेज करना पड़ता है।

बेस प्राइस और प्राइस बैंड के नियम

SEBI के नए फ्रेमवर्क में ETF के बेस प्राइस और प्राइस बैंड को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। बेस प्राइस का इस्तेमाल ट्रेडिंग की शुरुआत के समय संदर्भ कीमत के तौर पर किया जाता है, जबकि प्राइस बैंड यह तय करता है कि किसी ETF की कीमत एक दिन में एक तय सीमा से ज्यादा ऊपर या नीचे न जाए। इन नियमों का उद्देश्य ETF की ट्रेडिंग प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और स्पष्ट बनाना है।

प्री-ओपन में कॉल ऑक्शन क्या होगा?

नए नियमों में ETF के प्री-ओपन सेशन में कॉल ऑक्शन का भी प्रावधान किया गया है। इसमें एक निश्चित समय के दौरान खरीदने और बेचने के ऑर्डर इकट्ठे किए जाते हैं। इसके बाद ऐसी कीमत पर ऑर्डर मैच किए जाते हैं, जिस पर ज्यादा से ज्यादा ट्रेड हो सकें। इससे ETF की शुरुआती ट्रेडिंग में कीमत तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

क्लोज-आउट प्रोसीजर भी शामिल

SEBI ने ETF के लिए क्लोज-आउट प्रोसीजर भी तय किया है। इसका इस्तेमाल ऐसी स्थिति में किया जाएगा, जब किसी ट्रेड से जुड़ी डिलीवरी या सेटलमेंट की जिम्मेदारी सामान्य प्रक्रिया के जरिए पूरी नहीं हो पाती है। इससे ऐसी परिस्थितियों को संभालने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध होगी।

निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ये नए नियम 7 सितंबर से लागू होंगे। स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और अन्य मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाओं को इसके लिए जरूरी सिस्टम तैयार करने और अपने नियमों में आवश्यक बदलाव करने को कहा गया है। हालांकि, आम निवेशकों के लिए ETF में निवेश करने की बुनियादी प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। नए नियम मुख्य रूप से ETF की ट्रेडिंग, कीमत तय करने और सेटलमेंट प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट और स्टैंडर्ड बनाने से जुड़े हैं।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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